बुधवार, 28 अगस्त 2019

हरतालिका तीज पर जानें महिलाओं के 16 श्रंगार करने के पीछे का महत्व 

हरतालिका तीज पर जानें महिलाओं के 16 श्रंगार करने के पीछे का महत्व 



प0नि0डेस्क
देहरादून। हरतालिका तीज के दिन महिलाएं 24 घंटे के लिए निर्जला व्रत रखती हैं और अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं। 16 श्रंगार में क्या-क्या चीजें शामिल होती हैं और उनका क्या महत्व है।
कृष्ण जन्माष्टमी के बाद देशभर में हरतालिका तीज का त्योहार मनाया जाता है। इस त्योहार को उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, राजस्थान और मध्य प्रदेश के कई इलाकों में बड़े जोरशोर से मनाया जाता है। हरतालिका तीज महिलाओं का त्योहार है और इस दिन महिलाए व्रत रखकर अपने पति की लंबी आयु की प्राथना करती हैं।
हरतालिका तीज के दिन महिलाएं मेहंदी लगाती है, नए कपड़े पहनती हैं। इसके अलावा महिलाएं 16 श्रंगार करती हैं और पूजा में बैठती हैं। सोलह श्रंगार से ना सिर्फ महिलाए बेहद खूबसूरत दिखती हैं, बल्कि इस 16 श्रंगार का महत्व विज्ञान ने भी माना है। विज्ञान का कहना है कि 16 श्रंगार करने से महिलाओं के मन, शरीर और सेहत पर सकारात्मक परिणामा देखने को मिले हैं। आज हम आपको बता रहैं कि 16 श्रंगार में क्या-क्या चीजें शामिल होती हैं और उनका क्या महत्व है।
महिलाओं के बाल उनके गहने के समान होते हैं। इसलिए बालों में फूलों का गजरा लगाने से बालों में खुशबू आती है। साथ ही महिलाओं की सेहत पर भी अच्छा प्रभाव पड़ता है और उनका मन भी खुश रहता है।
महिलाएं अगर माथे पर बिंदी लगाए तो उनका व्यक्तित्व प्रभावशाली होता है। बिंदी लगाने के पीछे मनेवैज्ञानिक कारण भी है और इससे महिलाओं के आत्मविश्वास और आत्मबल में बढ़ोत्तरी होती है। महिलाओं को सुकून की प्राप्ति होती है।
 विज्ञान का कहना है कि शरीर के जिस स्थान पर सिंदूर लगाया जाता है, वह ब्रह्मरंध्र और अहिम नामक मर्मस्थल के ठीक ऊपर होता है, जो अत्यंत कोमल होता है। इस जगह पर सिंदूर लगाने से यहां की सुरक्षा होती है। साथ ही सिंदूर में ऐसे धातु भी मौजूद होते हैं जो चेहरे पर झुर्रियों के असर को कम कर देते हैं।
गले में मंगलसूत्र पहनने के पीछे विज्ञान का कहना है कि मंगलसूत्र या हार के मोतियों से जो हवा निकलती है, वहां महिलाओं के इम्यून के सिस्टम को ताकत देती है और अधिक मजबूत करती है। साथ ही इसमें मौजूद काले मोती उन्हें बुरी नजर से बचाते हैं।
विज्ञान का कहना है कि कान छिदवाने से आंख की रौशनी तेज होती है. बता दें कि कान के निचले हिस्से में एक बिंदु होता है, जहां पर आंखों की नसें होकर गुजरती हैं। जब महिलाएं कान में इस जगह झुमके या बाली पहनते हैं तो आंखों की रौशनी तेज हो जाती है।
सिंदूर के अलावा महिलाएं अपनी मांग में टीका पहनती हैं। टीका महिलाओं की सुंदरता तो बढ़ाता ही है, साथ में मस्तिष्क से जुड़ी क्रियाओं को भी ठीक रखने में मदद करता है।
पायल पहनने से महिलाओं के शारीर से निकलने वाली विद्युत ऊर्चा कोर पायल शरीर में संरक्षित करके रखती है। इससे महिलाओं के पट और निचले अंगों में मौजूद फैट को बढ़ने में रोकने में मदद करती है। इसके अलावा चांदी की चप्पल पहनने से पैरों की हड्डियां मजबूत होती हैं।
पांव पहनी गई बिछिया एक्यूप्रेशर तकनीक पर काम करती है। इससे पहनने से शरीर के निचले अंगों के तंत्रिका और मांसपेशियां ठीक रहती हैं। बिछिया पहनने से एक खास नस पर दबाव बनता है, जिससे गर्भधारण क्षमता को बेहतर करने में सहायता मिलती है।
बिछिया की तरह ही नथनी भी एक्यूप्रेशर तकनीक पर काम करती है। जिस जगह नथनी पहनी जाती है, वहां पर प्रसव पीड़ा के दौरान वाले दर्द को कम करने का काम करती है।
अंगुलियों में पहनी जाने वाली अंगूठियां महिलाओं को आलस से दूर रखती हैं और सुस्ती को भी कम करती है।
हाथ में महिलाओं का चूड़िया पहनना बहुत फायदेमंद साबित होता है। विज्ञान के मुताबिक जब महिलाओं की चूड़िया आपस में हाथ में टकराती हैं तो उससे उनके शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर तरीके से होता है। इसके अलावा महिलाओं के हॉर्मोंस को संतुलित रखने में भी चूड़ियां मदद करती हैं।
बाजूबंद को पहनने से महिलाओं की बांह स्थित केंद्रों पर दबाव पड़ता है, जो उन्हें लबें समय तक सुंदर और जवान रखता है।
कमरबंद पहनने के पीछे वैज्ञानिकों का कहना है कि इसे पहनने से महिलाओं में हर्निया जैसी बीमारियों की चपेट में आने से छुटकारा मिल जाता है।
हाथों पर लगाई जाने वाली मेहंदी हथेलियों को सुंदर दिखने के साथ-साथ शरीर को ठंडा रखने में भी मदद करती है।
16 श्रंगार में आंखों में काजल लगाना भी शामिल है। आंखों में काजल लगाने से आंखों में ठंडक मिलती है और आंखों से जुड़ी कई समस्याओं से भी छुटकारा मिल जाता है।
चेहरे पर थोड़ा मेकअप वा नेल पेंट लगाने से उनका आत्मविश्वास बढ़ जाता है।


 



 


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