सोमवार, 31 अगस्त 2020

पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे पर भारत-चीन की सेनाओं में झड़प

पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे पर भारत-चीन की सेनाओं में झड़प



29-30 अगस्त की रात को दोनों सैनिकों के बीच पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे पर झड़प हुई
एजेंसी
नई दिल्ली। चीन के साथ लगातार बातचीत जमीन पर असर नहीं दिखा रही है। 29-30 अगस्त की रात को भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में ताजा झड़प हुई है। सरकार की ओर से मिली जानकारी के अनुसार चीनी सैनिकों ने बातचीत से इतर जाते हुए मूवमेंट आगे बढ़ाया। पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे पर चीनी सैनिकों की गतिविधि का भारतीय सेना ने विरोध किया। प्रेस इन्फार्मेशन ब्यूरो की रिलीज के अनुसार सेना ने चीन को आगे बढ़ने नहीं दिया। भारत ने इस इलाके में तैनाती और बढ़ा दी है। इस झड़प के बावजूद चुशूल में ब्रिगेड कमांडर लेवल की फ्रलैग मीटिंग चल रही है। 
सरकार ने एक बयान में कहा कि 29/30 अगस्त की रात में चीनी सैनिकों ने पूर्व में बनी सहमति का उल्लंघन किया। चीनी सेना ने बार्डर पर यथास्थिति बदलने की एक और कोशिश की। पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे पर चीनी सेना हथियारों के साथ आगे बढ़ी तो भारतीय सेना ने न सिर्फ रोका बल्कि पीछे खदेड़ दिया। पीआईबी के अनुसार भारत ने झड़प वाली जगह पर अपनी पोजिशन मजबूत कर ली है। सेना के पीआरओ कर्नल अमन आनंद की ओर से जारी बयान में कहा गया कि भारतीय सेना बातचीत के जरिए शांति स्थापित करना चाहती है लेकिन अपने देश की रक्षा के लिए भी उतनी ही संकल्पबद्व है।
पैगोंग का दक्षिणी किनारा आमतौर पर चुशूल सेक्टर के नाम से जाना जाता है। मई में जब से यह तनाव शुरू हुआ है, तब से इस इलाके में सैनिकों की मौजूदगी खासी बढ़ गई है। सूत्रों के अनुसार ताजा झड़प के बाद चुशूल में सैनिकों की भारी तैनाती की गई है। सेना अभी ज्यादा डिटेल्स नहीं दे रही है।
कई दौर की बातचीत के बावजूद पूर्वी लद्दाख में तनाव कम नहीं हो रहा है। भारतीय सेना का सापफ स्टैंड है कि चीन को अप्रैल से पहले वाली स्थिति बहाल करनी चाहिए। सैन्य स्तर पर बातचीत के अलावा विदेश मंत्रालय और दोनों देशों के वर्किंग मकैनिज्म फार कंसल्टेशन ऐंड को-आर्डिनेशन ने भी चर्चा की है। दोनों पक्ष कंपलीट डिसइंगेजमेंट की दिशा में आगे बढ़ने पर बार-बार सहमत हुए हैं लेकिन धरातल पर असर नहीं हुआ।


रविवार, 30 अगस्त 2020

अवर अभियंता संवर्ग के लंबित मुद्दों पर चर्चा 

यूपीजेई एसोसिएशन की यूपीसीएल-पिटकुल शाखा की प्रांतीय कार्यकारिणी की आनलाइन बैठक
अवर अभियंता संवर्ग के लंबित मुद्दों पर चर्चा 



संवाददाता
देहरादून। उत्तराखंड पावर जूनियर इंजीनियर एसोसिएशन की यूपीसीएल-पिटकुल शाखा की प्रांतीय कार्यकारिणी की आनलाइन बैठक आयोजित की गई। बैठक में यूपीजेईए की आगामी केन्द्रीय कार्यकारणी की बैठक से सम्बंधित प्रस्ताव एवं वर्तमान में अवर अभियंता संवर्ग के लंबित मुद्दों पर चर्चा की गयी।
बैठक में उपस्थित समस्त पदाधिकारियों एवं सदस्यों द्वारा यूपीसीएल में अवर अभियन्ता से सहायक अभियंता के पद पर की गई प्रोन्नतियों के लिए केंद्रीय अध्यक्ष जीएन कोठियाल का उनके प्रयासों के लिए विशेष तौर पर सराहना करते हुए आभार व्यक्त किया गया। सभी पदोन्नत सदस्यों को शुभकामनाएं देते हुए संगठन हित में कार्यरत रहने का आह्वान किया गया। 
प्रांतीय महासचिव पवन रावत ने कहा कि केंद्रीय अध्यक्ष द्वारा अवर अभियंता से सहायक अभियंता पद पर प्रोन्नति के लिए विषम परिस्थितियों में विशेषकर कोरोना संक्रमण के दौरान किया गया प्रयास सभी सदस्यों के लिए अनुकरणीय है। समय से पदोन्नति नहीं होने से सभी पदोन्नत सदस्यों को सामाजिक, आर्थिक एवं मानसिक नुकसान उठाना पड़ा। एसोसिएशन द्वारा पदोन्नति की जायज मांग को लेकर जब गत वर्ष सत्याग्रह एवं असहयोग कार्यक्रम किया गया तो एसोसिएशन के पदाधिकारियों एवं सदस्यों को प्रताड़ित करने के उद्देश्य से दूरस्थ क्षेत्रों में स्थानांतरण कर दिया गया। पर अंततः एसोसिएशन के लंबे संघर्ष के उपरान्त प्रबन्धन द्वारा पदोन्नतियां कर दी गयी हैं। 
प्रान्तीय महासचिव ने कहा कि एसोसिएशन आशा करता है कि अब प्रबन्धन द्वारा अवर अभियंता संवर्ग के जेई से एई पद पर शेष दो सदस्यों एवं एई से ईई के रिक्त पदों पर पदोन्नति की कार्यवाही को बिना किसी पक्षपात के शीघ्र पूरा किया जायेगा। 
प्रांतीय अध्यक्ष रविंद्र सैनी ने कहा कि सेवा नियमावलियों के संबंध में एसोसिएशन से मांगे गए सुझावों के संबंध में केंद्रीय अध्यक्ष द्वारा प्रबंधन को उसके सदस्यों के दूरस्थ क्षेत्रों में होने के कारण 15 सितंबर तक का समय मांगा गया है। प्रांतीय अध्यक्ष ने कहा कि अवर अभियंता संवर्ग की लंबे समय से चली आ रही मांगें जैसे कि अवर अभियंता का प्रारंभिक ग्रेड पे 4800 किया जाना, जेई से एई पद पर प्रोन्नति कोटा 58.33 फीसद किया जाना, सदस्यों को एसीपी का लाभ प्रदान किया जाना आदि को लेकर अब गतिविधियां तेज की जाएंगी। सभा में संगठन एवं केन्द्रीय अध्यक्ष पर अशोभनीय टिप्पणी करने वाले सदस्य पर अनुशासनात्मक कार्यवाही पर लाए गए प्रस्ताव पर सहमति जताते हुए उन्होंने सम्बन्धित पर शीघ्र ही नियमानुसार कड़ी कार्यवाही किये जाने का आश्वासन देते हुए कहा कि संगठन में अनुशासनहीनता के लिये कोई स्थान नहीं है।
बैठक का संचालन करते हुए प्रांतीय उपाध्यक्ष दीपक पाठक ने सभी सदस्यों से आह्वान किया कि संगठन एवं उसके पदाधिकारियों के प्रति निष्ठा रखते हुए अनुशासन बनाये रखना चाहिए। प्रान्तीय उपाध्यक्ष आरपी नौटियाल ने हाल ही में निलंबित किये गये अवर अभियंता का निलंबन समाप्त किये जाने को लेकर अपनी बात प्रमुखता से रखी। प्रान्तीय वित्त सचिव राजीव खर्कवाल एवं उपाध्यक्ष राहुल अग्रवाल ने नियमावली पर अपनी बात रखी।
आनलाइन बैठक में केन्द्रीय महासचिव जेसी पन्त, केन्द्रीय वित्त सचिव रामकुमार, प्रान्तीय संगठन सचिव गिरीश पांडे, प्रचार सचिव मनोज कंडवाल, संगठन सचिव विमल कुलियाल, प्रान्तीय उपाध्यक्ष राहुल अग्रवाल, आरपी नौटियाल, दीपक पाठक एवं बबलू सिंह, वित्त सचिव राजीव खर्कवाल एवं सह वित्त सचिव विकास कुमार मौजूद रहे।


 


सेवानिवृत कर्मचारी अपने पीपीओ को अब ‘डिजिलाकर’ में रख सकेंगे

सेवानिवृत कर्मचारी अपने पीपीओ को अब ‘डिजिलाकर’ में रख सकेंगे



एजेंसी
नई दिल्ली। केंद्र सरकार के सेवानिवृत कर्मचारी अब अपने पेंशन भुगतान आदेश (पीपीओ) को ‘डिजिलाकर’ में रख सकेंगे। केंद्र सरकार ने पेंशनभोगियों को पीपीओ की आरिजनल प्रति के न होने पर पर इसकी ई-प्रति को मान्य कर दिया है। रिटायर होने वाले कर्मचारियों को तभी पेंशन मिलती है जब सरकार की ओर से इस नंबर को जारी किया जाता है।
पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग ने यह पाया कि कई पेंशभोगियों ने समय के साथ-साथ अपनी पीपीओ की मूल प्रति को खो दिया है जिसके बाद उन्हें पेंशन से जुड़े कार्यों को करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कोरोना संकट में रिटायर होने वाले कर्मचारियों को भी पीपीओ की मूल प्रति पाने में परेशानी और देरी हुई थी। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए सरकार के इस फैसले से रिटायर होने वाले कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बड़ा पफायदा पहुंचने जा रहा है।
इससे पहले पेंशन पफंड रेगुलेटरी एंड डेवलेपमेंट अथारिटी (पीएफआरडीए) ने नेशनल पेंशन स्कीम (एनपीएस) टियर-प्प् सेवर स्कीम के लिए आपरेशनल जारी कर दी हैं। गाइडलाइंस में कहा गया है कि केंद्र सरकार का कोई भी कर्मचारी जो कि एनपीएस में कंट्रीब्यूट करता है वह इस योजना के तहत अतिरिक्त पेंशन अकाउंट खुलवा सकता है।
इसके जरिए वह रिटायरमेंट के बाद ज्यादा पेंशन का लाभ ले सकता है। इस तरह केंद्रीय कर्मचारियों के पास अब एक साथ इस योजना के तहत तीन अकाउंट को आपरेट कर सकते हैं। पहला टियर-प् अकाउंट जो कि अनिवार्य है यह पेंशन अकाउंट होता है, दूसरा टियर-प्प् जिसमें निकासी पर कोई प्रतिबंध नहीं है और कोई टैक्स बेनिपिफट नहीं मिलता।


 


अगस्त में 25 फीसदी ज्यादा बरसात पिछले 44 साल में सर्वाधिकः मौसम विभाग

अगस्त में 25 फीसदी ज्यादा बरसात पिछले 44 साल में सर्वाधिकः मौसम विभाग



एजेंसी
नयी दिल्ली। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के आंकड़ों के अनुसार देश में अगस्त के महीने में पिछले 44 साल में सबसे ज्यादा बारिश हुई है जहां देश के अनेक हिस्सों में बाढ़ की स्थिति है।
आईएमडी के अनुसार अगस्त महीने में 28 तारीख तक 25 पफीसदी अधिक वर्षा दर्ज की गयी है। इससे पहले 1983 में अगस्त महीने में सामान्य से 23.8 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई थी।
देश में अब तक कुल मिलाकर सामान्य से 9 फीसदी अधिक बारिश हुई है। बिहार, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, गुजरात और गोवा में अधिक बारिश दर्ज की गयी है, वहीं सिक्किम में अत्यधिक वर्षा हुई है। कई राज्यों में नदियों में उफान के साथ बाढ़ के हालात हैं।
केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) के अनुसार देश में 27 अगस्त तक जलाशयों की कुल क्षमता पिछले साल इस अवधि से बेहतर है। यह पिछले 10 साल में इसी अवधि में औसत भंडारण क्षमता से भी बेहतर है।
सीडब्ल्यूसी ने कहा कि गंगा, नर्मदा, तापी, माही, साबरमती की नदी घाटियों में, कच्छ, गोदावरी, कृष्णा, महानदी और कावेरी तथा दक्षिण भारत में पश्चिम की ओर बहती नदियों में पानी का स्तर सामान्य से अधिक है।
केंद्रशासित प्रदेश जम्मू कश्मीर, मणिपुर, मिजोरम और नागालैंड में इस साल कम बारिश हुई है। देश में सामान्य मानसून का मौसम एक जून से 30 सितंबर तक होता है। जून में देशभर में 17 फीसदी अधिक वर्षा हुई थी, वहीं जुलाई में सामान्य से 10 फीसदी कम बारिश दर्ज की गयी।


बिना सिफारिश बेरोजगार युवाओं को कैसे मिलेगाः मोर्चा                             

बिना सिफारिश बेरोजगार युवाओं को कैसे मिलेगाः मोर्चा                             
- पीआरडी के माध्यम से मिलने वाले रोजगार में नहीं है पंजीकरण व  आरक्षण की व्यवस्था 
- नेताओं/अधिकारियों एवं ऊंची पहुंच वाले लोगों के करीबियों को ही मिलता है रोजगार 
- डाटा एंट्री आपरेटर, प्रवर सहायक, इलेक्ट्रीशियन, स्वयंसेवक, वाहन चालक, टाइपिस्ट आदि सभी प्रकार की दुकान चलाता है विभाग 
- मलाईदार विभागों में निरंतर तैनाती पाने को चुकानी पड़ती है अधिकारियों को मोटी रकम 
- नेताओं के नारे लगाने में व्यस्त युवा जागें 
संवाददाता
विकासनगर। जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने कहा कि प्रदेश में सिफारिश विहीन युवा दर-दर की ठोकरें खा रहा है तथा वहीं दूसरी ओर नेताओं/अधिकारियों एवं ऊंची पहुंच रखने वाले लोगों के आश्रितों/परिचितों/ रिश्तेदारों को युवा कल्याण विभाग रोजगार देकर अभिभूत हो रहा है।              
नेगी ने कहा कि बड़े दुर्भाग्य की बात है कि पीआरडी के माध्यम से मिलने वाले रोजगार में न तो विभाग में कोई पंजीकरण की व्यवस्था है और न ही आरक्षण इत्यादि की! जब पंजीकरण की कोई व्यवस्था ही नहीं है तो विभाग कैसे रोजगार प्रदान कर रहा है।   
हैरानी की बात यह है कि कुछ स्वयंसेवकों को छोड़कर जिनके द्वारा प्रशिक्षण लिया गया है उनको रोजगार देने की बात तो गले  उतरती है, लेकिन जिन लोगों के पास कोई प्रशिक्षण नहीं है, उनको भी विभाग ने रोजगार प्रदान कर रखा है। अकेले जनपद देहरादून की बात करें तो सैकड़ों युवाओं को भिन्न-भिन्न पदों यथा डाटा एंट्री आपरेटर, प्रवर सहायक, टाइपिस्ट कम स्टेनोग्राफर, वाहन चालक, चौकीदार, सुरक्षाकर्मी, स्वयंसेवक के रूप में रोजगार प्रदान किया गया है। इस कृत्य से प्रतीत होता है कि विभाग प्रदेश के लाखों सिफारिश विहीन युवाओं को छलने जैसा काम कर रहा है।
नेगी ने कहा कि उन युवाओं को ही मलाईदार विभागों में भेजा जाता है जो अधिकारियों को हर महीने खुश रखता है तथा उसकी निरंतरता भी बरकरार रहती है। खुश न रखने वाले युवा महीने 2 महीने में ही बाहर कर दिए जाते हैं। मोर्चा प्रदेश के युवाओं से अपील करता है कि नेताओं के नारे लगाना बंद कर अपने रोजगार के बारे में उठ खड़े हों तथा जागरूक हों।


पर्यटन सचिव ने उद्योग से मांगा सहयोग

पर्यटन सचिव ने उद्योग से मांगा सहयोग



आनलाइन बैठक में क्वारंटनाइन अवधि कम करने के आए सुझाव
संवाददाता
देहरादून। राज्य में कोविड-19 के कारण पर्यटन उद्योग पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव तथा उनसे जुड़ी समस्याओं एवं सुझावों पर विचार करने के लिए पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर के नेतृत्व में एक आनलाइन बैठक हुई। होटल, राफ्रिटंग, एयरोस्पोर्ट्स, सीआईआई और फिक्की के 20 से अधिक प्रतिनिधियों ने भागीदारी की। बैठक में उद्योग प्रतिनिधियों ने साहसिक पर्यटन की गतिविधियों को खोले जाने का सुझाव दिया। पर्यटन सचिव ने सरकार की तरफ से उद्योग के कर्मियों को उपलब्ध करायी जा रही मदद की जानकारी दी और उद्योग से सरकार को सहयोग करने की अपेक्षा जाहिर की।
बैठक में होटल उद्योग प्रतिनिधियों द्वारा कोविड टेस्ट को लेकर हो रही असमंजस की स्थिति के सम्बन्ध में बताया। इसके साथ ही पर्यटकों हेतु क्वारंटाइन पीरियड 7 दिन से कम किये जाने का सुझाव दिया गया। राज्य के बार्डर पर पर्यटक सहायता केन्द्र भी स्थापित किये जाने के सुझाव दिये गये। शादी समारोह व अन्य कार्यक्रमों से सम्बन्धित आयोजनों में अधिकतम 50 अतिथियों की सीमा के स्थान पर प्रति वर्ग मी0 के आधार पर अतिथियों की संख्या के निर्धारण करने का सुझाव दिया गया है।
आनलाईन बैठक के दौरान राफ्रिटंग व साहसिक पर्यटन से जुड़े प्रतिनिधियों द्वारा साहसिक पर्यटन की गतिविधियों को खोले जाने का अनुरोध किया गया है। साथ ही ट्रैकिंग गतिविधियों को खोलने के लिए वन विभाग को दिशा-निर्देश जारी किये जाने का भी सुझाव दिया गया। साहसिक पर्यटन की गतिविधियों के संचालन हेतु एडवेंचर टुअर आपरेटर एसोसिएशन आफ इण्डिया एटीएएआई द्वारा तैयार की गई गाईडलाइन्स को प्रयोग में लाने का सुझाव दिया गया।
सीआईआई के प्रतिनिधि ने पर्यटकों से जुड़ी समस्याओं एवं उनके समाधान के लिए काल सेंटर स्थापित किये जाने का सुझाव दिया। पिफक्की के प्रतिनिधि द्वारा राज्य में पर्यटन को बढ़ाने के उद्देश्य से पर्यटकों को इनसन्टिव डिस्काउंट दिये जाने के साथ ही सकारात्मक प्रचार अभियान चलाये जाने का भी सुझाव दिया गया। कोविड से सम्बन्धित सभी प्रोटोकाल गाईडलाइन्स पर स्पष्ट आदेश जारी किये जाने के सुझाव दिये गये, जिसमें किसी प्रकार का असमंजस न हो।
सचिव पर्यटन द्वारा सभी प्रतिनिधियों को यह भी अवगत कराया गया कि राज्य सरकार द्वारा पर्यटन उद्योग के कार्मिकों को तात्कालिक सहायता के रूप में 1000 रूपये प्रति कार्मिक उपलब्ध कराये जाने हेतु धनराशि जिलाधिकारियों को उपलब्ध कराई गई है, जिसमें लगभग 2.50 करोड़ की धनराशि वितरित भी की जा चुकी है। राज्य सरकार द्वारा की गई सकारात्मक पहल को क्रियान्वित करने हेतु पर्यटन उद्योग से सहयोग की अपेक्षा की गई।


पूर्वाेत्तर रेलवे ने स्थायी रूप से बंद की 4 रेल गाड़ियां

पूर्वाेत्तर रेलवे ने स्थायी रूप से बंद की 4 रेल गाड़ियां


पूर्वाेत्तर रेलवे द्वारा उपलब्ध करायी गयी सूचना से हुआ खुलासा
संवाददाता
काशीपुर। पूर्वाेत्तर रेलवे के मुख्यालय के निर्देश पर पूर्वाेत्तर रेलवे इज्जतनगर मण्डल के परिचालन विभाग में 4 रेल गाड़ियां बंद करनेे का निर्णय लिया गया हैै। अब कोरोना लाक डाउन के बाद रेल यातायात सामान्य होने पर भी यह 4 रेल गाड़ियां नहीं चलेगी। यह जानकारी सूचना अधिकार कार्यकर्ता नदीम उद्दीन को पूर्वाेत्तर रेलवे इज्जतनगर के लोक सूचना अधिकारी एवं वरिष्ठ मण्डल सामग्री प्रबंधक इज्जतनगर द्वारा लिखित रूप से उपलब्ध करायी गयी है। 
काशीपुर निवासी सूचना अधिकार कार्यकर्ता नदीम उद्दीन एडवोकेट ने पूर्वाेेत्तर रेलवे के लोक सूचना अधिकारी से पूर्वाेत्तर रेलवे के अन्तर्गत कोरोना लाक डाउन से पूर्व संचालित उन रेल गाडियों के विवरण की सूचना मांगी थी जिन्हें स्थायी रूप से बंद करने का निर्णय लिया गया है। इसके उत्तर में लोक सूचना अधिकारी एवं वरिष्ठ मण्डल सामग्री प्रबंधन इज्जतनगर ने अपनेे पत्रांक 10598 दिनांक 3 अगस्त के साथ वरिष्ठ मण्डल वाणिज्य प्रबंधक तथा मण्डल परिचालन प्रबंधन द्वारा दी गयी सूचना की प्रति उपलब्ध करायी है।
उपलब्ध सूचना केे अनुसार पूर्वाेत्तर रेलवे ने 4 रेलगाड़ियों स्थायी रूप से बंद कर दी है जिसमें से दो रामनगर-काशीपुर-मुरादाबाद होते हुये हरिद्वार के बीच तथा दो रामनगर-काशीपुर-मुरादाबाद के बीच चलती थी। उपलब्ध सूचना के अनुसार गाड़ी संख्या 55321 (मुरादाबाद-रामनगर), 55308 (रामनगर-मुरादाबाद), 15033 (हरिद्वार-रामनगर) तथा 15034 (रामनगर-हरिद्वार) को स्थायी रूप से बंद करनेे का निर्णय लिया गया है।
नदीम ने बताया कि गाड़ी संख्या 55321 मुरादाबाद से रोजाना प्रातः 07ः35 बजे चलकर गोट, सेहल, पीपलसाना, जालपुर, रोशनपुर, पदियानगला, अलीगंज होते हुये 09ः05 बजे काशीपुर पहुंचती थी तथा 09ः10 बजे काशीपुर सेे चलकर गौशाला, पीरूमदारा होते हुये 09ः55 बजे रामनगर पहुंचती थी जो रोज रोेजगार व अपने कामों के लिये आने वालांें तथा पर्यटकों के लिये बहुत उपयोगी ट्रेन थी।
बंद की गयी गाड़ी संख्या 55308 रामनगर से दिन में रोजाना 11ः10 बजे चलकर पीरूमदारा, गौैशाला होते हुये काशीपुर पहंुचती थी काशीपुर से 11ः43 बजे चलकर अलीगंज, पदियानगला, रोशनपुर, जालपुर, पीपलसाना, सेहल, गोेट होते हुये 13ः25 बजे मुरादाबाद पहंुचती थी। दिन में मुरादाबाद जाने वालों तथा पहाड़ से आकर रामनगर से मुरादाबाद व आगे जानेेे वालोें के लिये यह बहुत उपयोेगी ट्रेन थी।
नदीम ने बताया कि रामनगर से जुड़े पहाड़ों तथा काशीपुर को गढ़वाल सेे जोेड़ने वाली एकमात्र ट्रेन सं0 15033 जो सप्ताह में तीन दिन बृहस्पतिवार, शनिवार, रविवार चलती थी उसे बंद कर दिया गया जबकि लोेगों की मांग व उम्मीद थी कि इसे रोजाना करके इसे राजधानी देहरादून तक बढ़ाया जायेगा। यह ट्रेन शाम 6ः45 पर हरिद्वार से चलकर लक्सर, नजीबाबाद होते हुये मुरादाबाद पहुंचती थी, जहां से 09ः50 पर चलकर रोशनपुर होते हुये रात 11ः00 बजे काशीपुर तथा 11ः05 बजे काशीपुर से चलकर रात 11ः35 पर रामनगर पहुंचती थी। रामनगर व पहाड़ आने वाले पर्यटकोें तथा प्रवासियों तथा राजधानी से कुमाऊं के विभिन्न क्षेत्रों में जाने वालों के लिये यह एकमात्र ट्रेन थी।
इसके अतिरिक्त ट्रेन सं0 15034 बंद कर दी गयी हैै यह भी सप्ताह में 3 दिन बृहस्पतिवार, शनिवार तथा रविवार को चलती थी। यह गाड़ी रामनगर से सुबह 8ः25 पर चलकर काशीपुर पहुंचकर 8ः45 बजे काशीपुर से चलकर रोशनपुर, पीपलसाना होते हुये 10ः30 बजे मुरादाबाद तथा नजीबाबाद, लक्सर होते हुये दोपहर 02ः05 बजेे हरिद्वार पहुंचती थी।
उपलब्ध सूचना के अनुसार इन गाड़ियोें को बंद करने का निर्णय इससे प्राप्त आय/राजस्व केे आधार पर लिया गया हैै। सूचना के अनुसार गाड़ी संख्या 15033/34 की प्रतिदिन आय मात्र 32655 रूपये, गाड़ी सं0 55308 की दैैनिक आय 32900 तथा गाड़ी संख्या 55321 की दैैनिक आय 19300 रूपये मात्र दर्शायी गयी है।


 


गुरुवार, 27 अगस्त 2020

तिथि के अनुसार पितृ पक्ष में कब करें किसका श्राद्व

तिथि के अनुसार पितृ पक्ष में कब करें किसका श्राद्व



प0ं चैतराम भट्ट
देहरादून। पितृ पक्ष वर्ष 2020 में 1 सितंबर से प्रारंभ हो रहे हैं। यह वह समय होता है जब पित्तरों का तर्पण और श्राद्व कर्म किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार पित्तरों का श्राद्व उनकी मृत्यु तिथि पर ही करना चाहिए और यदि आप उनकी मृत्यु तिथि नहीं जानते तो आप उनका श्राद्व किस तिथि को कर सकते हैं। इसके अलावा घर की सुहागन स्त्रियों का श्राद्व किस तिथि पर करें। यदि आप भी इसके बारे में जानना चाहते हैं तो आपको श्राद्व पक्ष की प्रत्येक तिथि का महत्व बताएंगे और साथ ही यह भी बताएंगे कि आप पितृ पक्ष में आप कौन सी तिथि पर किसका श्राद्व कर सकते हैं।
शास्त्रों के अनुसार पितृ पक्ष में अपने घर के सभी दिवंगत लोगों का श्राद्व उनकी मृत्यु तिथि पर ही करना चाहिए। मृत्यु तिथि से तात्पर्य उस तिथि से है जो तिथि अंतिम श्वांस परित्याग के समय पर विद्यमान हो। उस तिथि को श्राद्व पक्ष में दोपहर के समय 12ः30 बजे से 1 बजे तक के बीच में श्राद्व कर्म करना चाहिए। अगर आप अपने दिवंगत लोगो की मृत्यु तिथि के बारे में नहीं जानते तो आप उनका श्राद्व सर्वपितृ अमावस्या के दिन कर सकते हैं। 
घर में जिन लोगों की स्वाभाविक और सामान्य मृत्यु चतुर्दशी तिथि को हुई हो। उनका श्राद्व चतुर्दशी तिथि के दिन बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। बल्कि त्रयोदशी या अमावस्या के दिन उन लोगो का श्राद्व करना चाहिए। वहीं परिवार में जिन लोगों की अकाल मृत्यु हुई हो तो उनका श्राद्व मृत्यु तिथि वाले दिन बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए।  इन लोगों को श्राद्व सिर्फ चतुर्दशी तिथि को ही करना चाहिए। चाहें उनकी मृत्यु किसी भी दिन हुई हो। 
घर की सौभाग्यवती स्त्रियों (पति के जीवित रहते ही मरने वाली सुहागन) स्त्रियों का श्राद्व केवल पितृ पक्ष की नवमी तिथि को ही करना चाहिए। चाहें उनकी मृत्यु किसी भी तिथि को क्यों न हुई हो। इसके अलावा सन्यासियों का श्राद्व केवल पितृ पक्ष की द्वादशी तिथि को ही किया जाता है। नाना या नानी का श्राद्व भी केवल पितृ पक्ष की प्रतिपदा तिथि को ही करना चाहिए।


 


शैंपू में हानिकारक केमिकलों की मौजूदगी खतरनाक

शैंपू में मौजूद हानिकारक केमिकल बालों को पहुंचा सकते नुकसान
शैंपू में हानिकारक केमिकलों की मौजूदगी खतरनाक



प0नि0डेस्क
देहरादून। स्वस्थ बालों के लिए हम शैंपू, कंडीशनर, हेयर जेल, सीरम, हेयर ऑयल सहित कई तरह के प्रोडक्ट का इस्तेमाल करते हैं लेकिन क्या मालूम है कि इन उत्पादों में हानिकारक केमिकल मिले होते होते हैं? हर कोई अपने बालों को लंबा, घना और मुलायम बनाने के लिए इन उत्पादों का इस्तेमाल करता है। शैंपू में कौन से केमिकल मौजूद होते हैं!
खूबसूरत बालों से चेहरे की खूबसूरती बढ़ती है। यही कारण है कि स्वस्थ बालों के लिए लोग शैंपू, कंडीशनर, हेयर जेल, सीरम, हेयर ऑयल सहित कई तरह के प्रोडक्ट का इस्तेमाल करते हैं। ये हेयर केयर प्रोडक्ट बालों को मजबूत और स्टाइलिश बनाते हैं लेकिन क्या मालूम है कि इन उत्पादों में हानिकारक केमिकल मिले होते होते हैं।
बाजार में केमिकल युक्त हेयर प्रोडक्ट की भरमार है। इनकी पैकिंग आकर्षक होती है। हर कोई अपने बालों को लंबा, घना और मुलायम बनाने के लिए इन उत्पादों का इस्तेमाल करता है। लेकिन ये प्रोडक्ट बालों को डैमेज कर सकते हैं। जानते हैं शैंपू में कौन से केमिकल मौजूद होते हैं।
पैराबेन- यह एक प्रकार का प्रिजर्वेटिव है जो जो ब्यूटी प्रोडक्ट को लंबे समय तक खराब नहीं होने देता है। ब्यूटिलपैराबेन, प्रोपिलपैराबेन और मेथिलपैराबेन कुछ सामान्य पैराबेन हैं जिनका इस्तेमाल सौंदर्य उत्पादों में किया जाता है। ये त्वचा के माध्यम से शरीर में प्रवेश करते हैं और हार्माेन एवं जीन को डैमेज कर देते हैं। कुछ पैराबेन कैंसर सहित अन्य गंभीर बीमारियां उत्पन्न करते हैं।
एल्कोहल- एल्कोहल का प्रयोग बहुत से हेयर केयर और ब्यूटी प्रोडक्ट में किया जाता है। एथेनॉल, एसडी एल्कोहल 40, प्रोपिल, आइसोप्रोपिल, प्रोपेनॉल बहुत आम एल्कोहल हैं। एल्कोहल बालों को सूखा और कमजोर बनाता है।
सल्फेट- यह एक तरह का क्लिंजिंग एजेंट है जो गंदगी दूर करने में मदद करता है। इसका इस्तेमाल टॉयलेट क्लिनर, डिटर्जेंट, साबुन आदि में भी किया जाता है। इसके अलावा शैंपू में भी सल्फेट का इस्तेमाल किया जाता है। सल्फेट स्कैल्प को ड्राई करता है और नैचुरल ऑयल सीबम को खत्म कर देता है। जिसके कारण बाल टूटने लगते हैं। शैंपू में सोडियम लौरिल सल्फेट और सोडियम लौरेथ सल्फेट पाया जाता है।
फ्रेगरेंस- ज्यादातर उत्पादों में खूशबू को बढ़ाने के लिए च्ीजींसंजम केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है। रिसर्च के अनुसार च्ीजींसंजम के कारण कैंसर, किडनी और फेफड़े डैमेज हो सकता है। इसके अलावा यह रिप्रोडक्टिव सिस्टम पर भी प्रभाव डालता है। चूंकि इस केमिकल का इस्तेमाल प्रोडक्ट की खूशबू के लिए किया जाता है इसलिए यह स्किन और सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकता है।
फॉर्मेल्डाइड- यह एक केमिकल है। इसका इस्तेमाल बहुत से ब्यूटी प्रोडक्ट में किया जाता है जो इन्हें खराब होने से बचाता है। इस केमिकल के कारण इंसानों में कैंसर और अस्थमा का खतरा बढ़ रहा है। शैंपू में इस्तेमाल होने वाले रसायनों के प्रभाव से बचने के लिए कम मात्रा में इनका उपयोग करना चाहिए। यदि संभव हो तो नैचुरल शैंपू का इस्तेमाल करें।


सोमवार, 24 अगस्त 2020

मीडिया प्रोडक्शन के लिए एसओपी जारी    

मीडिया प्रोडक्शन के लिए एसओपी जारी    



प0नि0ब्यूरो
देहरादून। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के परामर्श से मीडिया प्रोडक्शन के लिए निवारक उपायों पर मार्गदर्शक सिद्वांतों के साथ-साथ मानक परिचालन प्रक्रियाएं (एसओपी) भी तैयार की हैं, जिन्हें नई दिल्ली में केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने जारी किया है। मार्गदर्शक सिद्वांतों की मुख्य बातों में सामान्य सिद्वांत शामिल हैं, जो स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा दिए गए हैं। इनमें अन्य बातों के अलावा वे गैर-आवश्यक गतिविधियां शामिल हैं जिनकी अनुमति कोविड-19 से संबंधित कंटेनमेंट जोन में नहीं है। इन सिद्वांतों के तहत ज्यादा जोखिम वाले कर्मचारियों को अतिरिक्त सावधानियां बरतनी होंगी। इसी तरह फेस कवर/मास्क पहनना होगा, बार-बार हाथ धोना पड़ेगा। हैंड सैनिटाइजर, इत्यादि की व्यवस्था करनी होगी और इसके साथ ही विशेषकर मीडिया प्रोडक्शन के संबंध में श्वसन से जुड़े नियम-कायदों को ध्यान में रखना होगा।



मंत्रालय ने इस सेक्टर में अधिसूचित अंतर्राष्ट्रीय प्रथाओं या तौर-तरीकों को ध्यान में रखते हुए सामान्य एसओपी तैयार की हैं जिनमें सामाजिक या भौतिक दूरी बनाए रखना, शूट वाले स्थानों के लिए निर्दिष्ट प्रवेश एवं निकासी मार्गों की व्यवस्था करना, सैनिटाइजेशन, कर्मचारियों की सुरक्षा, न्यूनतम संपर्क सुनिश्चित करना और क्वारंटाइन/आइसोलेशन सहित गृह मंत्रालय द्वारा जारी यात्रा संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करना शामिल हैं। विशेषकर फेस मास्क के संबंध में अंतर्राष्ट्रीय प्रथाओं के अनुसार कैमरे के सामने मौजूद अभिनेताओं को छोड़कर अन्य सभी कलाकारों और शूटिंग करने वाली टीम के सदस्यों के लिए फेस मास्क अनिवार्य किया गया है।



मीडिया प्रोडक्शन फिर से शुरू करते समय सभी राज्य सरकारों एवं अन्य हितधारकों द्वारा मार्गदर्शक सिद्वांतों और एसओपी का उपयोग किया जा सकता है। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने दिशा-निर्देश जारी करते हुए कहा कि एसओपी अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के अनुरूप है। इससे कोरोना वायरस के कारण तकरीबन 6 माह से बेहद प्रभावित उद्योग को बड़ी राहत मिलेगी और लोग मंत्रालय के इस कदम का स्वागत करेंगे। जावड़ेकर ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य अर्थव्यवस्था के विकास को नई गति प्रदान करना भी है क्योंकि फिल्म और टेलीविजन सेक्टर बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार देता है।
जावड़ेकर ने उम्मीद जताई कि सभी राज्य ‘एसओपी’ को स्वीकार करेंगे एवं इसे लागू करेंगे तथा आवश्यकता पड़ने पर कुछ अन्य शर्तों को इसमें जोड़ देंगे। मानक परिचालन प्रक्रिया (एसओपी) को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और गृह मंत्रालय के परामर्श से जारी किया गया है।


रविवार, 23 अगस्त 2020

गुस्सा दबाने से दिमाग में बढ़ सकता है प्रेशर

गुस्सा दबाने से दिमाग में बढ़ सकता है प्रेशर



प0नि0डेस्क
देहरादून। गुस्सा मानव का एक अभिन्न अंग है। जब किसी बात पर दिल दुखता है या हमें बुरा लगता है तो गुस्सा जताकर हम अपनी प्रतिक्रया व्यक्त करते हैं कि ये बात ठीक नहीं है या ये रवैया हमें पसंद नहीं आया। ऐसे में सामने वाला आपके गुस्से को अच्छे से समझ जाता है। लेकिन कुछ लोग होते हैं जो गुस्सा आने के बावजूद उसे व्यक्त नहीं करते हैं। अगर आप भी ऐसे लोगों की फेहरिस्त में शामिल हैं जो गुस्से को पी जाते हैं तो सावधान हो जाइए।
अपने गुस्से को व्यक्त करना ना केवल मानसिक सेहत के लिए अच्छा है बल्कि यह ब्रेन स्ट्रोक को रोकने में भी यह अहम भूमिका निभाता है। यूनिवर्सिटी आफ पिट्सबर्ग के शोधकर्ताओं की टीम ने पाया है कि गुस्से को दबाकर रखने से महिलाओं के कारोटिड धमनियों में गंदगी (प्लाक) जमने लगती है जिससे मस्तिष्काघात का खतरा बढ़ जाता है।
आर्ट्रीज खून सप्लाई करती हैं। यह धमनियों आर्ट्रीज दिमाग तक होने वाली खून की सप्लाई को नियंत्रित करते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार इन धमनियों में सिकुड़न आने से मस्तिष्काघात का खतरा जानलेवा हो सकता है। पूर्व के शोधों के अनुसार लंबे समय तक तनाव में रहने से दिमाग में सूजन पैदा होती है जिससे ब्रेन स्ट्रोक, दिल के दौरे, और सीने में दर्द के खतरे बढ़ जाते हैं।
शोधकर्ता कारेन जाकुबोवस्की ने कहा कि हमारे शोध से पता चलता है कि महिलाओं में सामाजिक-भावनात्मक अभिव्यक्ति और दिमाग के स्वास्थ्य के बीच संबंध पाया गया है। इस तरह के शोध महत्वूपर्ण होते हैं क्योंकि यह दर्शाता है कि कैसे किसी महिला का भावनात्मक स्वभाव उसके शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। इन परिणामों से प्रोत्साहित होकर स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को अपने रोगियों के सामाजिक-भावनात्मक कारकों को ध्यान में रखते हुए एक निवारक देखभाल योजना की आउटलाइन तैयार करनी चाहिए।
गुस्से का इंसानी शरीर पर व्यापक असर पड़ता है। इससे शरीर में एड्रिनालिन और नोराड्रिनलिन हार्मोंस का स्तर बढ़ जाता है। उच्च रक्तचाप, सीने में दर्द, तेज सिर दर्द, माइग्रेन, एसिडिटी जैसी कई शारीरिक बीमारियां हो सकती हैं। जो लोग जल्दी-जल्दी और छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा हो जाते हैं, उन्हें स्ट्रोक, किडनी की बीमारियां और मोटापा होने का जोखिम होता है।
ज्यादा पसीना आना, अल्सर और अपच जैसी शिकायतें भी गुस्से की वजह से हो सकती हैं। ज्यादा गुस्से की वजह से दिल के रक्त को पंप करने की क्षमता में कमी आती है और इसकी वजह से दिल की मांसपेशियों को क्षति पहुंचती है। लगातार गुस्से से रैशेज, मुंहासे जैसी स्किन से जुड़ी बीमारियां हो सकती हैं।


दो महीने के भीतर आ जाएगी भारत की कोरोना वैक्सीन

दो महीने के भीतर आ जाएगी भारत की कोरोना वैक्सीन



राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के तहत देशवासियों को प्रफी में लगेगा टीका
एजेंसी
नई दिल्ली। पूरी दुनिया को कोरोना वैक्सीन का बेसब्री से इंतजार है। एक रिपोर्ट के मुताबिक देश की पहली कोरोना वैक्सीन दो महीने के भीतर आ जाएगी। यह वैक्सीन ‘कोविशील्ड’ होगी, जिसे पुणे की कंपनी सीरम इंस्टिट्यूट बना रही है। रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के तहत भारत सरकार अपने नागरिकों को मुफ्रत में टीके लगवाएगी।
सीरम इंस्टिट्यूट आफ इंडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सरकार ने हमें एक विशेष निर्माण प्राथमिकता लाइसेंस दिया है और ट्रायल प्रोटोकाल की प्रक्रिया को तेज कर दिया गया है जिससे 58 दिनों में ट्रायल पूरा किया जा सके। इसके तहत फाइनल फेज (तीसरा चरण) में ट्रायल का पहला डोज दिया गया। दूसरा डोज 29 दिनों के बाद दिया जाएगा। फाइनल ट्रायल डेटा दूसरा डोज दिए जाने के 15 दिनों के बाद आएगा। इस अवधि के बाद हम कोविशील्ड को बाजार में लाने की योजना बना रहे हैं।
इससे पहले तीसरे चरण के ट्रायल में कम से कम 7-8 महीने लगने की बात कही जा रही थी। 17 सेंटरों पर 1600 लोगों के बीच यह ट्रायल 22 अगस्त से शुरू हुआ है। हर सेंटर पर करीब 100 वालंटिअर हैं। वहीं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने कहा है कि हमारी एक कोविड-19 वैक्सीन कैंडिडेट क्लिनिकल ट्रायल के तीसरे चरण में है। हम पूरी तरह से आश्वस्त हैं कि इस साल के अंत तक वैक्सीन बनकर तैयार हो जाएगी।
सूत्रों के मुताबिक यह वैक्सीन सीरम इंस्टिट्यूट की होगी। कंपनी ने एस्ट्राजेनेका नामक कंपनी के साथ एक एक्सक्लूसिव अग्रीमेंट कर अधिकार खरीदे हैं ताकि इसे भारत और 92 अन्य देशों में बेचा जा सके। इसके बदले में सीरम इंस्टिट्यूट कंपनी को रायल्टी फीस देगी। केंद्र सरकार ने पहले ही सीरम को संकेत दे दिए हैं कि वह उससे सीधे वैक्सीन खरीदेगी और भारतीयों को प्रफी में टीका लगवाने की योजना पर काम चल रहा है। केंद्र ने अगले साल जून तक सीरम इंस्टिट्यूट से 130 करोड़ भारतीयों के लिए 68 करोड़ डोज मांगे हैं।
बाकी के लिए माना जा रहा है कि सरकार आईसीएमआर और भारत बायोटेक द्वारा विकसित की जा रही ‘कोवैक्सीन’ और जाइडस कैडिला की वैक्सीन के लिए आर्डर दे सकती है, अगर ये ट्रायल में पूरी तरह सफल हो जाती हैं।
भारत बायोटेक के सीएमडी कृष्णा एल्ला ने कहा है कि वह सुरक्षा और प्रभाव को ध्यान में रखते हुए वैक्सीन बनाने के लिए शार्टकट नहीं अपनाएंगे। उधर सीरम हर महीने 6 करोड़ डोज बनाना शुरू कर रहा है जिसे अप्रैल 2021 तक 10 करोड़ हर महीने तक बढ़ा दिया जाएगा। इसके लिए कंपनी ने 200 करोड़ रुपये खर्च करके अपनी वैक्सीन निर्माण की क्षमता में इजापफा किया है।
सीरम इंस्टिट्यूट आफ इंडिया दुनिया की सबसे बड़ी टीका निर्माता कंपनी है। यह हर साल 1.5 अरब वैक्सीन डोज तैयार करती है जिनमें पोलियो से लेकर मीजल्स तक के टीके शामिल हैं। बिल एवं मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन भी सीरम को करीब 1125 करोड़ रुपये की फंडिग करने को राजी हो गया है, जिससे कंपनी कोविड-19 वैक्सीन के करीब 10 करोड़ डोज बनाए और उसे गरीब देशों में भेजा जा सके। सूत्रों का कहना है कि इससे सीरम को एक डोज की कीमत को 1000 रुपये से अधिक से घटाकर करीब 250 रुपये के आसपास करने में मदद मिलेगी।


देश में अराजकता एवं दहशत का माहौलः लाल चंद शर्मा

महानगर कांग्रेस कमेटी के वार्ड अध्यक्षों एवं महानगर पदाधिकारियों की बैठक
देश में अराजकता एवं दहशत का माहौलः लाल चंद शर्मा



संवाददाता
देहरादून। महानगर कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष लाल चंद शर्मा की अध्यक्षता में वार्ड अध्यक्षों एवं महानगर पदाधिकारियों की बैठक का आयोजन रायपुर विधानसभा क्षेत्रान्तर्गत रिंग रोड स्थित कार्यालय में किया गया। 
बैठक को संबोधित करते हुए महानगर कांग्रेस अध्यक्ष लाल चंद शर्मा ने कहा कि मोदी के राज में पूरे देश की जनता त्रस्त हो चुकी है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा देश के संविधान के विरूद्व निर्णय लिये जा रहे हैं जिससे पूरे देश में अराजकता एवं दहशत का माहौल व्याप्त है। 
शर्मा के अनुसार भाजपा सरकार में गरीब, अल्पसंख्यक, किसान महिलाएं अपने आप को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं तथा हर ओर भय का वातावरण बना हुआ है। देश की अर्थ व्यवस्था एवं कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी हैं।
लाल चंद शर्मा ने कहा भाजपा की देश विरोधी, जन विरोधी तथा संविधान विरोधी नीतियों से देश की जनता आजिज आ चुकी है।
बैठक का संचालन कंडारी ने किया। बैठक में वार्ड अध्यक्ष अनिता सिंह, अनिता नेगी, ज्योति देवी, कविता नेगी, आशीष पुरोहित, गगन कक्कड़, जितेंद्र कुमार, सेवादल महानगर अध्यक्ष राजकुमार यादव, मिथलेश उपाध्याय, जिला प्रभारी परवादून अनिल नेगी, हरीश पंचवाल, ओम प्रकाश रतूड़ी आदि मौजूद रहे।


शनिवार, 22 अगस्त 2020

तपेदिक और चिकनगुनिया रोधी फ्रलेवोनाइड अणुओं के लिए पहला सिंथेटिक रास्ता खोजा

तपेदिक और चिकनगुनिया रोधी फ्लेवोनाइड अणुओं के लिए पहला सिंथेटिक रास्ता खोजा



टीबी प्रोटीन के साथ रगोसाफ्लेवोनाइड्स का अंतः क्रिया विश्लेषण

एजेंसी
नई दिल्ली। रगोसाफ्लेवोनाइड, पोडोकारफ्लेवोन और आइसोफ्लेवोन जैसे लेफ्वोनाइड अणु जिन्हें तपेदिक और चिकनगुनिया रोधी पाया गया है, उन्हें अब तक पौधों से पृथक किया गया था। अब पहली बार वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला में इन अणुओं को संश्लेषित करने के लिए मार्ग प्रकट किया है, जिससे जिन औषधीय पौधों में इन्हें पाया जाता है, उनका अतिदोहन किए बगैर सभी मौसमों में इनकी उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए मार्ग प्रशस्त हुआ है।
भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के एक स्वायत्त संस्थान अघारकर अनुसंधान संस्थान (एआरआई) पुणे के वैज्ञानिकों ने तपेदिक और चिकनगुनिया के उपचार से संबंधित फ्लेवोनाइड अणुओं के निर्माण के लिए पहला सिंथेटिक मार्ग खोजा है। कोविड-19 की संभावित उपचार प्रतिक्रिया के संबंध में इसमें प्रारंभिक संकेत देखे गए हैं।
डा0 प्रतिभा श्रीवास्तव और एआरआई की उनकी टीम द्वारा सहकर्मियों की समीक्षा वाली वैज्ञानिक पत्रिका एसीएस ओमेगाश द्वारा में हाल ही में प्रकाशित कार्य के अनुसार उन्होंने रगोसाफ्लेवोनाइड, पोडोकारफ्लेवोन और आइसोफ्लेवोन जैसे फ्लेवोनाइड्स के पहले पूरे संश्लेषण को विकसित किया है। श्रगोसाफ्लेवोनाइड एश एक चीनी औषधीय पौधे रोजा रगोजा से प्राप्त बताया जाता है। पोडोकारफ्लेवोन ए’ को पोडोकार्पस मैक्रोफाइलस पौधे से अलग किया जाता है।
डा0 श्रीवास्तव बताती हैं कि ज्यादातर आयुर्वेदिक उत्पाद फ्लेवोनाइड्स से भरपूर होते हैं। लेवोनाइड ज्यादातर टमाटर, प्याज, सलाद पत्ता, अंगूर, सेब, स्ट्राबेरी, आड़ू और अन्य सब्जियों में मौजूद होते हैं। फ्लेवोनाइड्स से भरपूर आहार हमें दिल, जिगर, गुर्दा, मस्तिष्क से संबंधित और अन्य संक्रामक रोगों से बचाता है। अभी दुनिया कोविड-19 के कारण एक दर्दनाक स्थिति का सामना कर रही है। चूंकि फ्लेवोनाइड्स रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं इसलिए फ्लेवोनाइड-समद्व आहार का सुझाव दिया जाता है।



फ्रलेवोनाइड्स का एंटी-चिकनगुनिया वायरस (चिक वी) परीक्षण

फ्रलेवोनाइड्स को आमतौर पर पौधों से अलग किया जाता है। हालांकि प्राकृतिक उत्पादों में असंगति विभिन्न मौसमों, स्थानों और प्रजातियों में हो सकती है। इन बाधाओं के साथ औषधीय पौधों का अत्यधिक दोहन पर्यावरण पर एक अतिरिक्त बोझ डालता है। इन समस्याओं को दूर करने के लिए इस तरह के उत्पादों को सरल और लागत प्रभावी तरीकों से प्रयोगशाला में सिंथेटिक प्रोटोकाल द्वारा विकसित किया जा सकता है। सिंथेटिक प्राकृतिक उत्पादों में प्राकृतिक उत्पाद के समान ही संरचना और औषधीय गुण होते हैं।
फ्रलेवोनाइड्स की रासायनिक संरचना महिला हार्माेन 17-बीटा-एस्ट्राडियोल (एस्ट्रोजन) के समान ही है। इसलिए फ्रलेवोनाइड्स उन महिलाओं के जीवन को आसान कर सकते हैं जो प्रीमेनोपाजल यानी रजोनिवृत्ति से पहले के चरण में समस्याओं का सामना करती हैं। डा0 श्रीवास्तव कहती हैं कि रगोसाफ्रलेवोनाइड्स को संश्लेषित करते समय मेरी टीम ने डीहाइड्रो रगोसा फ्रलेवोनाइड्स प्राप्त किए हैं, जो चिकनगुनिया और तपेदिक जैसे अत्यधिक संक्रामक रोगों को रोकने में बहुत शक्तिशाली पाए जाते हैं। स्पाइक प्रोटीन, प्रोटीएज और आरडीआरपी को लक्षित करके कोविड-19 को रोकने के लिए इन अणुओं का कम्प्यूटेशनल विश्लेषण भी प्राप्त किया गया है और परिणाम उत्साहजनक हैं।
डा0 श्रीवास्तव ने पैरीमेनोपाजल चरण के दौरान की महिलाओं की समस्याओं के लिए अपने पीएचडी छात्रा निनाद पुराणिक द्वारा संश्लेषित यौगिकों में भी भरोसा जताया। डा0 श्रीवास्तव ने कहा कि सिंथेटिक रसायन विज्ञान में, प्राकृतिक उत्पादों के एनालाग्स (सादृश्यों) को समान मार्ग से तैयार किया जा सकता है। कई बार एनालाग्स प्राकृतिक उत्पादों की तुलना में बेहतर औषधीय गुण दिखाते हैं।


श्रमिक संगठनों ने प्रधानमंत्री से पर्यावरण प्रभाव आकलन नियमों के मसौदे को वापस लेने का आग्रह किया

श्रमिक संगठनों ने प्रधानमंत्री से पर्यावरण प्रभाव आकलन नियमों के मसौदे को वापस लेने का आग्रह किया



एजेंसी
नयी दिल्ली। केंद्रीय श्रमिक संगठनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए) 2020 अधिसूचना के मसौदे को वापस लेने का आग्रह किया। 10 केंद्रीय श्रमिक संगठनों का कहना है कि यह भारत की अंतरराष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन संधि को लेकर जताई गई प्रतिबद्वता और राष्ट्रीय हितों के खिलाफ है।
ट्रेड यूनियनों ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कहा कि हम अपनी चिंता आपके समक्ष रख रहे हैं। आपसे निवेदन है कि लोगों और पर्यावरण संरक्षण के हित में इस प्रस्ताव को वापस लिया जाए।
पत्र में उन्होंने कहा है कि हम केंद्रीय श्रमिक संगठनों का संयुक्त मंच ईआईए 2020 के नियमों के प्रस्तावित नियमों के मसौदे पर अपना विरोध जताते हैं। यह भारत की अंतरराष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन संधि के साथ-साथ पर्यावरण रूप से संवेदनशील क्षेत्रों के संरक्षण के हमारे राष्ट्रीय हित के खिलाफ है।
श्रमिक संगठनों ने पत्र में लिखा है कि पर्यावरण प्रभाव आकलन 2020, ईआईए 2006 से पूरी तरह से अलग है। ऐसा लगता है कि इसके जरिये कोयला और अन्य खनिजों का निजी कंपनियों द्वारा वाणिज्यिक खनन को सुगम बनाया गया है। साथ ही यह विभिन्न क्षेत्रों में सरकार के तथाकथित सुधारों के जरिये भूमि उपयोग व्यवस्था को पुनर्गठित करने का प्रयास है। पत्र के अनुसार सरकार को सतत वैश्विक विकास लक्ष्यों को लेकर प्रतिबद्व रहना चाहिए जबकि प्रस्तावित नियमों का मसौदा इसके उलट है।
पत्र भेजने वाले दस केंद्रीय श्रमिक संगठन इंटक, एटक, एचएमएस, सीटू, एआईयूटीयूसी, टीयूसीसी, सेवा, एआईसीसीटीयू, एलपीएफ और यूटीयूसी है। देश में 12 केंद्रीय श्रमिक संगठन हैं जिसमें आरएसएस से संबद्व भारतीय मजदूर संघ भी शामिल हैं।


शिक्षा के क्षेत्र में नेतृत्वकारी भूमिका निभायेगा हिंदी विश्वविद्यालय वर्धाः शिक्षा मंत्री

निशंक ने महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा में ‘साकेत संकुल’ का आनलाइन लोकार्पण किया
शिक्षा के क्षेत्र में नेतृत्वकारी भूमिका निभायेगा हिंदी विश्वविद्यालय वर्धाः शिक्षा मंत्री



एजेंसी
नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा में 56 शिक्षकों तथा अधिकारियों के लिए निर्मित ‘साकेत संकुल’ का आनलाइन लोकार्पण किया। इस अवसर पर निशंक ने उम्मीद जाहिर की कि महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा शिक्षा के क्षेत्र में नेतृत्वकारी भूमिका निभायेगा। 
पोखरियाल ने उम्मीद जतायी कि ‘साकेत संकुल’ के शिक्षक अपने यशस्वी कुलपति के नेतृत्व में पूरा करेंगे। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि गांधीजी जब अल्मोड़ा गये थे तो हिमालय के आखिरी छोर तक वे नयी तालीम ले गये थे। वहीं रहकर उन्होंने अनासक्ति योग लिखा था। उसमें गांधीजी का जोर शिक्षा, संस्कृति, संस्कार और आत्मनिर्भरता पर था। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भी गांधीजी के सपनों के अनुरूप शिक्षा का प्रावधान किया गया है, वे प्रावधान आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सहायक होंगे। 
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में मातृभाषा शिक्षण पर जोर दिया गया है। प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक मातृभाषा में शिक्षा दिए जाने से उसके नतीजे उत्साहजनक निकलेंगे। आज जब कई भाषाएं और बोलियां लुप्त हो रही हैं उन्हें हर हाल में बचाना राष्ट्रीय शिक्षा नीति का अभीष्ट है। मातृभाषा के माध्यम से शिक्षण और सभी भारतीय भाषाओं के बीच समन्वय स्थापित करने में हिंदी की भूमिका बड़ी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भाषा शिक्षण के अलावा ज्ञान, विज्ञान और अनुसंधान पर भी जोर दिया गया है। 
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति नए भारत के निर्माण की आधारशिला बनेगी। अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में भारत आगे बढ़ेगा और जो भारतीय प्रतिभाएं विदेशों में चली जाती हैं वे अपने ही देश के विकास में योगदान करेंगी।
प्रस्ताविक वक्तव्य देते हुए महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 रजनीश कुमार शुक्ल ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारत की ऐतिहासिक शिक्षा नीति है जो शिक्षा, संस्कार, राष्ट्र निर्माण का यत्न है। पहली बार इस शिक्षा नीति में हिंदी और भारतीय भाषाओं में शिक्षा और पारस्परिक संबंध कायम करने, अनुवाद के जरिये ज्ञान की सामग्री सभी भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि गांधी के 150वें और विनोबा के 125वें जन्मवर्ष में हिंदी विश्वविद्यालय से जो अपेक्षाएं और आकांक्षाएं केंद्रीय शिक्षा मंत्री को हैं उन्हें वह पूरा करने का पूरा प्रयास करेगा।


ओएनसीओ डॉट कॉम की कैंसर के प्रति जागरुकता पैदा करने के लिये अभिनेत्राी संजना सांघी के साथ भागीदारी

ओएनसीओ डॉट कॉम की कैंसर के प्रति जागरुकता पैदा करने के लिये अभिनेत्री संजना सांघी के साथ भागीदारी



दिल बेचारा की अभिनेत्री ने मल्टी-प्लेटफार्म कैम्पेन फाइट केंसर वीद ओएनसीओ को लान्च करने के लिये भारत की अग्रणी कैंसर केयर कंपनी का साथ दिया
संवाददाता
देहरादून। भारत की आनलाइन कैंसर केयर प्लेटफार्म ओएनसीओ डॉट कॉम ने फाइट केंसर वीद ओएनसीओ कैम्पेन लान्च करने के लिये ‘दिल बेचारा’ फिल्म से डेब्यू करने वाली अभिनेत्री संजना सांघी के साथ भागीदारी की घोषणा की। यह कैम्पेन इस प्लेटपफार्म द्वारा आसानी से सुलभ कैंसर की व्यक्तिपरक देखभाल पर जागरूकता पैदा करने के लिये है। 
इस कैम्पेन के माध्यम से संजना उन चुनौतियों की बात करती हैं, जो कैंसर के रोगियों और उनकी देखभाल करने वालों के सामने कैंसर का पता चलने के बाद आती हैं और यह कि कैसे वरिष्ठ कैंसर विशेषज्ञों के अपने विश्व-स्तरीय नेटवर्क के माध्यम से शुरूआती अवस्था में उपचार पर मार्गदर्शन देता है। इस कैम्पेन के माध्यम से रोगी सर्वश्रेष्ठ कैंसर डाक्टरों से आनलाइन या काल पर परामर्श ले सकते हैं। 
अभिनेत्री संजना सांघी ने अपनी हालिया फिल्म में एक कैंसर रोगी की भूमिका निभाई थी। साथ ही इस तथ्य को सामने लेकर आईं कि कैंसर का एक व्यक्ति और उसके प्रियजनों पर कितना बुरा प्रभाव होता है।
ओएनसीओ डॉट कॉम की सीईओ और को-फाउंडर सुश्री राशी जैन ने कहा कि फिल्म में संजना का किरदार ओएनसीओ डॉट कॉम के एक युवा रोगी से बहुत मेल खाता है जो सामान्य जीवन जीना चाहता है लेकिन रोजाना कैंसर से लड़ भी रहा है। संजना कैंसर पर जागरूकता निर्मित करने में हमारी मदद भी करेंगी कि ओएनसीओ डॉट कॉम कैसे रोगियों को शीर्ष कैंसर विशेषज्ञों से जोड़कर सही सूचना तक पहुंच देते हुए उनकी मदद कर रहा है। 
संजना ने कहा कि मैंने एक कैंसर रोगी की भूमिका निभाने और उसकी तैयारी के लिये कैंसर के कई युवा रोगियों और इस बीमारी से जीतने वालों के साथ समय बिताया। तब पता चला कि सही जानकारी के लिये उन्हें बहुत संघर्ष करना पड़ता है। चाहे वह उपचार के विभिन्न विकल्पों के बारे में हो, या उपचार के संभावित दुष्प्रभावों के बारे में। यह भागीदारी के लिये सही ब्राण्ड है। इस तरह से मैं कैंसर कम्युनिटी को ओएनसीओ डॉट कॉम के बारे में बताकर उन्हें कुछ लौटा भी सकी।
ओएनसीओ डॉट कॉम और संजना को विश्वास है कि साथ मिलकर वे देशभर में कैंसर और उसकी नियमित निगरानी के प्रति जागरूकता को बेहतर कर सकेंगे ताकि इस रोग का जल्दी पता लगाया जा सके और सही निदान हो सके।


 


पितृपक्ष के एक माह बाद शुरू होगा नवरात्र

पितृपक्ष के एक माह बाद शुरू होगा नवरात्र

पं0 चैतराम भट्ट
देहरादून। आमतौर पर पितृ पक्ष के समापन के अगले दिन से नवरात्र का आरंभ हो जाता है। पितृ अमावस्या के अगले दिन से प्रतिपदा के साथ शारदीय नवरात्रा का आरंभ हो जाता है। परन्तु इस बार श्राद्व पक्ष समाप्त होते ही अधिमास लग जायेगा। इस साल पितृपक्ष 1 सितंबर से शुरू होकर 17 सिंतबर तक चलेगा। सभी श्राद्व कर्मकांड इस दौरान किए जाएंगे और पितरों को तर्पण भी किया जाएगा। लोग अपने-अपने पितरों के लिए पिंडदान, तर्पण, हवन और अन्न दान इस दौरान करते हैं ताकि पितरों का आशीर्वाद उन पर बना रहे।
अधिमास लगने से नवरात्र और पितृपक्ष के बीच एक महीने का अंतर आ जायेगा। अश्विन मास में मलमास लगना और एक महीने के अंतर पर दुर्गा पूजा आरंभ होना, ऐसा संयोग करीब 165 साल बाद होने जा रहा है। लीप वर्ष होने के कारण ऐसा हो रहा है। चातुर्मास जो हमेशा 4 महीने का होता है, इस बार 5 महीने का होगा। इस बार 165 साल बाद लीप इयर और अधिमास दोनों ही एक साल में हो रहे हैं।
चातुर्मास लगने से विवाह, मुंडन, कर्ण छेदन जैसे मांगलिक कार्य नहीं होंगे। इस काल में पूजन पाठ, व्रत उपवास और साधना का विशेष महत्व होता है। इस दौरान देव सो जाते हैं। देवउठनी एकादशी के बाद ही देव जागृत होते हैं। इस साल 17 सितंबर को श्राद्व खत्म होंगे, इसके अगले दिन अधिमास शुरू हो जायेगा जो 16 अक्तूबर तक चलेगा। इसके बाद 17 अक्तूबर से नवरात्रि व्रत रखे जायेंगे।
एक सूर्य वर्ष 365 दिन और करीब 6 घंटे का होता है। जबकि एक चंद्र वर्ष 354 दिनों का माना जाता है। दोनों वर्षों के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर होता है। यह अंतर हर 3 वर्ष में लगभग एक माह के बराबर हो जाता है। इसी अंतर को दूर करने के लिए हर 3 साल में एक चंद्र मास अतिरिक्त आता है, जिसे अतिरिक्त होने की वजह से अधिमास का नाम दिया गया है।


गुरुवार, 20 अगस्त 2020

भोजन करने के बाद लाभप्रद सौंफ और मिश्री का सेवन

भोजन करने के बाद लाभप्रद सौंफ और मिश्री का सेवन



इनका सेवन शरीर और मन दोनों को लाभकारी, यह इम्यूनिटी को बढ़ता है 
प0नि0डेस्क
देहरादून। सौंफ और मिश्री को साथ-साथ खाना टेस्ट बड्स को संतुष्ट करने और दिमाग को शांत करने का काम करता है। सौंफ पाचन के लिए बेहतरीन होती है। इसलिए जब भोजन के बाद सौंफ खाई जाती है तो पाचन आसान हो जाता है। गैस की समस्या नहीं होती और पेट में भारीपन नहीं होता। सौंफ संग मिश्री खाने से शरीर और मन दोनों को ही लाभ होता है। 
सौंफ पाचन के साथ दिमाग के लिए भी लाभकारी है। दिमाग पर सौंफ के पौषक तत्वों से अधिक इसकी अरोमा (प्राकृतिक खुशबू) का असर होता है। सौंपफ चबाते समय इसका स्वाद जीभ के टेस्ट बड्स को फुलनेस (पूर्ण संतुष्टि) का अहसास करता है। जबकि इसकी अरोमा दिमाग को शांत करने का काम करती है। जीभ में जो टेस्ट बड्स यानी स्वाद कलिकाएं होती हैं, सौंफ खाते समय उनके संतुष्ट होने और दिमाग के शांत होने से हमारे शरीर में हैपी हार्माेन्स का सीक्रेशन अधिक होने लगता है।
जब हैपी हार्माेन्स जैसे, डोपामाइन, एंडोर्फिन और आक्सीटोसिन अच्छी मात्रा में होते हैं तो सोच और समझ का स्तर बेहतर होता है। सीखने की क्षमता में विकास होता है। खास बात यह है कि इस दौरान हम जिन चीजों को सीखते और पढ़ते हैं। वे हमें लंबे समय तक याद रहती हैं। यानी हमारी यादाश्त बढ़ाने में सौंफ का तो सीधे तौर पर कोई रोल नहीं होता, इसके लिए हार्माेन्स जिम्मेदार होते हैं। लेकिन इन हार्माेन्स का सीक्रेशन जरूर सौंफ की सहायता से बढ़ाया जा सकता है।
सौंफ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक होती है। क्योंकि यह विटमिन-सी प्राप्त करने का एक प्राकृतिक माध्यम है। सौंफ खाते हुए सिर्फ तन और मन को शांत नहीं किया जा सकता बल्कि रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाया जा सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि हमारे शरीर में रोग प्रतिरोधक कोशिकाओं को बढ़ाने का काम विटमिन-सी ही करता है। विटामिन-सी शरीर में वाइट ब्लड सेल्स यानी डब्ल्यूबीसी काउंट बढ़ाने में सहायता करता है।
ये डब्ल्यूबीसी ही वे कोशिकाएं हैं, जो शरीर में किसी वायरस या बैक्टीरिया के प्रवेश के बाद उसे यथा संभव मारने और शरीर में फैलने से रोक रखने का काम करती हैं। जब तक कि उस वायरस के खिलाफ शरीर में ऐंटिबाडीज बनना शुरू नहीं हो जाती। 
सौंफ का सेवन शारीरिक कमजोरी को दूर करने का काम भी करता है। क्योंकि सौंफ में बहुत सारे पौषक तत्व जैसे, मैग्नीशियम, कैल्शियम, मैग्नीज, पोटैशियम आदि पाए जाते हैं। ये सभी मिनरल्स शरीर की मांसपेशियों और हड्ढियों को मजबूत करने का काम करते हैं।
सौंफ के साथ मिश्री खाने पर सौंफ का जो हल्का कसैला-सा स्वाद होता है, मिश्री के साथ इसे खाने से उस स्वाद का अहसास नहीं हो पाता है। भोजन करने की पूर्ण संतुष्टि शरीर और मन को प्राप्त होती है। इससे मानसिक एकाग्रता बढ़ाने में मदद मिलती है। मिश्री यानी शुगर की बहुत सीमित मात्रा जब सौंफ के साथ शरीर में जाती है तो वह शारीरिक तौर पर शिथिलता का अहसास नहीं होने देती है। क्योंकि भोजन करने के बाद हम सभी को कुछ समय के लिए बहुत आलस आता है। सौंफ और मिश्री का सेवन हमें उस आलस से बचाता है।


राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी के गठन को मंजूरी

राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी के गठन को मंजूरी



फिलहाल युवाओं को नौकरी के लिये देनी होती है अलग-अलग परीक्षाएं 
प0नि0ब्यूरो
देहरादून। सरकारी नौकरी के लिए अब सिर्फ एक परीक्षा देनी होगी। सीईटी के जरिए अब कई तरह के टेस्ट की जरूरत नहीं होगी जिससे अभ्यर्थियों का समय और संसाधन बचेगा। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने साझा पात्रता परीक्षा आयोजित करने के लिये राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी के गठन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इसकी जानकारी दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय किया गया।
बैठक के बाद सूचना एव प्रसारण मंत्री जावड़ेकर ने कहा कि युवाओं को फिलहाल नौकरी के लिये कई अलग-अलग परीक्षाएं देनी पड़ती हैं। ऐसी परीक्षाओं के लिये अभी लगभग 20 भर्ती एजेंसियां हैं और परीक्षा देने के लिए अभ्यर्थियों को दूसरे स्थानों पर भी जाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में परेशानियां दूर करने की मांग काफी समय से की जा रही थी। इसे देखते हुए मंत्रिमंडल ने साझा पात्रता परीक्षा लेने के लिये राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी के गठन का निर्णय किया गया है।
बताया गया कि प्रारंभ में तीन एजेंसियों की परीक्षाएं राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी के दायरे में आयेंगी। शुरू में इसके दायरे में रेलवे भर्ती परीक्षा, बैंकों की भर्ती परीक्षा और कर्मचारी चयन आयोग आयेंगे। उन्होंने बताया कि इस परीक्षा में हासिल स्कोर तीन साल तक मान्य होंगे। परीक्षा आयोजित करने के लिये हर जिले में कम से कम एक परीक्षा केंद्र स्थापित किया जायेगा।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बहु एजेंसी निकाय के रूप में राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी एनआरए का गठन करने का निर्णय किया जो समूह ख और ग गैर-तकनीकी पदों के लिए उम्मीदवारों की स्क्रीनिंग करने के लिए सामान्य योग्यता परीक्षा सीईटी आयोजित करेगी। सरकारी के अनुसार एनआरए एक बहु-एजेंसी निकाय होगी जिसकी शासी निकाय में रेलवे मंत्रालय, वित्त मंत्रालय/वित्तीय सेवा विभाग, कर्मचारी चयन आयोग एसएससी, रेलवे भर्ती बोर्ड आरआरबी तथा बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान आईबीपीएस के प्रतिनिधि शामिल होंगे। एक विशेषज्ञ निकाय के रूप में एनआरए केन्द्र सरकार की भर्ती के क्षेत्र में अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी और सर्वाेत्तम प्रक्रियाओं का पालन करेगी।
वर्तमान में सरकारी नौकरी के इच्छुक उम्मीदवारों को पात्रता की समान शर्तों वाले विभिन्न पदों के लिए अलग-अलग भर्ती एजेंसियों द्वारा संचालित की जाने वाली भिन्न-भिन्न परीक्षाओं में सम्मिलित होना पड़ता है। उम्मीदवारों को भिन्न-भिन्न भर्ती एजेंसियों को शुल्क का भुगतान करना पड़ता है और इन परीक्षाओं में भाग लेने के लिए लंबी दूरियां तय करनी पड़ती है। इन अलग-अलग भर्ती परीक्षाओं से उम्मीदवारों के साथ-साथ संबंधित भर्ती एजेंसियों पर भी बोझ पड़ता हैं। इसमें बार-बार होने वाले खर्च, कानून और व्यवस्था/सुरक्षा संबंधी मुद्दे और परीक्षा केन्द्रों संबंधी समस्याएं शामिल हैं।


बुधवार, 19 अगस्त 2020

अब वॉट्सऐप के जरिए गैस सिलिंडर बुक 

अब वॉट्सऐप के जरिए गैस सिलिंडर बुक 



वॉट्सऐप के जरिए गैस सिलिंडर बुकिंग का तरीका
प0नि0डेस्क
देहरादून। आजकल हर चीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। ऐसे में एलपीजी गैस सिलेंडर को इससे दूर नहीं रखा जा सकता। भारत गैस के अलावा इंडेन भी अपने कस्टमर्स को व्हाट्सऐप के जरिए सिलेंडर बुक करने की सुविधा दे रहा है। इतना ही नहीं गैस कब डिलीवर होगी इसकी जानकारी भी महज एक मैसेज भेजकर ले सकते हैं।
इंडियन ऑयल कॉर्पाेरेशन ने उपभोक्ताओं को वॉट्सऐप के जरिए सिलेंडर बुक करने की सुविधा दी है। इसका लाभ लेने के लिए उपभोक्ता को अपने रजिस्टर्ड नंबर से 7588888824 पर मैसेज भेजना होगा। आपको REFILL लिखकर भेजना होगा। इससे बुकिंग हो जाएगी।
बुकिंग के बाद सिलेंडर की डिलीवरी कब होगी, ये जानने के लिए भी उपभोेक्ता व्हाट्सऐप पर मैसेज भेज सकते हैं। इसके लिए भी अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से STATUS#  टाइप करना होगा। उसके बाद ऑर्डर नंबर जो बुकिंग करने के ठीक बाद आपको मिलता है। स्टेटस आर ऑर्डर नंबर एक साथ लिखे जाएंगे, इनमें स्पेस नहीं होगा। उदाहरण के तौर पर STATUS#12345 इसे 7588888824 नंबर पर भेज देना होगा।
जो लोग मैसेज की जगह कॉल करके सिलेंडर बुक करना चाहते हैं वे महज एक मिस्डकॉल से बुकिंग करा सकते हैं। कंपनी की ओर से ये सुविधा पहले से उपलब्ध है। इसके लिए आपको 9911554411 पर मिस्ड कॉल देनी होगी। मालूम हो कि कुछ समय पहले देश की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी भारत गैस यानि बीपीसीएल ने भी व्हाट्सऐप से सिलेंडर बुकिंग की सुविधा शुरू की थी।


सोमवार, 17 अगस्त 2020

98 पीसीएस अधिकारियों ने नहीं दिया वर्ष 2018 का अचल सम्पत्ति विवरण

नौैकरशाही नहीं कर रही अचल सम्पत्ति वार्षिक विवरण के नियम का पालन
98 पीसीएस अधिकारियों ने नहीं दिया वर्ष 2018 का अचल सम्पत्ति विवरण



संवाददाता
काशीपुर। उत्तराखंड की नौकरशाही पारदर्शिता व भ्रष्टाचार नियंत्रण के लिये कर्मचारी आचरण नियमावली तथा लोकायुक्त अधिनियम में शामिल वार्षिक अचल सम्पत्ति विवरण प्रस्तुत करने केे नियम का पालन नहीं कर रही हैै। स्थिति तो यह हैै कि उत्तराखंड शासन द्वारा उसकी मानीटरिंग तक नहीं की जा रही है। यह खुलासा सूचना अधिकार कार्यकर्ता नदीम उद्दीन को कार्मिक विभाग द्वारा उपलब्ध करायी गयी सूचना से हुआ।
काशीपुर निवासी सूचना अधिकार कार्यकर्ता नदीम उद्दीन ने उत्तराखंड शासन के कार्मिक विभाग के लोक सूचना अधिकारी से पीसीएस अधिकारियोें द्वारा वर्ष 2018 व 2019 में वार्षिक सम्पत्ति विवरण देने व न देने वालों की सूची की सत्यापित प्रतियां चाही थी। इसके उत्तर में लोक सूचना अधिकारी/अनुसचिव हनुमान प्रसाद तिवारी ने अपनेे पत्रांक 01 दिनांक 28 फरवरी से उत्तराखंड में कार्यरत पीसीएस सभी अधिकारियोें तथा 2018 व 2019 में सम्पत्ति विवरण देने वालों की सूचियां उपलब्ध करायी है लेकिन विवरण न देने वालों की सूचियां नहीं उपलब्ध करायी हैै। केवल यह लिख दिया हैै कि कि जिन अधिकारियों ने सम्पत्ति विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया हैै उनके नाम आप स्वयं उक्त सूचियों से ज्ञात कर सकते हैै। 
इससे स्पष्ट प्रमाणित हो गया कि उत्तराखंड में अचल सम्पत्ति विवरण न देने वालों पर कार्यवाही तो दूर इसकी मानीटरिंग तक नहीं हो रही है। सम्पत्ति विवरण देने वालों की सूची के अवलोकन से यह भी स्पष्ट हैै कि अधिकतर अधिकारियों ने शासनादेश में निर्धारित समय सीमा (हर वर्ष 31 अगस्त तक) के अन्दर अचल सम्पत्ति विवरण नहीं दिया है।
नदीम को उत्तराखंड में कार्यरत पीसीएस अधिकारियोें की सूची में कुल 150 सिविल सेवा के अधिकारियों तथा 9 स्थापन्न डिप्टी कलैक्टरोें कुल 159 अधिकारियों की सूची उपलब्ध करायी है। जबकि 2018 में अचल सम्पत्ति विवरण उपलब्ध करानेे वालों में केवल 61 तथा 2019 में विवरण उपलब्ध कराने वालों में 141 अधिकारी शामिल है। इस प्रकार 2018 में 62 प्रतिशत 98 अधिकारियों ने तथा 2019 में 11 प्रतिशत 18 अधिकारियों ने अचल सम्पत्ति विवरण नहीं उपलब्ध कराया है। 
उपलब्ध सूचियों के अवलोकन से ज्ञात हुआ हैै कि 18 पीसीएस अधिकारी ऐसे है जिन्होंने  2019 में अपना अचल सम्पत्ति विवरण नहीं दिया हैै। इन अधिकारियों में उमेश नारायण पाण्डेय, दीप्ति सिंह, हरक सिंह रावत, भरत लाल फिरमाल, सादिया आलम, शिवचरण द्विवेदी, कृष्ण कुमार मिश्रा, नारायण सिंह डांगी, फ्रिंचाराम किशन सिंह नेगी, रविन्द्र कुमार जुवांठा, मायादत्त जोशी, हिमांशु कफल्टिया, कुुमकुुम जोशी, गौरव पाण्डे, जितेन्द्र वर्मा तथा संदीप कुमार शामिल हैै। 
  2018 में सम्पत्ति विवरण देने वाले 61 अधिकारियों की सूची में अनिल कुमार चन्याल, अरविन्द कुमार पाण्डे, आशोक कुमार पाण्डे, अवधेेश कुमार सिंह, बीएस चलाल, वीर सिंह बुद्वियाल, चन्दन सिंह धर्मशक्तु, चन्द्र सिंह इमलाल, डा0 अभिषेक त्रिपाठी, डा00 आनन्द श्रीवास्तव, गौैरव चटवाल, गोपाल राम बिनवाल, गोपाल सिंह चौैहान, हंसा दत्त पांडेय, हरगिरी, हरबीर सिंह, हेमंत कुमार वर्मा, जगदीश चन्द्र कांडपाल, जीवन सिंह नगनयाल, झरना कामरान कमथान, कैलाश सिंह टोलिया, कौैस्तुभ मिश्रा, मनीष कुमार सिंह, मौै0 नासिर, मीनाक्षी पटवाल, मोहन सिंह बरनिया, नारायण सिंह नबियाल, नरेन्द्र सिंह क्वारियाल शामिल है।
इसके अलावा नवनीत पांडेय, निर्मला बिष्ट, नुपुर वर्मा, पंकज कुमार उपाध्याय, परितोष वर्मा, प्रकाश चन्द्र, प्रशांत कुमार आर्या, प्रत्यूष सिंह, प्यारे लाल शाह, राहुल कुमार गोयल, राकेश चन्द्र तिवारी, रमेश चन्द्र गौतम, रजा अब्बास, रिंकू बिष्ट, संगीता कनोजिया, संजय कुमार, सीमा विश्वकर्मा, शैैलेन्द्र सिंह नेगी, शालिनी नेगी, श्रीष कुमार, सोनिया पंत, सुरेन्द्र लाल सेमवाल, उदय सिंह राणा, उत्तम सिंह चौहान, विपरा त्रिवेदी, विवेक प्रकाश, विवेेक राय, योगेन्द्र सिंह, युक्ता मिश्रा, चतर सिंह, देवेन्द्र सिंह नेगी, चन्द्र सिंह मर्ताेलिया, हरक सिंह रावत भी शामिल है।


 



आलू की मदद से त्वचा की देखभाल

आलू की मदद से त्वचा की देखभाल



प0नि0डेस्क
देहरादून। आलू त्वचा की देखभाल के लिए बहुत ही लाभकारी होता हैं। आलू का इस्तेमाल कर चेहरे के डार्क स्पोट को कम किया जा सकता है। बता दें कि बालीवुड एक्ट्रेस भी अपनी स्किन का ध्यान रखने के लिए आलू का इस्तेमाल करती हैं। डार्क स्पोट, पिंपल और टैनिंग को हटाने के लिए आलू बहुत ही लाभकारी है। इसके लिए आलू को इस्तेमाल करने का तरीका जानना जरूरी है।
बढ़ती उम्र के लक्षण चेहरे पर साफ  नजर आने लगते हैं। ऐसे में रिंकल से छुटकारा पाने के लिए महिलाएं केमिकल और महंगी क्रीम का यूज करती है। लेकिन इसके बाद भी चेहरे पर रिंकल कम नहीं होते हैं। ऐसे में रिंकल को कम करने के लिए घरेलु नुस्खों का इस्तेमाल किया जा सकता हैं। 
रिंकल हटाने के लिए सबसे पहले एक आलू लें। इस आलू को कद्दुकस कर लें। इसके बाद आलू का रस निकाल लें। इस रस में ग्लीसरीन मिलाएं। इस मिश्रण को चेहरे पर 20 मिनट के लिए लगाएं। इसके बाद अपने चेहरे को धो लें। आलू के साथ ग्लिसरीन का यूज करने से चेहरा टाइट हो जाता हैं। साथ ही स्किन ग्लोइंग हो जाती हैं।
महिलाएं अपनी त्वचा की देखभाल करने के लिए क्या कुछ नहीं करती हैं लेकिन घरेलू नुस्खें का इस्तेमाल कर पिंपल के निशान हटाया जा सकते हैं। चेहरे पर पिंपल के निशान हटाने के लिए आलू का इस्तेमाल कर सकते हैं। 
इसके लिए पहले एक चम्मच आलू का गूदा और एक चम्मच टमाटर का गुदा लें। एक चम्मच शहद और एक चम्मच ओटमील डालें और सबको अच्छे से मिला कर अपने चेहरे पर लगाएं। हल्के हाथों से चेहरे की मसाज करें। 10 मिनट बाद ठंडे पानी से मुंह धो लें।


 



पेंशन से जुड़ी किसी भी तरह की शिकायत का हल सीपीएओ पोर्टल

पेंशन से जुड़ी किसी भी तरह की शिकायत का हल सीपीएओ पोर्टल



सेंट्रल पेंशन अकाउंटिंग ऑफिस (सीपीएओ) पोर्टल के जरिए पेंशनर्स अपनी शिकायत को सरकार तक पहुंचा सकते हैं
प0नि0ब्यूरो
देहरादून। केंद्रीय कर्मचारी रिटायर होने के बाद पेंशन के हकदार होते हैं। वे केंद्रीय कर्मचारी जिनकी नियुक्ति 1 जनवरी 2004 से पहले हुई थी उन्हें पुरानी व्यवस्था के तहत पेंशन मिलती है। जबकि इस डेट के बाद नियुक्त हुए कर्चमारियों को एनपीएस के तहत पेंशन मिलती है। रिटायर होने के बाद पेंशन को लेकर पेंशनर्स के मन में कई तरह के सवाल होते हैं लेकिन उनका सटीक जवाब उन्हें मिल नहीं पाता जिसके चलते वे दुविधा की स्थिति में रहते हैं।
कई पेंशनर्स को पेंशन को लेकर कई तरह की शिकायत होती हैं लेकिन उन्हें इस बात का पता नहीं होता कि वे कहां अपनी शिकायत लेकर जाएं। ऐसे पेंशनर्स की इन्हीं समस्याओं को दूर करने और सही जानकारी पहुंचाने के लिए सेंट्रल पेंशन अकाउंटिंग ऑफिस (सीपीएओ) पोर्टल बनाया गया है। इसके जरिए पेंशनर्स अपनी शिकायत को सरकार तक पहुंचा सकते हैं।
इसके लिए पोर्टल के इस लिंक https://cpao.nic.in/grievance_sql/Grievance_form_all.php  पर विजिट करना होगा। इस पोर्टल पर खुद को रजिस्टर करना होगा। इस लिंक को ओपन करने पर सामने एक फॉर्म ओपन होगा। इसमें पीपीओ नंबर, नाम पता, बैंक खाता संख्या और शिकायत का टाइप आदि दर्ज करना होगा।
पीपीओ यानी पेंशन पेमेंट ऑर्डर। रिटायर होने वाले कर्मचारियों को तभी पेंशन मिलती है जब सरकार की ओर से इस नंबर को जारी किया जाता है। ऐसे में शिकायत दर्ज करने के लिए पीपीओ की जरूरत होती है। यह 12 अंकों का एक नंबर होता है। अगर फॉर्म में मांगी जाने वाली सभी जानकारी है तो आसानी से फॉर्म भरकर शिकायत को सबमिट कर सकते हैं।


रविवार, 16 अगस्त 2020

लांच हो गई दुनिया की सबसे सस्ती इलेक्ट्रिक बाइक

लांच हो गई दुनिया की सबसे सस्ती इलेक्ट्रिक बाइक



एजेंसी 
नई दिल्ली। सस्ते फोन और सस्ती एलईडी टेलीविजन के बाद अब डिटेल इंडिया ने इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर भारतीय बाजार में लॉन्च कर दिया है। कंपनी का दावा है कि इस इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर से सफर पर महज 20 पैसे प्रति किलोमीटर का खर्च आएगा।
इलेक्ट्रिक व्हीकल का नाम डिटेल ईजी है और कंपनी का दावा है कि यह दुनिया की सबसे किफायती इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर है। यह इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर तीन कलर में उपलब्ध है- पर्ल वाइट, मेटालिक रेड और जेट ब्लैक।
भारतीय बाजार में इससे किफायती इलेक्ट्रिक स्कूटर नहीं है। डेटेल ईजी की कीमत सिर्फ 19,999 रुपये है। कंपनी के मुताबिक यह न सिर्फ खरीदने में सस्ती है, बल्कि इसे चलाने में खर्च भी कम आएगा। आप इसके कंपनी की वेबसाइट से खरीद सकते हैं।
सबसे बड़ी खासियत यह है कि इस इलेक्ट्रिक बाइक को चलाने के लिए लाइसेंस की जरूरत नहीं होगी। इसके अलावा इसे रजिस्ट्रेशन कराने की भी जरूरत नहीं है। कंपनी का कहना है कि यह टू-व्हीलर उन लोगों के लिए भी फायदेमंद साबित होगा, जिन्हें रोजाना कम दूरी की यात्रा करने की आवश्यकता पड़ती है।
एक बार डिटेल ईजी की बैट्री फुल चार्ज हो जाने के बाद इसे 60 किलोमीटर तक चला सकते हैं। इस टू-वीलर की टॉप स्पीड 25 किलोमीटर प्रति घंटा है। इसकी बैट्री 7 से 8 घंटे में फुल चार्ज हो जाती है।
इस इलेक्ट्रिक स्कूटर का वजन करीब 56 किलो है। बैट्री पर तीन साल की वारंटी मिलेगी जबकि इसके मोटर, कंट्रोलर और चार्जर पर एक साल की कंपनी वारंटी दे रही है। कंपनी इसके साथ हेलमेट मुफ्त में दे रही है। इस टू-व्हीकल पर दो लोग सवार हो सकते हैं।
डिटेल ईजी टू-व्हीलर में 6-पाइप नियंत्रित 250 वाट इलेक्ट्रिक मोटर दिया गया है। डिटेल ईजी 48वी 12ए लाइपफ पीओ4 बैटरी दिया गया है। इस टू-वीलर में नॉन रिमूवबल बैटरी बेहतर बैलेंस के लिए वीकल के फ्लोर में दी गई हैं। वहीं एडवांस्ड ड्रम ब्रेक सिस्टम सेफ्टी का पूरा ख्याल रखते हैं।
दिल्ली बेस स्टार्ट-अप कंपनी डिटेल ने इससे पहले 299 रुपये में फीचर फोन और 3999 रुपये में एईडी टीवी लॉन्च की थी। साल 2017 में इस कंपनी की स्थापना हुई थी। ऑनलाइन खरीदने पर 2500 रुपये डिलीवरी चार्ज ग्राहकों को अलग से देना पड़ेगा।


गांव की स्वच्छता से स्वच्छ होगा भारतः वृक्षमित्र डा0 त्रिलोक सोनी

गांव की स्वच्छता से स्वच्छ होगा भारतः वृक्षमित्र डा0 त्रिलोक सोनी



संवाददाता
टिहरी गढ़वाल। स्वच्छ भारत अभियान के तहत राजकीय इंटर कालेज मरोड़ा सकलाना टिहरी गढ़वाल के राष्ट्रीय सेवा योजना स्वयंसेवियों ने एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी वृक्षमित्र डा0 त्रिलोक चंद्र सोनी के नेतृत्व में स्वच्छता अभियान चलाकर सड़कों के किनारे व विद्यालय परिसर में गाजर घास, झाड़ियों की सफाई कर रैली के माध्यम से जन-जन को स्वच्छता के प्रति अपने घरों के आसपास, मौहल्लों, रास्तों तथा गांव की सफाई करने की अपील की गई।
एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी वृक्षमित्र डा0 त्रिलोक चंद्र सोनी ने कहा कि भारत की आत्मा गांव है और गांव की स्वछता से ही भारत को स्वच्छ व सुंदर बनाया जा सकता हैं। उन्होंने कहा कि गांव की स्वच्छता से गंदगी मुक्त भारत की परिकल्पना को साकार किया जा सकता हैं जिसके लिए प्रयास जारी रहना चाहिये।
कार्यक्रम में बीआर शर्मा प्रधानाचार्य, पहल सिंह, नवीन भारती, देवेन्द्र पुंडीर, राजेश कुमार, सतेंद्र सिंह, रोहित सिंह व अन्य सम्मलित हुए।


शुक्रवार, 14 अगस्त 2020

बलीन्द्र सेकिया की रिहाई और पुरुषोत्तम शर्मा को साजिशन फंसाने के खिलाफ राष्ट्रव्यापी विरोध दिवस

बलीन्द्र सेकिया की रिहाई और पुरुषोत्तम शर्मा को साजिशन फंसाने के खिलाफ राष्ट्रव्यापी विरोध दिवस



संवाददाता
लालकुआं। भाकपा माले केंद्रीय कमेटी सदस्य व अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय सचिव असम के युवा नेता कामरेड बलिन्द्र सेकिया की रिहाई और अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय सचिव व विप्लवी किसान संदेश पत्रिका के संपादक कामरेड पुरुषोत्तम शर्मा को दिल्ली पुलिस द्वारा दिल्ली दंगों की एफआईआर में पफांसने व पूछताछ के नाम पर 8 घण्टे बिठाए रखने के खिलाफ भाकपा-माले और अखिल भारतीय किसान महासभा ने राष्ट्रव्यापी विरोध दिवस मनाया।
कामरेड बलीन्द्र सेकिया को असम के डिब्रूगढ़ जिले के आवास से उन्हें 5 दिन पहले गिरफ्रतार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया है। असम में सीएए विरोधी आंदोलन के प्रमुख कार्यकर्ता कामरेड बलीन्द्र सेकिया इन दिनों एक सड़क निर्माण परियोजना में जमीन गंवा चुके किसानों के लिए मुआवजे के सवाल पर आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे।
प्रदर्शनकारियों के मुताबिक कुछ दिन पूर्व असम में कार्यरत पार्टी केंद्रीय कमेटी के एक अन्य सदस्य कामरेड बिबेक दास को विश्वनाथ जिले के चाय बागान मजदूरों व गरीबों की हालत पर महज एक फेसबुक पोस्ट लिखने को जुर्म बताकर मुकदमा दर्ज करते हुए उनका फोन जब्त कर लिया गया। उनके अनुसार यह स्पष्ट तौर पर भाजपा सरकार द्वारा संविधान व मेहनतकशों के अधिकार के लिए उठने वाली आवाजों के देशव्यापी दमनचक्र का हिस्सा है। भाकपा-माले और अखिल भारतीय किसान महासभा ने इस राष्ट्रव्यापी विरोध दिवस पर मांग है कि असम सरकार अखिल गगोई व बलीन्द्र सेकिया जैसे नेताओं का दमन बंद करे। कामरेड बलीन्द्र सेकिया को अविलंब बिना शर्त रिहा करे व उनके हमलावरों की गिरफ्रतारी हो।
इसी तरह दिल्ली पुलिस द्वारा किसान महासभा के राष्ट्रीय सचिव और विप्लवी किसान संदेश के संपादक कामरेड पुरुषोत्तम शर्मा को सीसीए विरोधी आंदोलनों का समर्थन करने के कारण साजिशन दिल्ली दंगों की साजिश वाले मुकदमे से जोड़ने की निंदा की है। इसी सिलसिले में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने कामरेड पुरुषोत्तम शर्मा को 8 अगस्त को 8 घण्टे तक लोधी कालोनी थाने स्थित कार्यालय में पूछताछ के नाम पर बिठाए रखा। 
दोनों संगठनों ने मांग की कि दिल्ली पुलिस दिल्ली दंगों को भड़काने वाले भाजपा नेताओं के खिलापफ मुकदमा दर्ज करे और सीएए विरोधी लोकतांत्रिक आंदोलन से जुड़े या उसे समर्थन करने वाले कार्यकर्ताओं के नाम साजिशन दिल्ली दंगों की एपफआईआर से जोड़ने पर रोक लगाए। देश के विभिन्न राज्यों में भाकपा-माले व किसान महासभा के नेताओं, कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया।


सीआईपीएल फाउंडेशन ने टैब और शिक्षण सामग्री वितरित की

सीआईपीएल फाउंडेशन ने टैब और शिक्षण सामग्री वितरित की



फाउंडेशन ने गांव के 20 मेधावी कालेज छात्रों को टैबलेट दिया 
देहरादून। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर गैर सरकारी संस्था सीआईपीएल फाउंडेशन की ओर से मेधावी छात्रों को टैब और शिक्षण सामग्री दी गई। संस्था के इस काम में ग्राम पंचायत कोटी मयचक थानो ने भी सहयोग किया। ये कार्यक्रम माता बालासुंदरी मंदिर के प्रांगण में किया गया। फाउंडेशन ने गांव के 20 मेधावी कालेज छात्रों को टैबलेट दिया ताकि ये बच्चे कोरोना काल में आन लाइन शिक्षा हासिल करने में पिछड़ ना जायें। इसके अलावा संस्था की ओर से करीब 150 परिवारों को कोरोना किट भी दिए गए जिसमें जूट के बैग में मास्क, सेनेटाइजर, टी-शर्ट, हैंड शाप और डिटाल रखे हुए थे। 
इस मौके पर फाउंडेशन के प्रमुख विनोद कुमार ने कहा कि कोरोना काल में संस्था ने अपनी ओर से जागरुकता फैलाते हुए गांव के ऐसे छात्र-छात्राओं की प्रतिभा को पहचाना है जो जीवन में आगे बढ़ते हुए देश का नाम रोशन करना चाहते हैं। विनोद कुमार ने कहा कि ऐसी मेधावी प्रतिभा को सम्मान स्वरुप संस्था ने अपनी ओर से टेबलेट प्रदान किया है जो कि उनकी उच्च शिक्षा में आगे काम आ सकेगा। संस्था प्रमुख विनोद कुमार ने कहा कि इतना ही नहीं इन बच्चों को संस्था की ओर से भविष्य में भी मदद की जाती रहेगी। 
वहीं कोटी मयचक पंचायत के ग्राम प्रधान रेखा बहुगुणा ने कहा कि संस्था की पहल से हमारे गांव के मेधावी छात्रों को जीवन में आगे बढ़ने का हौसला मिलेगा। 
इस मौके पर सेना से रिटायर्ड लोगों की भी एक टोली आई थी जिन्हें कोरोना किट दिया गया। सीआईपीएल फाउंडेशन से जुड़े लोगों ने गांव के लोगों के बीच कोरोना से बचने के उपाय बताते हुए प्रधानमंत्री की सीख को दोहराते हुए कोरोना के खिलाफ हाथ धोने, डिस्टेंसिंग और मास्क लगाने की अपील की। 
इस मौके पर एसडीओ और गांव के कई गणमान्य लोग मौजूद थे।


नेपाल और भारत आवागमन के लिए पंजीकरण जरूरी!

नेपाल और भारत आवागमन के लिए पंजीकरण जरूरी!



सड़क मार्ग से भारत से नेपाल जाने वाले भारतीयों के लिए यह जरूरी होगा, नेपाल के गृह मंत्री राम बहादुर थापा ने इसकी घोषणा की
प0नि0ब्यूरो
देहरादून। नेपाल सरकार भारत से सड़क मार्ग के जरिए आने वाले भारतीयों के पंजीकरण करने की व्यवस्था करने जा रही है। भले ही चीन के इशारे पर नेपाल ऐसे कदम उठा रहा है लेकिन उसका इसपर कहना है कि कोरोना महामारी को फैलने से रोकने के लिए वह ऐसा करने जा रहा है। साथ ही यह कदम भविष्य के लिए भी दोनों देशों की सीमा सुरक्षा के लिहाज से अच्छा होगा।
गौर हो कि नेपाल-भारत सीमा सुरक्षा को लेकर कर बैठक बुलाई गई थी। नेपाल के गृह मंत्री राम बहादुर थापा ने उसमें अपनी बात रखी। वैसे भी कोई भारतीय नेपाल जाता है तो आईडी कार्ड दिखाने की जरूरत पड़ती है लेकिन पंजीकरण नही करना होता था। विदेश से आने वालों पर नेपाल में 24 मार्च से ही पाबंदी लगी हुई है। 
नेपाल का मानना है कि भारत से नेपाल आ रहे लोगों की वजह से वहां कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं इसलिए कई संगठनों ने सरकार से ऐसे लोगों की आवाजाही को नियंत्रित करने की मांग की। जबकि बहुत से लोग ऐसा मानते है कि नेपाल चीन को खुश करने केलिए यह सब कर रहा है। 
भारतीयों के पंजीकरण के फैसले के बाद नेपाल जा रहे भारतीयों को अपने नेपाल जाने का कारण लिखित में स्थानीय निगमों को दिखाना अनिवार्य है। हालांकि कोरोना के दौर में दोनों देशों के बीच आने-जाने वालों की संख्या में गिरावट आई है। बता दें कि नेपाल और भारत के बीच आवाजाही के लिए वीजा और पासपोर्ट की जरूरत नहीं पड़ती। ऐसे में पहचान के तौर पर आईडी दिखाने की परंपरा पुरानी है।
जिनको नेपाल का यह फैसला पसंद नहीं आ रहा उनका तर्क है कि नेपाल सरकार अगर कोरोना के नाम पर ये कर रही है तो उसे भारत से नेपाल जाने आने वाले नेपालियों का भी पंजीकरण करना चाहिए, केवल भारतीयों का नहीं क्योंकि कोरोना तो कोई भी फैला सकता है।
केवल भारतीयों से आईडी कार्ड मांगने और पंजीकरण की बात हो रही है तो ये टारगेट के तौर पर किया जा रहा है। खासकर तब जबकि दोनों देशों के बीच रिश्ते ठीक नहीं चल रहे।


रौबदार शख्शियत के आगोश में एक सौम्य हृदय इंसान थे ठाकुर सुक्खन सिंह

संस्मरणः रौबदार शख्शियत के आगोश में एक सौम्य हृदय इंसान थे ठाकुर सुक्खन सिंह



पवन नारायण रावत
गंगोलीहाट। हा, हा हा हा...हा....। तेज ठहाकों की आवाज इशारा कर रही थी कि अपनेपन के अधिकार के साथ ठाकुर साहब पधार रहे हैं।
आइये आइये आइये साहब, अबके कई महीने बाद दर्शन दिये हैं। उनका स्वागत करते हुए उन्हें सम्मान सहित बैठने का आग्रह करता हूं। जिसे सहर्ष स्वीकार करते हुए वे अपना झोला उतारकर सामने एक तरपफ रखते हुए तसल्ली से बैठते।
अरे साहब, आपकी चाय का स्वाद दिमाग से उतर रहा था और आपके पड़ोस से गुजर रहा था तो सोचा चलो आज ही स्वाद ताजा कर लें। चेहरे पर मुस्कुराहट लाते हुए ठाकुर साहब बोले। वैसे भी आप अगर हमें देख लेते तो पिफर आर्डर पहले ही दे देते। और हमारी खैर भी नहीं होती। ठहाका लगाते हुए पिफर से ठाकुर साहब बोल पड़े। उनके आदेश में उनका स्नेह छिपा था। जिसे वे चेतन भाई के साथ समय-समय पर हमारे कार्यालय आकर हमसे साझा किया करते।
ठाकुर साहब से परिचय पत्राकार मित्रा चेतन जी के माध्यम से हुआ। पर एक मुलाकात में ही वे दिल के करीब हो चले थे। रौबदार चेहरा, बड़ी बड़ी मंूछें, करीने से सजे संवरे बाल, नाक पर टिका शानदार चश्मा। कंधे के एक छोर से कमर के दूसरे छोर तक टिका काले रंग का थैला। जिसमें कई खाने थे। इसमें उनका कैमरा एवं अन्य सामान रहता था। उनके चेहरे पर एक रौबदार मुस्कान, जो वास्तव में उनके व्यक्तित्व का असल चेहरा थी। अक्सर खिली रहती। रौबदार शख्सियत के आगोश में एक सौम्य हृदय इंसान थे ठाकुर सुक्खन सिंह।
उम्र में हमसे दुगुने रहे हों। पर मजाल है कि उनकी तरह जोश, उमंग और उत्साह हम अपने कार्य में दिखा पाते। उनके जैसी कर्मठता तो आज तक भी एक लक्ष्य की भांति ही है। आप इस उम्र में इतनी कड़ी धूप में आखिर इतनी भागदौड़ कर क्यों रहे हैं? जर्नलिस्ट यूनियन आपफ उत्तराखंड की देहरादून इकाई के अध्यक्ष रहे ठाकुर साहब से सवाल दागकर जब भी मैं उत्तर आने का इंतजार करता, तब तक वे कुर्सी पर बैठे-बैठे एक गहरी नींद के झोंके से वापस आ चुके होते।
भाई साहब, इतनी कड़ी धूप में शहर का चक्कर लगाने के बाद आपकी चाय पीने का जो आनन्द है, उसका मजा सिपर्फ मैं ही ले सकता हूं। चाय की चुस्की और मासूम मुस्कान के साथ उनका जवाब होता। पिफर बातों-बातों में ओएनजीसी में अपने कार्यकाल से जुड़े कई यादगार किस्से बड़े चाव से सुनाते। उससे भी अधिक तन्मयता से हम सुनते। अपनी इसी किस्सागोई के दौरान ही वे प्रिंटिंग प्रेस में प्रयोग किये जाने वाले विभिन्न क्रियाकलाप एवं उनमें उनके लम्बे अनुभव के बारे में भी बताते। जिस कारण वे हमेशा अपने सेवाकाल में महत्वपूर्ण कार्यों से अक्सर ही घिरे रहते।
बेहद सरल व्यक्तित्व के धनी ठाकुर साहब सदैव युवाओं की मदद को तत्पर रहते। अपने वार्तालाप में अक्सर इसका जिक्र करते। एक बार सुबह-सुबह मुझसे नये कार्यालय में मिलने आये। थैले से डायरी, कैलेंडर और एक थैला निकालकर मेरे हवाले किया और कंघी से बाल बनाते हुए बोले, हम तो दुनिया को कैमरे में कैद करते हैं। बचकर जाओगे कहां? और अब तो आप हमारे घर के नजदीक आ गये हो। अब तो रोज सुबह मुलाकात होगी। इतने में एक मित्रा ने उनके कैलेंडर की तारीपफ की तो अपने थैले से निकलकर एक टेबल कैलेंडर उन्हें भी दे दिया। मित्रा प्रसन्न हुआ और ठाकुर साहब संतुष्ट। कहा अगले दिन पिफर आऊंगा, अब तो पड़ोसी हूं।
एक दिन चेतन जी ने बताया कि वे ओएनजीसी के नजदीक ही एक सड़क दुर्घटना का शिकार हो गये हैं। कापफी लम्बे समय तक अपनी बाहरी दिनचर्या से दूर रहे। मुलाकात सिपर्फ उनकी खबरों तक सीमित रही जो चेतन जी के मापर्फत ही प्राप्त हो पातीं। लम्बे समय बाद एक बार सिपर्फ पफोन पर ही बात हो पायी। चाय जरूर पियूंगा, अरे हुज़ूर, आपको ऐसे ही थोड़े छोड़ेंगे। जल्द आऊंगा। पफोन पर यही आखिरी बातचीत उनसे हुई।
समय बीतता गया। ना मेरा पुराना आपिफस रहा, ना मैं उनका पड़ोसी। सिपर्फ अब वे हमारे ग्रुप एडमिन रह गये थे। ठाकुर की खबर के मापर्फत। लम्बे समय तक बद्री विशाल के छायाकार रहे। हमारे संगठनात्कम कार्यक्रम में भी विशेष रूप से शामिल रहते। कार्यक्रम तो जो कवर करते, सो करते। मेरी जरूर दो चार पफोटो हमेशा अलग से खींच देते। वे उम्र के पाबंद कभी नहीं रहे। यही कारण रहा कि उनके परिचितों और दोस्तों का खजाना हमेशा समृ( रहा। यही सीख हमें भी हंसते मुस्कुराते सिखा गये। उनकी उदार सोच के लैंस का कैनवास इतना बड़ा था कि उसमें सभी के लिये अपनेपन के खुशनुमा रंग भरे पड़े थे।
12 अगस्त 2020 को प्रातःकाल करीब 76 वर्ष की आयु में लंबी बीमारी के उपरान्त वे अनन्त यात्रा पर चल दिये। परिजनों के साथ उनके चाहने वाले अपनों के लिये यह अपूर्णनीय क्षति है। यादों के सुनहरे कैनवास पर अपनी सौम्य मुस्कान के साथ सदैव हम सबकी स्मृतियों में बने रहेंगे, ठाकुर साहब!
(पर्वतीय निशान्त टीम)


गुरुवार, 13 अगस्त 2020

वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर सुक्खन सिंह के निधन पर पत्रकारों ने जताया शोक 

वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर सुक्खन सिंह के निधन पर पत्रकारों ने जताया शोक 



संवाददाता
देहरादून। जर्नलिस्ट यूनियन आफ उत्तराखंड़ के नेहरू कालोनी स्थित कैम्प कार्यालय में वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर सुक्खन सिंह के निधन पर पत्रकारों व विभिन्न पत्रकार संगठनों ने आज शोक प्रकट कर उन्हें श्रदांजलि अर्पित की।
जर्नलिस्ट यूनियन आफ उत्तराखंड़ की देहरादून ईकाई के अध्यक्ष चेतन सिंह खड़का ने ठाकुर साहब के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे एक कर्मठ व नेक दिल इन्सान थे। वे भले ही हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनकी यादें चिरस्मरणीय रहेगी। वरिष्ठ पत्रकार संजीव शर्मा ने कहा कि ठाकुर साहब की उर्जा और पत्रकारिता के प्रति समर्पण सदैव प्रेरक रहेंगे। उनके जैसी शख्सियत का जाना पत्रकारिता के लिए अपूर्णीय क्षति है।
आईजेयू के नेशनल काउंसलर गिरीश पंत ने कहा कि ठाकुर साहब लंबे समय तक छायाकार के तौर पर दैनिक बद्री विशाल से जुड़े रहें। इस दौरान उनका काम के प्रति समर्पण का जज्बा रहा वो किसी मिसाल से कम नहीं रहा। उन्होंने यूनियन को आगे बढ़ाने में उल्लेखनीय योगदान दिया। पत्रकार संदीप शर्मा ने कहा कि ठाकुर साहब हर व्यक्ति से जुड़ जाते थे और वरिष्ठ होने के बावजूद उनका व्यवहार मित्रवत होता था।
यूनियन के महामंत्री उमा शंकर प्रवीण मेहता ने कहा कि ठाकुर साहब का जाना पत्रकारिता एवं यूनियन दोनों के लिहाज से बड़ी क्षति है। यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष अरूण प्रताप सिंह ने ठाकुर साहब के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि यूनियन इस दुख की धड़ी में शोक संतप्त परिवार के साथ है।
वहीं उत्तराखंड़ संपादक एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार एसपी सभरवाल ने कहा है कि वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर सुक्खन सिंह के निधन से हम सब बेहद दुखी हैं। एसोसिएशन के सभी सदस्य  ईश्वर  से उनकी आत्मा को शान्ति प्रदान करने की प्रार्थना करते हैं। वरिष्ठ पत्रकार एवं शिवालिक ब्लिट्ज के संपादक जगमोहन सेठी ने भी ठाकुर साहब के देहावसान पर दुख प्रकट करते हुए इसे अपूर्णीय क्षति बताया है।
 वहीं अल्मोड़ा से वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश पंत, वरिष्ठ पत्रकार एवं विज्ञापन अनुश्रवण समिति के अध्यक्ष राजेन्द्र जोशी, कैलाश पांड़े, चंपावत से नारायण भट्ट, टिहरी गढ़वाल से गोविन्द सिंह पुण्डीर, जोशीमठ से प्रकाश कपरूवाण, डोईवाला से विजय शर्मा समेत प्रदेश के कई पत्रकारों ने शोक संवेदनाएं प्रकट की है।
शोकसभा में प्रदेश कोषाध्यक्ष ललिता बलूनी, वीरेन्द्र दत्त गैरोला, मोहम्मद खालिद, चौतराम भट्ट, एसपी उनियाल, विरेश कुमार, त्रिलोक पुण्डीर, अवनीश गुप्ता, धनराज गर्ग समेत यूनियन के अन्य पदाधिकारी शामिल थे।


केंद्रीय कर्मचारियों को मिलेगा पे प्रोटेक्शन का लाभ

केंद्रीय कर्मचारियों को मिलेगा पे प्रोटेक्शन का लाभ



प0नि0ब्यूरो
देहरादून। केंद्रीय कर्मचारियों के लिए केन्द्र सरकार ने एक बड़ा फैसला किया है। सरकार के इस फैसले के अनुसार सातवें वेतन आयोग की सिफारिश के आलोक में केंद्रीय कर्मचारियों को वेतन सुरक्षा मुहैया करायी जाएगी। कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग ने एक कार्यालय ज्ञापन जारी किया है। यह केंद्र सरकार के कर्मचारियों को वेतन की सुरक्षा को लेकर है।
इसके तहत सातवें वेतन आयोग के परिदृश्य में केंद्र सरकार में सीधी भर्ती के जरिए अलग सेवा या कैडर में नये पद पर नियुक्ति होने के बाद सरकार के कर्मचारी को वेतन की सुरक्षा रहेगी। यह सातवें वेतन आयोग के एफआर 22-बी(1) के तहत मिलेगा।
मंत्रालय की ओर से जारी ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि सातवें सीपीसी की रिपोर्ट और सीसीएस (आरपी) नियम 2016 के लागू होने पर राष्ट्रपति को एफआर 22-बी (1) के अंदर किए गए प्रावधानों के तहत केंद्र सरकार के कर्मचारियों को वेतन की सुरक्षा की इजाजत दी है, जिनकी दूसरी सेवा या कैडर में प्रोबेशनर के तौर पर नियुक्ति हुई है, चाहे उनके पास ज्यादा जिम्मेदारी होती हो या नहीं। यह आदेश 1 जनवरी 2016 से प्रभावी है।
ज्ञापन में कहा गया है कि एफआर 22-बी (1) के तहत वेतन सुरक्षा को लेकर मंत्रालयों या विभागों से मिले कई संदर्भ के बाद इसकी जरूरत महसूस हुई कि केंद्र सरकार के कर्मचारी जो तकनीकी तौर पर इस्तीफा देने के बाद केंद्र सरकार की अलग सेवा या कैडर में नए पद पर सीधी भर्ती से नियुक्त होते हैं, उन्हें सातवें वेतन आयोग के तहत वेतन निर्धारित करने के लिए दिशानिर्देश जारी किए जाएं।
एफआर 22-बी (1) के प्रावधानों में दिया गया है कि ये नियम उस सरकारी कर्मचारी के वेतन को लेकर हैं, जो दूसरी सेवा या कैडर में प्रोबेशनर नियुक्त हुआ है और उसके बाद उस सेवा में कन्फर्म किया गया है कि प्रोबेशन की अवधि के दौरान वह न्यूनतम टाइम स्केल पर वेतन निकालेगा या सेवा या पद की प्रोबेशनरी स्टेज पर निकासी करेगा। इसके साथ ही प्रोबेशन की अवधि के खत्म होने के बाद सरकारी कर्मचारी का वेतन सेवा के टाइम स्केल में या पद में तय किया जाएगा। इसे नियम 22 या नियम 22-सी को देखते हुए किया जाएगा।


बरसात के मौसम को न बनने दें सेहत का दुश्मन

बरसात के मौसम को न बनने दें सेहत का दुश्मन



इस मौसम में ऐतिहात बरतने पर नही होंगे नमी, उमस और त्वचा संबंधी रोग
प0नि0डेस्क
देहरादून। बरसात से गर्मी और उमस से राहत मिलती है। प्रकृति भी इस मौसम में अपने पूरें रंग में आ जाती है। जिससे ध्रती पर नवजीवन का संचार दिखाई देता है। लेकिन यह तरंग और उमंग सेहत के लिहाज से हम पर भारी पड़ने लगता है। क्योंकि बरसात के मौसम में होने वाले संक्रमणों या बीमारियों की चपेट में चुटकियों में आ जाता हैं।
बरसात के दिनों में खूब बारिश होती है। इससे जहां मौसम खुशगवार लगता है वहीं जगह-जगह जल भराव और कीचड़ से परेशानी भी बढ़ जाती है। वहीं इन दिनों नमी, उमस और प्रदूषण के कारण लोग बीमार भी पड़ जाते है। इस मौसम में खुजली, त्वचा के लाल होने, पफुंसी और पफंगल इंफेक्शन के कारण लोग मुसीबत भी झेलते है।
इस मौसम में त्वचा की देखभाल की विशेष जरूरत होती है। थोड़ी सी लापरवाही भी शरीर पर भारी पड़ सकती है। कोविड-19 के कारण अस्पतालों और दूसरी स्वास्थ्य सेवाओं पर जिस तरह का दबाव है, उसमें इन दिनों किसी अन्य बीमारी का इलाज कराना खासा कठिन काम है। इसलिए हम यदि खुद से पहल करें और कुछ जरूरी सावधनी बरतें तो इन परेशानियों से बच सकते हैं।
स्वास्थ्य के लिहाज से बरसात के मौसम में स्वास्थ्य संबंधी कई तरह की परेशानियां आम बात है। इसलिए जरूरी है कि हम स्वास्थ्य को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही न बरतें। इन दिनों खानपान में अनियमितता, पोषक तत्वों की कमी और अधिक मात्रा में स्टेरायड के प्रयोग से लोग त्वचा संबंधी अनेक रोगों के शिकार हो जाते हैं। खासतौर से युवाओं में इस तरह की परेशानियां अधिक देखने को मिलती हैं। 
गर्मी और बरसात के दिनों में नमी की वजह से त्वचा या चर्मरोग के मामले बढ़ जाते हैं। इसके अलावा अनियमित आहार, शरीर की साफ-सफाई न रखना, कब्ज या अन्य कोई एलर्जिक कारण से भी इस मौसम में त्वचा संबंधी कई बीमारियों के शिकार हो सकते हैं।
बारिश के दिनों में नमी, उमस और पसीने के कारण त्वचा पफीकी और नीरस हो जाती है। युवा त्वचा की चमक बढ़ाने के लिए किसी भी मेडिकल स्टोर से कोई भी क्रीम लेकर लगा लेते हैं। दुकान वाले भी कमाई के चक्कर में दवा दे देते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि किसी भी दवा या क्रीम से प्राकृतिक त्वचा में बदलाव नहीं आता है। खानपान का ध्यान रखें तो निश्चित रूप से त्वचा स्वस्थ रहती है। इसलिए अनावश्यक रूप से दवाओं खास तौर से स्टेरायड युक्त किसी भी क्रीम के प्रयोग से बचें।
त्वचा संबंधी रोगों से बचने के लिए नियमित तौर पर शरीर की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। नियमित तौर पर स्नान के साथ ध्यान रखें कि शरीर को पूरी तरह सूखने देने के बाद कपड़े पहनें। खाने में संतुलित आहार और मौसमी पफल जरूर शामिल करें।
इस मौसम में पत्तेदार सब्जियों, उड़द की दाल और तली-भुनी चीजों के प्रयोग से बचें। खाने में सलाद को शामिल करना अच्छा रहेगा। डाक्टर की सलाह के बिना कोई भी दवा या मलहम का इस्तेमाल न करें। सुबह उठने के बाद दो से तीन गिलास गुनगुना पानी पीने के 10-15 मिनट बाद शौच जाएं। सिंथेटिक कपड़ों को छोड़ सूती या खादी के कपड़े पहनें। 


मंगलवार, 11 अगस्त 2020

रसोई की आयली और चिपचिपी टाइल्स को चमकाए

रसोई की आयली और चिपचिपी टाइल्स को चमकाए



प0नि0डेस्क
देहरादून। घर के कुछ कोने और चीजें हैं जिन्हें समय-समय पर साफ नहीं किया जाता। खासकर जब बात हो रसोईघर की टाइल्स की। खाना बनाने के दौरान कई बार तेल और सब्जी के मसाले आदि के छींटे टाइल्स पर लग जाते हैं। यह रसोई की खूबसूरती को कम करते है। लेकिन कुछ ऐसे उपाय हैं जिससे रसोई की टाइल्स पर जमी तैलीय परत को कम मेहनत और कम समय में हटा सकते हैं।
इसके लिए दो कप सिरका और दो कप पानी का घोल बना लें। इसे एक स्प्रे बोतल में भर कर रसोई की टाइल्स पर छिड़के और कपड़े की मदद से इसे साफ कर लें। गंदगी को साफ करने के लिए ब्लीच और पानी एक समान मात्रा में लेकर घोल बना लें। सर्कुलर मोशन में टाइल्स पर लगाएं। इसके बाद किसी सूखे कपड़े से टाइल्स को पोंछ लें। 
टाइल्स पर दाग की परत मोटी है तो बेकिंग सोडा पेस्ट का इस्तेमाल करना चाहिए। इसके लिए बेकिंग सोडा के साथ पानी मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बना लें। अब दाग वाली जगह पर लगाकर 10 से 15 मिनट के लिए छोड़ दें। इसको गीले कपड़े की मदद से पोंछ सकते हैं।


ग्रेच्युटी पाने के लिए नहीं करना होगा इंतजार!

ग्रेच्युटी पाने के लिए नहीं करना होगा इंतजार!



केंद्रीय कर्मचारियों को ग्रेच्युटी पाने के लिए अब नहीं करना होगा 5 साल तक इंतजार
एजेंसी
नई दिल्ली। केंद्र सरकार के अधीन काम करने वाले केंद्रीय कर्मचारियों के लिए एक राहत भरी खबर है। सरकार की ओर से केंद्रीय कर्मचारियों की ग्रेच्युटी भुगतान के निम्नतम पात्रता शर्तों में जल्द ही ढील दी जा सकती है। अगर सरकार की यह योजना सिरे चढ़ जाती है तो सरकारी कर्मचारियों को ग्रेच्युटी के लिए अब पांच साल तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा बल्कि उन्हें एक से तीन साल के अंदर ही इसका लाभ मिल सकता है।
खबरों के अनुसार श्रम पर गठित संसदीय समिति ने ग्रेच्युटी भुगतान को लेकर तैयार रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया है कि ग्रेच्युटी भुगतान की पात्रता की समय सीमा को पांच साल से घटाकर एक साल किया जाना चाहिए। बता दें कि किसी कर्मचारी को किया जाने वाला ग्रेच्युटी भुगतान कंपनी में कर्मचारी के काम करने के साल के आधार पर प्रति साल 15 दिन की सैलरी के आधार पर किया जाता है। यह भुगतान कर्मचारी के किसी कंपनी में लगातार 5 साल पूरे होने के बाद ही मिलता है।
अंग्रेजी के एक अखबार में सूत्रों के हवाले से प्रकाशित खबर में लिखा गया है कि ग्रेच्युटी भुगतान के पात्रता की समय-सीमा को घटाने की लगतार मांग को देखते हुए इस बात पर विचार किया जा रहा है कि इसकी पांच साल की समय सीमा को घटाने पर विचार किया जा सकता है। कर्मचारी संघों और यूनियनों का दावा है कि कुछ कंपनियां खर्च घटाने के लिए अपने कर्मचारियों को ग्रेच्युटी भुगतान की पात्रता प्राप्त करने के पहले काम से निकाल रही हैं।
दूसरी ओर विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रेच्युटी के लिए किसी कंपनी में लगातार पांच साल काम करने की सीमा अब पुरानी हो गयी है। नौकरियों के बदलते स्वरूप की वजह से इसमें बदलाव करने की जरूरत है। किसी कंपनी में लगातार पांच साल तक काम करने की सीमा दशकों पहले लंबी अवधि की कार्यप्रणाली विकसित करने के लिए निर्धारित की गयी थी। अब परिस्थितियां और काम का माहौल बदल गए हैं। ग्रेच्युटी के लिए किसी कंपनी में लगातार 1 साल काम करने की सीमा सही नहीं होगी, इसके लिए 2-3 साल की सीमा तय करना सही विकल्प होगा।तक काम करने की सीमा दशकों पहले लंबी अवधि की कार्यप्रणाली विकसित करने के लिए निर्धारित की गयी थी। अब परिस्थितियां और काम का माहौल बदल गए हैं। ग्रेच्युटी के लिए किसी कंपनी में लगातार 1 साल काम करने की सीमा सही नहीं होगी, इसके लिए 2-3 साल की सीमा तय करना सही विकल्प होगा।


सोमवार, 10 अगस्त 2020

कविता : धुरपुलि....

धुरपुलि....



- पवन नारायण रावत


कोई आता है 
कोई जाता है 
          रूकता कोई नहीं
सब व्यस्त हैं  
इधर से उधर 
यहाँ से वहाँ 
           सुनता कोई नहीं 
जिसने भी लिया 
यहीं से लिया 
और 
बन गया 
जिसने भी दिया 
यहीं पे दिया 
और 
चला गया 
न कोई लेकर आया 
न कोई लेकर गया 
और 
कोई ऐसा
कर भी नहीं सकता
जो भी आयेगा
एक घेरे में आयेगा
कहाँ से
              नहीं मालूम
जो भी जायेगा
घेरा तोड़कर जायेगा
कहाँ 
               नहीं मालूम
जो कुछ है 
सिर्फ और सिर्फ 
इस घेरे के अन्दर है 
सवाल ये है 
के आखिरकार 
ये किसकी रचना है 
कौन है 
जो सब कुछ 
जानते हुए भी
इस घेरे से 
                  बाहर है 
मुझे लगता है 
वो जो भी है 
वही सब कुछ है 
वह सब कुछ जानता है 
और 
इस संसार की 
धुरपुलि पर 
तसल्ली से बैठा रहता है 
और 
ध्यान से 
देखता रहता है 
कि 
कोई आता है 
कोई जाता है 
रूकता कोई नहीं
सब व्यस्त हैं 
इधर से उधर 
यहाँ से वहाँ 
सुनता कोई नहीं !


कविता संग्रह - उम्मीद की नदी / 2015 में  प्रकाशित गढ़वाली कविता का हिन्दी वर्जन


जन्माष्टमी कब मनाई जाएगी!

जन्माष्टमी कब मनाई जाएगी!



पं0 चैतराम भट्ट
देहरादून। जन्माष्टमी का त्योहार देशभर में धूमधाम से मनाया जाता है। हालांकि इस साल भी कृष्ण जन्माष्टमी की तिथि को लेकर लोगों के बीच उलझन बनी हुई है। देशभर के कुछ हिस्सों में 11 अगस्त को कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जा रही है तो वहीं कुछ अन्य हिस्सों में जन्माष्टमी का त्योहार 12 अगस्त को मनाया जा रहा है। दरअसल, माना जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद यानी कि भादो माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को हुआ था, जो इस साल 11 अगस्त को है. 
माना जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद यानी भादो महीने की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इस वजह से यदि अष्टमी तिथि के हिसाब से देखा जाए तो 11 अगस्त को जनमाष्टमी होनी चाहिए लेकिन रोहिणी नक्षत्र को देखें तो 12 अगस्त को कृष्ण जन्माष्टमी होनी चाहिए। ऐसे में कुछ लोग 11 तो वहीं कुछ अन्य 12 अगस्त को कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहा मनाएंगे। मथुरा में 12 अगस्त को जन्माष्टमी मनाई जाएगी. 
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है और इसे हिंदुओं के प्रमुख त्योहारों में से एक माना जाता है। माना जाता है कि सृष्टि के पालनहार श्री हरि विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में आठवां अवतार लिया था। देश के सभी राज्यों में अलग-अलग तरीके से इस त्योहार को मनाया जाता है।
इस दिन बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक सभी लोग अपनी श्रद्धानुसार दिनभर व्रत रखते हैं और भगवान कृष्ण की महिमा का गुणगान करते हैं। दिनभर घरों और मंदिरों में भगवान कृष्ण के भजन कीर्तन चलते हैं। वहीं मंदिरों में झांकियां भी निकाली जाती हैं।


आत्म-निर्भर भारत पहल के लिए रक्षा मंत्रालय की बड़ी कोशिश

आत्म-निर्भर भारत पहल के लिए रक्षा मंत्रालय की बड़ी कोशिश



रक्षा उत्पादन के स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने के लिए दी गई समयसीमा के बाद 101 वस्तुओं पर आयात प्रतिबंध
प0नि0ब्यूरो
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खुद पर आत्मनिर्भर भारत निर्माण के लिए ‘आत्म-निर्भर भारत’ नाम से एक विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा की थी। प्रधानमंत्री के इस आह्वान से प्रेरणा लेते हुए सैन्य मामलों के विभाग (डीएमए), रक्षा मंत्रालय (एमओडी) ने 101 वस्तुओं की एक सूची तैयार की है, जिनके आयात के लिए निर्धारित समय सीमा के बाद उनके आगे के आयात पर प्रतिबंध होगा।
यह रक्षा क्षेत्रा में आत्म-निर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह भारतीय रक्षा उद्योग को भविष्य में सशस्त्रा बलों की जरूरतों को पूरा करने के लिए अपने स्वयं के डिजाइन और विकास क्षमताओं का उपयोग करके या रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा डिजाइन और विकसित प्रौद्योगिकियों को अपनाकर नकारात्मक सूची में शामिल वस्तुओं का निर्माण करने के लिए एक बड़ा अवसर प्रदान करेगा।
रक्षा मंत्रालय ने भारत में विभिन्न गोला-बारूद, हथियारों, प्लेटफार्मों, उपकरणों के निर्माण के लिए भारतीय उद्योग की मौजूदा और भावी क्षमताओं का आकलन करने के लिए यह सूची सेना, वायु सेना, नौसेना, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ), रक्षा सार्वजनिक क्षेत्रा के उपक्रमों (डीपीएसयू), आयुध निर्माण बोर्ड (ओएफबी) और निजी उद्योग सहित सभी हितधारकों के साथ कई दौर की मंत्रणा के बाद तैयार की है।
सेना के तीनों अंगों द्वारा अप्रैल 2015 से अगस्त 2020 के बीच लगभग 3.5 लाख करोड़ रुपये की अनुमानित लागत पर ऐसी वस्तुओं की लगभग 260 योजनाओं को अनुबंधित किया गया था। 101 वस्तुओं के आयात पर नवीनतम प्रतिबंध के साथ, यह अनुमान है कि अगले 5 से 7 वर्षों के अंदर भारतीय उद्योगों के साथ लगभग चार लाख करोड़ रुपये के अनुबंध होंगे। इनमें से लगभग 1,30,000 करोड़ रुपये की वस्तुएं थल सेना और वायु सेना दोनों के लिए अनुमानित हैं, जबकि नौसेना के लिए लगभग 1,40,000 करोड़ रुपये की वस्तुओं के अनुबंध का अनुमान लगाया जाता है।
आयात पर प्रतिबंध लगाई जाने वाली इन 101 वस्तुओं की सूची में न केवल हल्की वस्तुएं शामिल हैं, बल्कि आर्टिलरी गन, असाल्ट राइफलें, लड़ाकू जलपोत, सोनार प्रणाली, मालवाहक विमान, हल्के लड़ाकू विमान (एलसीएच), रडार जैसे कुछ उच्च प्रौद्योगिकी हथियार प्रणालियां और हमारी रक्षा सेवाओं की जरूरतों को पूरा करने के लिए कई अन्य वस्तुएं भी शामिल हैं। 
इस सूची में दिसंबर 2021 की सांकेतिक आयात प्रतिबंध के साथ पहियों वाले बख्तरबंद लड़ाकू वाहन (एएफवी) भी शामिल हैं, जिनमें से 5,000 करोड़ रुपये से अधिक की अनुमानित लागत पर सेना को लगभग 200 एएफवी के लिए अनुबंध करने की उम्मीद है। इसी तरह नौसेना दिसंबर 2021 की सांकेतिक आयात प्रतिबंध तिथि के साथ पनडुब्बियों की मांग कर सकती है जिसमें से लगभग 42,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत पर छह पनडुब्बियों के अनुबंध की उम्मीद है। 
वायु सेना के लिए, दिसबंर, 2020 के सांकेतिक आयात प्रतिबंध के साथ हल्के लड़ाकू विमान एलसीए एमके 1ए को सूचीबद्व करने का निर्णय लिया गया है। इनमें से 123 हल्के लड़ाकू विमान एलसीए एमके 1ए के लिए लगभत 85,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत आएगी। इसलिए इन 101 वस्तुओं की सूची में अत्यधिक जटिल वस्तुएं भी शामिल हैं जिनमें से तीन उदाहरणों का विवरण ऊपर दिया गया है।
इन वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध को 2020 से 2024 के बीच धीरे-धीरे लागू करने की योजना है। इस सूची के उद्घोषणा के पीछे का उद्देश्य भारतीय रक्षा उद्योग को सशस्त्र बलों की अपेक्षित आवश्यकताओं के बारे में बताना है ताकि वे स्वदेशीकरण के लक्ष्य को हासिल करने के लिए बेहतर रूप से तैयार हो सकें। रक्षा मंत्रालय ने रक्षा उत्पादन संस्थाओं द्वारा ईज आफ डूइंग बिजनेस को प्रोत्साहित करने और सुविधाएं प्रदान करने के लिए कई प्रगतिशील उपाय अपनाए हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे कि नकारात्मक आयात सूची में शामिल वस्तुओं की कमी दूर करने के लिए उपकरणों का उत्पादन दी गई समय-सीमा में पूरा किया जाए। इसमें रक्षा सेवाओं द्वारा उद्योग के साथ तालमेल बिठाने के लिए एक समन्वित तंत्र भी शामिल होगा।
सैन्य मामलों के विभाग (डीएमए) आगे भी आयात प्रतिबंध के लिए इस तरह के अन्य उपकरणों की सभी हितधारकों के साथ सलाह मशविरा करके पहचान करेगा। इसका एक उचित नोट रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (डीएपी) में भी बनाया जाएगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भविष्य में आयात के लिए नकारात्मक सूची में शामिल किसी भी वस्तु पर कोई प्रक्रिया आगे ने बढ़ सके।
एक अन्य आवश्यक कदम के रूप में रक्षा मंत्रालय ने 2020-21 के लिए पूंजी खरीद बजट को घरेलू और विदेशी पूंजी खरीद मार्गों के बीच विभाजित किया है। चालू वित्त वर्ष में घरेलू पूंजीगत खरीद के लिए लगभग 52,000 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ एक अलग बजट मद बनाया गया है।


रविवार, 9 अगस्त 2020

सीरम देगी 250 रुपये में कोविड टीका

सीरम देगी 250 रुपये में कोविड टीका



एजेंसी
मुंबई। टीका बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट आफ इंडिया (एसआईआई) अल्प एवं मझोले आय वाले देशों के लिए कोविड-19 टीके की 10 करोड़ खुराक बनाएगी। सीरम ने ऐसे देशों के लिए टीके का मूल्य 250 रुपये (प्रति खुराक) रखा है। कंपनी ने इसके लिए बिल ऐंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन और गावी (वैक्सीन अलायंस) के साथ समझौता किया है।
बिल ऐंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन अपने स्टैंटेजिक इन्वेस्टमेंट फंड के जरिये गावी को 15 करोड़ डालर रकम मुहैया कराएगा। गावी यह रकम सीरम को कोविड-19 के संभावित टीके बनाने में वित्तीय सहायता के तौर पर देगी। टीके की कीमत 3 डालर प्रति खुराक होगी और भारत सहित दुनिया के 92 देशों को यह उपलब्ध कराया जाएगा। ये देश गावी के कोवैक्स एडवांस मार्केट कमिटमेंट (एएमएसी)  में शामिल हैं।
कोवैक्स विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ)  द्वारा शुरू की गई पहल है। कोविड-19 टीके का समान रूप से वितरण करने के लिए गावी और कोअलिशन फार एपिडमिक प्रीपेयर्डनेस इन्नोवेशंस कोवैक्स अभियान का प्रबंधन कर रहे हैं। संसाधन जुटाकर और टीका विकास से जुड़े जोखिमों का एक साथ वहन कर इस कार्य को अंजाम दिया जाएगा।
सीरम संबंधित देशों को 3 डालर प्रति खुराक की दर से 10 करोड़ टीके की आपूर्ति करेगी। कंपनी ने आक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका के साथ उनके संभावित टीके एजेडडी1222 के  विनिर्माण के लिए भी समझौता किया है। समझौते के अनुसार एसआईआई ब्रिटेन की कंपनी एस्ट्राजेनेका को एक अरब खुराक की आपूर्ति करेगी। इस तरह एसएसआई इस वर्ष दिसंबर तक भारत में आक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका के टीके की 30 करोड़ खुराक बनाएगी। कंपनी जल्द ही भारत में इस टीके का परीक्षण शुरू करे वाली है।
इस बीच कंपनी ने नोवावैक्स इंक के साथ उसके कोविड-19 के संभावित टीके के विकास और उसकी वाणिज्यक बिक्री के लिए समझौता किया है। समझौते की शर्त के अनुसार भारत में इस टीके का विशेष अधिकार एसआईआई के पास होगा। हालांकि महामारी के दौरान सभी देशों में यह अधिकार एसआईआई के साथ दूसरी इकाइयों के पास भी रहेगा। नोवावैक्स के टीके का तीन चरणों में परीक्षण सितंबर के अंत में शुरू होगा। 
एसआईआई 10 करोड़ खुराक उपलबध कराने के बाद भारत में इसका मूल्य अलग भी तय कर सकती है। कंपनी ने कहा कि गावी और बिल ऐंड मिलिंडा गेट्स पफाउंडेशन के साथ साझेदारी से उसे अग्रिम पूंजी भी मिल जाएगी और उसे अपनी विनिर्माण क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
एसआईआई के मुख्य कार्याधिकारी अदार पूनावाला ने कहा कि कोविड के खिलाफ अभियान तेजी करने की दिशा में प्रयास के तहत सीरम इंस्टीट्यूट ने गावी और बिल ऐंड मेलिंडा गेट्स पफाउंडेशन के साथ समझौता किया है। इसके तहत उनका संस्थान कोविड-19 टीकों की 10 करोड़ खुराक भारत एवं अल्प एवं मध्यम आय वर्ग वाले देशों को वर्ष 2021 में मुहैया कराएगा।


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