गुरुवार, 30 अप्रैल 2020

अरबपतियों के ऋण बट्टे खाते में तो गरीबों के ऋण क्यों नहींः मोर्चा               

अरबपतियों के ऋण बट्टे खाते में तो गरीबों के ऋण क्यों नहींः मोर्चा               



- देश के गरीब किसानों/मझोले व्यापारियों व अन्य लोगों के ऋण बट्टे खाते में क्यों नहीं
- इतने कर्ज से एक करोड़ लोगों के ऋण हो सकते थे माफ 
- गरीब कर्ज न चुकाने के कारण आत्महत्या करने व मानसिक प्रताड़ना का शिकार 
- दुर्भाग्यवश गरीब नहीं ले सकता लंदन में शरण 
- पूर्ववर्ती सरकार भी उठा चुकी ऐसे कदम 
- काश! गरीब भी राजनीतिक दलों को चंदा रूपी रिश्वत दे पाने में होता सक्षम 
संवाददाता
विकासनगर। जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा देश के नामी-गिरामी गरीब अरबपति उद्योगपतियों के ऋण बट्टे खाते/एनपीए (माफ करने की दिशा में उठाया गया कदम) में डालकर निश्चित तौर पर देश को आर्थिक रूप से खोखला करने की दिशा में उठाया गया जबरदस्त कदम है।                 
नेगी ने कहा कि दुर्भाग्य की बात है कि देश का गरीब किसान/मझोला व्यापारी व अन्य गरीब एक-आध लाख रुपए का कर्ज लेकर उसको न चुकाने की स्थिति में आत्मघाती जैसे कदम उठाने को मजबूर है तथा उसका परिवार खौफ के साए में जीता है। अगर कोई किसान/व्यापारी कर्ज लेता है तो बैंक उसकी व जमानत लेने वाले दोनों की संपत्ति को कुर्क कर जेल में डाल देता है तथा वहीं दूसरी ओर अरबपति लोग लंदन जैसे शहरों में शरण लेकर आराम फरमा रहे होते हैं।
नेगी ने कहा कि सरकार द्वारा कल ही 50 गरीब अरबपतियों/उद्योगपतियों/पूंजीपतियों के 68071 करोड रुपए के ऋण लगभग माफ करने की दिशा में कदम उठाया है यानी एक तरह से माफ कर दिए गए हैं। सरकार द्वारा इन उद्योगपतियों के बदले एक करोड़ किसानों/व्यापारियों के कर्ज माफ किए जा सकते थे लेकिन इनके पास राजनीतिक दलों को चंदा रूपी रिश्वत देने को पैसा नहीं है।            
नेगी ने कहा कि पूर्वर्ती सरकार ने भी पूंजीपतियों के कर्ज़ बट्टे खाते/एनपीए में डालकर गलती की थी लेकिन उस सरकार द्वारा गरीब किसानों के कर्ज भी माफ किए गए थे लेकिन वर्तमान केंद्र सरकार को सिर्फ पूंजीपतियों की ही फिक्र है। मोर्चा कर्ज में डूबे किसानों/व्यापारियों व अन्य लोगों से अपील करता है की जागरूक हों।


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कोरोना काल में उपयोगी रोजा, नमाज व जकात

कोरोना काल में उपयोगी रोजा, नमाज व जकात



जानकारी देने वाली पुस्तक निःशुल्क डिजिटल उपलब्ध करायी जा रही 
संवाददाता
काशीपुर। कोरोेना काल में सभी मुसलमानों के लिये अनिवार्य नमाज व रोजा व खाता-पीतों पर अनिवार्य ज़कात की उपयोगिता और बढ़ गयी हैै। इसके सांसारिक फायदों की जानकारी आसान हिन्दी में देने वाली नदीम उद्दीन (एडवोेकेट) द्वारा लिखित पुस्तक आम जनता को निःशुल्क डिजिटल उपलब्ध करायी जा रही जो मोबाइल, टैब या कम्प्यूटर पर पड़ी जा सकती है।
मौलाना अबुल कलाम आजाद अल्पसंख्यक कल्याण समिति (माकाक्स) के केन्द्रीय अध्यक्ष तथा कानूनी व जागरूकता पुस्तकोें के लेखक नदीम उद्दीन एडवोकेट द्वारा लिखित पुस्तक सेहत व खुशहाली के लिये नमाज, रोजा व जकात रीड व्हीयर, युग निर्माता तथा फेसबुक की वेेबसाइट पर निःशुल्क उपलब्ध है तथा 9411547747 पर व्हाट्स एप्प के माध्यम से भी उपलब्ध करायी जा रही हैै। इसे टैब, मोबाइल तथा कम्प्यूटर पर आसानी सेे पढ़ा जा सकता है। 
नदीम ने बताया कि मुसलमानोें ने 1400 साल से अधिक समय से योेग अपना रखा हैै। प्र्रत्येक मुसलमान केे लियेे पांच समय नमाज पढ़ना जरूरी हैै उसमें मुसलमान प्रतिदिन 23 बार वज्रासन करते है। रमज़ान में तराबीह पढ़ने पर यह 10 बार और अधिक हो जाता है। इसके अतिरिक्त नमाज में मुसलमानोें द्वारा भू नमन वज्रासन, दक्षासान, हस्तपदासन तथा सूर्य नमरकार सहित विभिन्न योगासनों की स्थितियां की जाती हैै। नमाज़ के बाद तसबीह में अंगूठेे से अंगुलियों को मिलाकर ध्यान मुद्रा, पृथ्वी मुुद्रा, वरूण मुद्रा तथा आकाश मुद्रा सहित विभिन्न योग मुद्रायें भी स्वतः हो जाती है। इसलिये कोरोेना काल में नमाज इम्युनिटी बढ़ाने में बहुत उपयोेगी है। इसकेे अतिरिक्त रमज़ान केे रोजे शरीर से टॉक्सिन्स निकाल कर शरीर को शुद्ध करते हैै तथा खराब हुये टिश्युओें को पुनः जीवित करने व अंगों केे सुचारू संचालन मेें योगदान करते हैं। 
कोरोेना काल में जब दुनिया बढ़ती गरीबी से जूझ रही है, इसमें जकात जिसमें प्रत्येेक खाता-पीता व्यक्ति अपनी कुल सम्पत्ति का चालीसवां भाग गरीबोें पर खर्च करता है, संसार सेे गरीबी की समस्या से निबटने के लिये वरदान का काम कर सकती हैै।
नदीम नेे रोजा, नमाज़ व जकात के सांसारिक लाभोें को जानने में रूचि रखने वालेे लोगों सेे पुुस्तक पढ़कर अपने विचार देने का अनुरोध किया हैै ताकि अगलेे संस्करणों में औैर सुधार किया जा सके।


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बुधवार, 29 अप्रैल 2020

लॉक डाउन सामान्य होने तक छात्रों की फीस वहन करे सरकार:  मोर्चा     

लॉक डाउन सामान्य होने तक छात्रों की फीस वहन करे सरकार:  मोर्चा                


 - सरकार झूठी उपलब्धियों के विज्ञापनों पर खर्च कर सकती है करोड़ों रुपया, तो इन छात्रों पर क्यों नहीं ! 

- विद्यालयों को लाभ- हानि रहित फार्मूला अपनाकर राहत दे सरकार |    

- पेट्रोल, डीजल, शराब तथा अन्य राजस्व (सरकारी लूट) का अंश जनता को मिलना न्याय संगत | 

- संस्थाओं, कर्मचारियों व जनता से लिया गया दान इस मुहिम में लगाए सरकार |          

- अधिकांश अभिभावक हैं हैंड टू माउथ व किराए के मकानों पर आश्रित | 

- गरीब अभिभावकों के रोजगार की निकट भविष्य में संभावनाएं बहुत कम |    

संवाददाता

विकासनगर। जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व अध्यक्ष रघुनाथ सिंह ने कहा कि सरकार को विद्यालयों की फीस मामले में नो प्रॉफिट, नो लॉस के आधार पर विद्यालय प्रबंधन से वार्ता कर गरीब छात्रों की फीस की भरपाई लॉक डाउन सामान्य होने तक सरकारी खजाने से करनी चाहिए |         

नेगी ने कहा कि प्रदेश के विद्यालयों में कार्यरत  अध्यापकों /स्टाफ में से अधिकांश ऐसे हैं, जोकि विद्यालय द्वारा प्रदत्त वेतन पर ही निर्भर हैं तथा लॉक डाउन की अवधि का वेतन विद्यालय प्रबंधन को चुकाना ही पड़ेगा | ऐसी स्थिति में विद्यालय प्रबंधन मुनाफा न कमा कर अपने अध्यापकों/ स्टाफ की फीस आदि मामले में विचार कर सकते हैं, जिसकी भरपाई  सरकार के खजाने से की जा सकती है |                        

नेगी ने कहा कि सरकार जब अपनी झूठी उपलब्धियों के विज्ञापनों पर प्रतिवर्ष करोड़ों रुपए खर्च कर सकती है तथा डीजल /पेट्रोल/ शराब आदि पर भारी राजस्व (सरकारी लूट) इकट्ठा कर सकती है तो इन दो- तीन महीने की फीस का इंतजाम क्यों नहीं कर सकती |इसके अतिरिक्त कोरोना महामारी में संस्थाओं, कर्मचारियों व जनता से प्राप्त की गई दान की राशि का इस्तेमाल भी इस मुहिम में खर्च किया जा सकता है |                        नेगी ने कहा कि अधिकांश अभिभावक किराए के मकान में रहते हैं तथा व्यवसायिक संस्थानों/ औद्योगिक इकाइयों में कार्य कर  व थोड़ा-बहुत व्यापार कर अपनी आजीविका चलाते हैं, लेकिन लॉक डाउन सामान्य होने व हैंड टू माउथ  वाली स्थिति में इनको बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है तथा  भविष्य में भी करना  पड़  सकता है |

मंगलवार, 28 अप्रैल 2020

कोरोना वारियर्स हैं बिजली कार्मिक

कोरोना वारियर्स हैं बिजली कार्मिक



कोरोना के अंधकार के बीच हमारे घरों को बिजली से रोशन करने वाले 
पवन रावत
गंगोलीहाट। लाकडाउन के दौरान कोरोना वारियर्स इस वैश्विक महामारी से लड़ते हुए अपने कर्तव्य का निर्वाहन कर रहे हैं। मित्रों, ऐसे ही कोरोना वारियर्स हैं, देश भर के बिजली कार्मिक। बिजली कार्मिकों की निरन्तर दिन रात की मेहनत से ही लाकडाउन की अवधि में घरों की चारदीवारी में रहने को मजबूर देशवासियों को बिजली जैसी अति महत्वपूर्ण सेवा प्राप्त हो रही है। उनके समुचित प्रयासों से ही समस्त स्वास्थ्य सेवायें आपात स्थिति में सुचारू हैं। समस्त शासकीय, प्रशासकीय कार्य गतिमान हैं। बैंकिंग सेवा सुचारू है, मीडिया के माध्यम से सूचनाओं की पहुंच घर घर सम्भव हो पाती है। घरों में टीवी, इंटरनेट एवं संचार सुविधाओं का लाभ आप हम सभी को प्राप्त हो रहा है। 
आइए मित्रों, संकट की इस घड़ी में इन कोरोना वारियर्स बिजली कार्मिकों का उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिये सम्मान करें। विशेष तौर पर आप सभी के घरों में आसपास जिस भी बिजलीघर से लाइट आती है। वहां कार्यरत समस्त सब स्टेशन आपरेटर्स, समस्त लाइन स्टाफ एवं अन्य सभी सहयोगी स्टाफ का सम्मान करते हुए उन्हें उनकी सेवाओं के लिये आभार प्रकट करें। आप जब भी उनसे कार्य के सम्बन्ध में सम्पर्क करें तो उन्हें हृदय से धन्यवाद अर्पित करें। आपकी बिजली सम्बन्धी शिकायत के निराकरण में अगर विलम्ब हो जाये तो कृपया धैर्य बनाये रखें एवं बिजलीकर्मी के आगमन पर उनसे उलझें नहीं बल्कि उनसे स्नेहपूर्ण एवं संयत तरीके से बातचीत करें क्योंकि उनकी सेवा में शारीरिक एवं मानसिक श्रम दोनों जुड़ा है जिसमें यदा कदा सेवा में देरी होना स्वाभाविक है। 



कोई भी लाइन स्टाफ बिना किसी कारण आपकी शिकायत के निराकरण में अनावश्यक विलम्ब नहीं करता है। उनकी यही कोशिश रहती है कि जल्द से जल्द आपके घरों में उजाला हो जाये। इस बात का भी ध्यान रखें कि बिजली के लाइन स्टाफ कर्मियों को घर घर जाकर अपनी ड्यूटी को अंजाम देना होता है जो इस वैश्विक महामारी कोरोना (कोविड-19) के संक्रमण काल में कोरोना वारियर्स की समस्त सेवाओं में उन्हें प्रथम पंक्ति में रखती है। 
बिजली के उपकरण विशेषतः ट्रप, पोल एवं लाइनों की मदद से ही हमारे बिजली के कोरोना वारियर्स हम तक बिजली को पहुंचा पाते हैं। अतः समस्त ट्रांसफार्मर, पोल एवं बिजली लाइनें भी एक तरह की कोरोना वारियर्स ही हैं। वे लगातार हर मौसम हर परिस्थिति में हमें बिजली प्रदान करने में सहायक होती हैं। अतः एक राष्ट्रीय सम्पदा के तौर पर उनकी सुरक्षा भी हमारी ही जिम्मेदारी है।
अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए हमारे प्रदेश में अनेक स्थानों पर बिजली घरों में लगातार बिजलीकर्मी सोशल डिस्टेंसिंग का बखूबी पालन सुनिश्चित करते हुए जरूरतमंद नागरिकों को भोजन व्यवस्था उपलब्ध करा रहे हैं। देहरादून में मोहित जोशी एवं उनकी टीम लाकडाउन की शुरुआत से ही लगातार इस कार्य को अन्य बिजली कार्मिकों के सहयोग से बखूबी कर रहे हैं। उनके एवं पूरी टीम की मेहनत, लगन, सच्ची सामाजिक सेवा और राष्ट्रहित के जज्बे को हृदय से सलाम।
ये कोरोना वारियर्स आपके लिये अपने घर से बाहर हैं। आप कृपया घर में बने रहिये। हमारे प्रदेश में आप तक बिजली व्यवस्था पहुंचाने की जिम्मेदारी के तहत उत्तराखंड पावर कार्पाेरेशन लिमिटेड द्वारा समस्त आवश्यक इंतजाम किये गये हैं। आप घर बैठे अपने बिजली बिलों का भुगतान आनलाइन माध्यम जैसे कि गूगल पे, यूपीआई, अमेजन पे, पेटीएम, भीम आदि एप अथवा यूपीसीएल की वेबसाइट www.upcl.org के माध्यम से कर सकते हैं। अतः इस संकट काल में जब समस्त बिजली के कोरोना वारियर्स आपकी सेवा में कार्यरत हैं तो कृपया आप भी अपना बिल आनलाइन जमा कर अपनी जिम्मेदारी का पालन कर प्रदेश एवं देश के विकास का हिस्सा बनें। 
वर्तमान में जबकि घर से बाहर आना अपनी जान से खिलवाड़ करने के समान है। बिजली कार्मिक अन्य कोरोना वारियर्स की ही भांति अपनी जान पर खेलकर अपनी सेवाएं देकर राष्ट्र के प्रति अपने उत्तरदायित्व का निर्वहन कर रहे हैं। ऐसे में हम सबका उनके प्रति नजरिया पहले से अधिक संवेदनशील एवं मानवीय होना चाहिये। शासन एवं प्रशासनिक स्तर पर देश भर में समस्त बिजलीकर्मियों सहित समस्त कोरोना वारियर्स के वेलपफेयर, सेवा शर्तों सम्बन्धी एवं अन्य आवश्यक जितने भी प्रकरण लम्बित हैं। उनका शीघ्रातिशीघ्र निराकरण कर उनका मनोबल ऊंचा रखा जाना चाहिये।
अतः देश भर में घर घर में उजाला सुनिश्चित करने वाले बिजली के कोरोना वारियर्स को राष्ट्र के प्रति उनके जज्बे एवं समर्पण के लिये हृदय से नमन।


घर की नेगेटिव एनर्जी दूर करने के उपाय

आज के नकारात्मक माहौल के बीच खुद को पाजिटिव रख पाना चुनौतीपूर्ण 
घर की नेगेटिव एनर्जी दूर करने के उपाय



प0नि0डेस्क
देहरादून। इस वक्त चारों ओर का माहौल ही नेगेटिव बना हुआ है। कोरोना वायरस के चलते केवल नकारात्मक खबरें आ रही हैं। ऐसे में अपनी सोच को पाजिटिव रख पाना काफी चुनौतीपूर्ण होगा। इतना ही नहीं घर के माहौल में भी पाजिटिव एनर्जी का फ्रलो कैसे बढ़ायें, इस वक्त ऐसा कर पाना आसान नहीं होगा। इसके लिए कुछ ऐसे आसान उपाय है जिनको अपनाने से आप अपने घर से नेगेटिविटी को हटा सकते हैं।
प्रवेश द्वार पर लगाएं गणेशजीः यदि अभी तक ऐसा नहीं किया है तो अब कर लें। प्रवेश द्वार के दाएं तरफ या फिर ऊपर की तरफ गणेशजी मूर्ति या फिर कोई शोपीस या उनका स्टीकर भी चिपका सकते हैं। आप चाहें तो मुख्य द्वार के दोनों ओर ऊं या फिर स्वास्तिक का भी चिह्न बना सकते हैं।
घर में लगा लें तुलसी के पौधेः अगर आपने घर में तुलसी का पौधा अभी तक नहीं लगाया है तो अब लगा लें। तुलसी अन्य पौधों की तुलना में सबसे अधिक आक्सीजन छोड़ती है और इसे पाजिटिव एनर्जी का सबसे बड़ा स्रोत माना जाता है। कई प्रकार के वास्तु दोष दूर रहते हैं। तुलसी के पौधे का पास रोज शाम को दीपक भी लगाना चाहिए।
यदि घर के आस-पास कोई भी सूखा पेड़ या फिर कोई झाड़ हो तो उसे तुरंत हटवा देना चाहिए। वास्तु के अनुसार सूखे पेड़ घर में नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा देते हैं। घर के चारों तरफ सुंदर और हरा-भरा वातावरण होना चाहिए। घर के आंगन में आक्सीजन देने वाले हरे-भरे पेड़ लगाने चाहिए।
अगर आपके घर में भी सीलन की वजह से दीवारों पर अजीब प्रकार की आकृतियां बन गई हैं तो उन्हें तुरंत साफ करवाने की जरूरत है। वास्तु में ऐसी चीजों को बहुत ही खराब माना जाता है। आप ऐसी दीवारों या फिर छतों को तुरंत रिपेयर करवा लें।
अगर आप कालीन के शौकीन हैं तो आपको इस प्रकार से कालीन बिछवाने चाहिए कि ये कमरों में पूरे फर्श को घेरते हुए हों। ऐसे कालीन घर में लाभदायक और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा देते हैं।
नमक का उपायः घर को निगेटिविटी से दूर रखने के लिए मिट्टी के एक पात्र में भरकर पूर्व दिशा में नमक रखें और इसे हर हफ्रते एक निश्चित समय पर बदलते रहें। नमक में वह शक्ति होती है जो पाजिटिव एनर्जी को अपनी ओर खींचती है और नेगेटिव एनर्जी को खत्म करती है।
खिड़की पर पर्दे लगायेंः कभी-कभी बेडरूम की खिड़कियों से ऐसी चीजें दिखाई देती हैं तो घर में नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाती हैं। इनमें सूखा पेड़, फैक्ट्री की चिमनी से निकलता धुंआ या फिर गंदे जानवरों को घूमते देखना। ऐसे दृश्यों से बचने के लिए खिड़की पर पर्दे डालकर रखना चाहिए।


धूम्रपान, शराब पर रोक का औचित्य!

धूम्रपान, शराब पर रोक का औचित्य!



प0नि0ब्यूरो
देहरादून। एक तरफ देश कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते लाक डाउन के हालातों से रूबरू है और लोग ऐसे मुश्किल हालातों में जरूरतमंदों की सहायता कर मदद की मिसाल कायम कर रहें है जो कुछ लोग ऐसे भी है जो इस नाजुक दौर को कमायी का अवसर जान मुनाफाखोरी कर रहें है। खासकर ध्रूमपान और शराब जैसी चीजें पर एक ओर सरकार द्वारा रोक लगाई गई है तो वहीं इनकी अवैध बिक्री चरम पर है। इन वस्तुओं पर जमकर ब्लैक मार्केटिंग हो रही है। पहले तो इन चीजों की बिक्री पर रोक का औचित्य ही समझ से परे है। दूसरा यदि ऐसा करके सरकार जनता का भला चाहती है तो यह सब ब्लैक पर कैसे उपलब्ध हो रहीं है। यदि सरकार इन चीजों की ब्लैक मार्केटिंग नहीं रोक सकती तो उनकी बिक्री पर रोक लगाया क्यों गया है? 
दरअसल धू्रमपान एवं शराब जैसी चीजों को हमारे देश में विलासितापूर्ण व्यसन माना जाता है। और सरकारों एवं सामाजिक संगठनों की धारणा है कि इनपर ज्यादा टैक्स लगाकर पीने वालों को हतात्साहित किया जाना उचित है। उन्हें इन व्यसनों पर तमाम बुराईयां नजर आती है जबकि सच तो यह है कि बुराई इस चीजों पर नहीं है बल्कि इसको प्रयोग करने वालों की खुद को नियंत्रित न कर पाने की गलती इन सबको बुरा बना देती है। यह विचार करने योग्य है कि यदि सड़क पर आप वाहन पर कंट्रोल से नहीं चलाते तो गलती किसकी कहलायेगी? यहां पर भी यहीं कुछ हो रहा है। 
फिर धूम्रपान और शराब का विरोध करने के पीछे लगभग वहीं धरणा कायम है जैसा कि आजकल आम लोगों में पाया जाता है। यदि मैं मांस भक्षण नहीं करता या मुझे यह उचित प्रतीत नही होता तो दुनिया भी क्योंकर इसका सेवन करे। जबकि इस बात का अवश्य संज्ञान लिया जाये कि शराब केवल नशे का जरिया ही नहीं है बल्कि इसे आदिकाल से थकान मिटाने के लिए भी मेहनतकश लोगों द्वारा लिया जाता रहा है। प्राचीनकाल से ही धूम्रपान एवं शराब मनोरंजन एवं उत्सव के दौरान अनिवार्य रूप से परोसे जाने वाली वस्तु होती थी। ऐसे में लाकडाउन के दौरान सरकार को चाहिये कि वह इनकी बिक्री पर रोक को हटाये। या फिर जगह जगह ब्लैक में मिल रहीं इन चीजों पर रोक लगाये, लेकिन यह मुमकिन नही हो रहा है। इस तरह की प्रवृति देश और समाज के लिए व्यवहारिक नही है।


मदद के मोहताज हुए लघु एवं मझोले समाचार पत्र

कोरोना महामारी से लड़ाई में अपने कर्तव्यों पर डटे पत्रकारों पर छाया आर्थिक संकट
मदद के मोहताज हुए लघु एवं मझोले समाचार पत्र



प0नि0ब्यूरो
देहरादून। कोरोना वायरस (कोविड- 19) महामारी के दौर में देश पूरे विश्व के साथ इसके विरूद्व लड़ाई लड़ रहा है और प्रदेश के तमाम लघु एवं मझोले समाचार पत्रों के पत्रकार इस लड़ाई में देश और सरकार के साथ खड़ा है। इस बेहद जोखिम भरे वातावरण में भी पत्रकार अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहें है और अपने-अपने स्तर से जनता के बीच सरकार के निर्देशों को पहुंचा रहें है और लोगों को कोरोना वायरस से बचाव के बारे में जागरूक करने का काम कर रहें है। 
आज देशभर में लोकडाउन जैसी आपातकालीन हालात है क्योंकि यहीं एकमात्र तरीका है जिसके जरिए हम कोरोना महामारी का मुकाबला कर सकते है। हालांकि इस दौर में करीब-करीब सभी लोग किसी न किसी रूप से प्रभावित हुए है। लघु एवं मझोले समाचार पत्रों के पत्रकारों का तो पूरा का पूरा काम ही इससे ठप्प हो गया है। खासकर तब जबकि समाचार पत्रों का आय का जरिया विज्ञापन ही है, जोकि इन विषम हालात में लगभग शून्य हो चुका है। जिसकी वजह से लघु एवं मझोले समाचार पत्र गंभीर आर्थिक संकट से जुझ रहे है। 
हालांकि मीडिया का कोई भी स्वरूप इसकी मार से अछूता नहीं। चाहे वो इलैक्ट्रानिक चैनल हो या पोर्टल या मीडिया का अन्य कोई माध्यम, सब गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहें है। ऐसे में समाज और सरकार का दायित्व बनता है कि वह संकट की घड़ी में जोखिम भरे माहौल में अपने काम को अंजाम दे रहे इन कोरोना वारियर्स की सुध ले। इसके लिए मीडियाकर्मी सरकारों से उम्मीद लगाये बैठे है। 
सरकारों से अपेक्षा की जा रही है कि वह सहृदयतापूर्वक काम करते हुए चंद कदम उठाये तो लघु एवं मझोले समाचार पत्र एवं उनसे जुड़े पत्रकारों के सामने व्याप्त आर्थिक संकट को थोड़ा सहारा मिल सकता है और इस संकट से उबर सकता है। मसलन सरकारें लघु एवं मझोले समाचार पत्रों के लंबित बिलों का भुगतान तत्काल प्रभाव से कराना सुनिश्चित करे ताकि इससे पत्रकारों को विपत्ति के समय मदद मिल सके।
इसके अतिरिक्त ऐसे आपातकालीन हालात में प्रदेश के तमाम लघु एवं मझोले समाचार पत्रों को, चाहे वह सूचीबद्व या डीएवीपी से मान्यता प्राप्त हो या न हों, समुचित विज्ञापन जारी किया जाये। यहां पर बता दें कि विज्ञापन केवल प्रचार या प्रसार की खातिर ही प्रकाशित नहीं किए जाते बल्कि कोविड-19 जैसी आपातकालीन परिस्थितियों में इसके जरिए लोगों को जागरूक किया जा सकता है। और यह काम लघु एवं मझोले समाचार पत्र एवं अन्य मीडिया माध्यम बाखूबी कर भी रहें है। यह व्यवस्था तब तक जारी रहे जब तक कि कोविड-19 का प्रभाव कम नहीं हो जाता। 
यह दुर्भाग्य की बात है कि सरकारों की तरफ से घोषणा के बाद भी अब तक पत्रकारों को कोविड-19 के तहत बीमा योजना की सुविधा से आच्छान्दित नही  किया गया है। जबकि आज के हालातों में पत्रकार बेहद जोखित भरे माहौल में अपना काम कर रहें है। हालांकि देश के कुछ राज्यों ने संवेदनशीलता दिखाते हुए ऐसे प्रावधानों को लागू किया है। लेकिन इस मामले में उत्तराखण्ड़ सूचना विभाग का रवैया बेहद निराशाजनक रहा है। 
प्रदेश का वह विभाग जिसको कोरोना प्रकोप के दौरान प्रदेश में लीड करना चाहिये था, कर्तव्य विमुख होकर तमाशा देख रहा है। जिस तरह से कोविड-19 के तहत लाकडाउन के दौरान डीएवीपी एवं आरएनआई ने टोकन सिस्टम तथा एनुअल रिर्टन की प्रक्रिया को लंबित किया है उसी तरह की एडवाइजरी सूचना विभाग से भी जारी होनी चाहिये थी लेकिन ऐसा नही हुआ। जबकि सूचना निदेशालय एवं जिला सूचना कार्यालय का संचालन नियमित नही हो रहा है।
सूचना विभाग द्वारा लाक डाउन पीरियड के दौरान महज एक न्यूज एजेंसी की तरह सेवा दी जा रही है। जबकि पत्रकारों एवं  मीडिया माध्यमों की सुध लेना भी उसका मुख्य दायित्व है। लेकिन इसने नकारापन के सारे रिकार्ड तोड़ दिए है। महज दो चार बैनरों की सेवा में प्रस्तुत रहने के अलावा इसने लघु एवं मझोले समाचार पत्रों की सदैव उपेक्षा ही की है। देखना होगा कि प्रदेश सरकार कब लघु एवं मझोले समाचार पत्रों की सुध लेती है ताकि यह माध्यम वर्तमान में व्याप्त संकट से उबर सके।


 


सोमवार, 27 अप्रैल 2020

उद्योगों के मुताबिक उनकी टाप और बाटम लाइन पर लाक डाउन का व्यापक प्रभाव पड़ेगा

उद्योगों के मुताबिक उनकी टाप और बाटम लाइन पर लाक डाउन का व्यापक प्रभाव पड़ेगा



सीआईआई उत्तरी क्षेत्र को विश्वास है कि उद्योगों के मजदूरों को भुगतान करने में सरकार उनकी मदद करेगी
संवाददाता
चंडीगढ़। भारतीय उद्योग परिसंघ द्वारा कोरोनावायरस को लेकर उत्तरी क्षेत्र के उद्योगों के सीईओ पर हाल ही में करवाए गए स्नैप पोल में सामने आया है कि कोरोना वायरस का उद्योगों पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ेगा। पोल में तीन चौथाई सदस्यों ने माना कि इस आपदा की स्थिति में भारत विश्व के अन्य कई देशों के मुकाबले बेहद बेहतर स्थिति में है। 
बहुत से विशेषज्ञों ने माना कि इस महामारी को रोकने में लाक डाउन ने अहम भूमिका निभाई है। कई सदस्यों ने सुझाव दिया कि सरकार को अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए लाक डाउन में चरणबद्व तरीके से ढील देते हुए खोलना चाहिए और ध्यान रखना चाहिए कि यह महामारी और अधिक फैलने ना पाए। कंपनियों से रैंक ट्रैकिंग चैलेंज के बारे में पूछा गया तो 58 फीसदी ने धन की कमी, सप्लाई चैन तथा श्रमिकों की कमी जैसी चुनौतियां के बारे में बताया।
इकोनामिक रिकवरी के बारे में अधिकतर उद्योगों ने उम्मीद जताई कि वर्ष 2020-21 के दौरान उनकी टाप लाइन और बाटम लाइन में गिरावट दर्ज की जाएगी। अधिकतर उद्योगों ने कहा कि लव डाउन समाप्त होने के पश्चात रोजगार अवसरों में 10 फीसदी अनुबंध तक की बढ़ोतरी हो सकती है। कंपनियों द्वारा सरकार से सबसे अधिक उम्मीद लाक डाउन के बाद उन पर पड़ने वाले प्रभाव के कारण श्रमिकों को भुगतान करने के लिए 54 फीसदी राशि की सहायता है। इसके साथ ही यूटिलिटी चार्जेस में 32 फीसदी की छूट तथा ब्याज की कम दर तथा अन्य उम्मीदें सरकार से लगी हुई है। 45 फीसदी उद्योग मानते हैं कि कोरोनावायरस के समय में लागत और धन की उपलब्धता उनके विकास के मार्ग में बाधक बनी इसमें बाजार प्रभाव 32 फीसदी तथा भुगतान में देरी 23 फीसदी मानी गई। 
स्नैप पोल के बारे में टिप्पणी करते हुए सीआईआई उत्तरी क्षेत्र के चेयरमैन निखिल साहनी ने कहा कि इस पोल के परिणाम भारतीय उद्योगों के मन और उनकी भावनाओं को व्यक्त करते हैं। इस महामारी के चलते हुए लाक डाउन ने भारतीय अर्थव्यवस्था पर बहुत गहरा प्रभाव छोड़ा है और करोड़ों लोगों के जीवन को प्रभावित किया है। एसएमई क्षेत्र जो सबसे अधिक रोजगार के मौके उपलब्ध करवाता है उसे लाक डाउन ने बुरी तरह से प्रभावित किया है। भारत सरकार ने रिजर्व बैंक आफ इंडिया के साथ मिलकर उद्योगों के दर्द को कम करने के लिए कुछ कदम अवश्य उठाएं हैं हालांकि सीआईए को विश्वास है कि विश्व के अन्य विकसित देशों की तरह अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए भारत सरकार भी व्यापक स्तर पर कदम उठाएगी। 
आगे बढ़ते हुए उद्योगों और व्यापारियों को सामने आने वाली समस्याओं का सामना करते हुए इनका निवारण करना होगा तथा अर्थव्यवस्था को वापस पटरी पर लाने के लिए आवश्यक सहायता प्राप्त करनी होगी। स्नैप पोल का आयोजन वर्चुअल प्लेटपफार्म पर किया गया जिसमें उत्तर भारत के राज्यों से विभिन्न क्षेत्र के 70 से अधिक सीईओ ने भाग लिया।
 गौर हो कि सीआईआई उत्तर क्षेत्र में 7 राज्य आते हैं जिनमें उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड तथा 3 यूनियन टेरिटरी चंडीगढ़, जम्मू एंड कश्मीर तथा लद्दाख आते हैं।    


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मानव संसाधन विकास मंत्रालय विद्यार्थियों की शिक्षा एवं उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रतिबद्धः निशंक

मानव संसाधन विकास मंत्री ने कोविड-19 की वजह से उत्पन्न परिस्थितियों के मद्देनजर वेबिनार द्वारा अभिभावकों से संवाद किया
केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी राज्यों के शिक्षा मंत्रियों से करेंगे चर्चा



मानव संसाधन विकास मंत्रालय विद्यार्थियों की शिक्षा एवं उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रतिबद्धः निशंक
एजेंसी
नई दिल्ली। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने वेबिनार के माध्यम से देशभर के अभिभावकों एवं छात्रों से संवाद किया और कोविड-19 की वजह से उत्पन्न परिस्थितियों की वजह से उनके मन में उठ रहे विभिन्न सवालों के जवाब दिए। इस वेबिनार संवाद से जम्मू-कश्मीर से लेकर केरल और गुवाहाटी से लेकर गुजरात तक करीब 20000 अभिभावक जुड़े।
केंद्रीय मंत्री ने अपने वेबिनार संवाद के माध्यम से मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा चलाये जा रहे ऑनलाइन शिक्षा के लिए विभिन्न अभियानों और योजनाओं के बारे में अभिभावकों को अवगत कराया। उन्होनें कहा कि मंत्रालय को छात्रों की शैक्षणिक गतिविधियों की चिंता है और इसी वजह से हमने पहले से चली आ रही विभिन्न योजनाओं को युद्ध स्तर पर लागू किया जिसका लाभ देश के 33 करोड़ छात्र कभी भी और कहीं से भी उठा सकते हैं।
देशभर के अभिभावकों का आभार प्रकट करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश इस समय अभूतपूर्व संकट से गुजर रहा है। अभिभावकों के लिए ये समय और भी मुश्किल हो जाता है क्योंकि उन्हें अपने बच्चों की पढाई की और भविष्य की चिंता भी सता रही होगी। निशंक ने विश्वास दिलाया कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय छात्रों की पढाई और उनके भविष्य के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इस दिशा में मंत्रालय दीक्षा, ई-पाठशाला, मुक्त शैक्षिक संसाधनों का राष्ट्रीय भंडार (एनआरओईआर), स्वयं, डीटीएच चैनल स्वयंप्रभा इत्यादि द्वारा सभी छात्रों की पढाई अनवरत जारी रखने का प्रयास कर रहा है।
पोखरियाल ने बताया कि ऑनलाइन शिक्षा नीति को सुदृढ़ बनाने के लिए हमने भारत पढ़े ऑनलाइन अभियान की शुरुआत की है जिसमें देशभर से छात्रों, अभिभावकों और अध्यापकों से सुझाव मांगे गए थे। हमें 10000 से अधिक सुझाव प्राप्त हुए थे जिस पर  मंत्रालय बहुत जल्द दिशानिर्देश लेकर आएगा।
केंद्रीय मंत्री ने विद्यादान 2.0 के बारे में अभिभावकों को बताते हुए कहा कि इस अभियान के तहत मंत्रालय ने देश के शिक्षाविदों और शैक्षणिक संगठनों से विभिन्न ई-लर्निंग प्लेटफार्म पर पाठ्यक्रम के अनुसार सामग्री विकसित करने और इसमें योगदान देने का आग्रह किया है। निशंक ने कहा कि इस कार्यक्रम में अनेक शिक्षाविदों एवं शैक्षणिक  ने अपनी रूचि दिखाई है और आशा जताई कि बहुत जल्द हमें इसके तहत काफी सारी पाठ्यसामग्री मिल जाएगी।
इस संवाद के दौरान डा0 निशंक ने अभिभावकों के सवालों के जवाब भी दिए। पटना से एक अभिभावक के एनसीआरईटी पुस्तकों की उपलब्धता के सवाल पर मंत्री जी ने कहा कि एनसीआरईटी ने लगभग सभी राज्यों में पुस्तकें भेज दी हैं और बहुत शीघ्र विद्यार्थियों को ये पुस्तकें उपलब्ध हो जाएंगी।
सीबीएसई की 10वीं और 12वीं की बची हुई परीक्षाएं आयोजित कराने के सवाल का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हालात सामान्य होने पर मुख्य विषयों के 29 पेपर्स की परीक्षाओं का आयोजन किया जाएगा।
लॉक डाउन में विद्यार्थियों की शिक्षा का नुकसान कैसे कम किया जाए इस सवाल के जवाब में उन्होनें कहा कि मंत्रालय के विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से विद्यार्थियों की शिक्षा जारी है। उन्होंने बताया कि मंत्रालय के केवल दीक्षा प्लेटफार्म पर ही 80,000 से ज्यादा पाठ्यसामग्री उपलब्ध है और लॉकडाउन के समय में  इसको उपयोग में लाने की दर में कई गुना बढ़ोतरी हुई है। इस समय करोड़ो विद्यार्थियों द्वारा इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। एक सवाल के जवाब में केंद्रीय मंत्री ने बताया कि लॉक डाउन के कारण शिक्षा का नुकसान ना हो इसके लिए एनसीआरईटी द्वारा वैकल्पिक कैलेंडर बनाया गया है और सीबीएसई को भी नया शैक्षणिक कैलेंडर जारी करने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री  ने विद्यार्थियों के करियर संबंधी, परीक्षा संबंधी और अन्य कई सवालों के जवाब दिए।
उन्होनें इस दौरान यह भी बताया कि मंत्रालय लगातार सभी राज्यों के शिक्षा मंत्रियों एवं शिक्षा सचिवों के साथ संपर्क में हैं और यह सुनिश्चित करने में लगा है कि इस मुश्किल घड़ी में भी छात्रों की पढाई जारी रहे। इसी संदर्भ में कल वह सभी राज्यों के शिक्षा मंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बात करेंगे जिसमें विशेष रूप से कोविद-19 से उत्पन्न हुई शैक्षणिक चुनौतियों से निपटने, मिड डे मील और समग्र शिक्षा के बारे में चर्चा की जाएगी।
निशंक ने इस वेबिनार से जुड़ने के लिए सभी अभिभावकों का आभार व्यक्ति किया और कहा कि अगले सप्ताह वह वेबिनार के माध्यम से विद्यार्थियों से जुड़ेंगे और उनसे संवाद स्थापित करेंगे।
उन्होनें अपने संवाद को ख़त्म करने से पहले सभी अभिभावकों का इस मुश्किल समय में धैर्य के साथ लॉकडाउन का पालन करने, सोशल डिस्टैन्सिंग और स्वास्थ्य विभाग के दिशानिर्देशों का पालन करते रहने के लिए आभार व्यक्ति किया और उनसे कोरोना के खिलाफ इस जंग में पूरी ईमानदारी के साथ भाग लेने के लिए धन्यवाद किया।


जागरूक बनो आवाज उठाओ संस्था ने बांटे मास्क

जागरूक बनो आवाज उठाओ संस्था ने बांटे मास्क



संवाददाता
देहरादून। पूरी दुनिया कोरोना वायरस के संकट से जूझ रही है और अमारा देश भी लाकडाउन के हालातों से गुजर रहा है। ऐसे में सोशल डिस्टेंसिंग, सेनेटाइजर और मास्क इस लड़ाई का मुख्य हथियार बन गया है। लेकिन कई कारणों से लोग इनका उपयोग नहीं कर पा रहें है। ऐसे में जागरूक बनो आवाज उठाओ संस्था द्वारा लोगों को जागरूक करने का बीड़ा उठाया गया। 
इसी क्रम में संस्था के संयोजक यशवीर आर्य के नेतृत्व में शहर के सामाजिक संस्था ‘जागरूक बनो आवाज उठाओ’ द्वारा मास्क वितरण की श्रृंखला मंे घंटाघर पर मास्क इस्तेमाल न वाले और उचित मास्क का प्रयोग न करने वाले राहगीरों को मास्क का वितरण किया।
संस्था के संयोजक यशवीर आर्य ने समुचित दूरी बनाने के लिये एक स्टिक के द्वारा मास्क देते हुये लोगों से अनुरोध किया कि यदि सड़क पर आना जरूरी है तब ही आयें और मास्क लगाकर दूरी भी बनाये रखे। उन्होंने कहा कि कोरोना से डरने की बजाय इसके प्रति जागरूकता से ही बचाव हो सकता है।  
बता दें कि सूती, खादी कपडे के मास्क संस्था के संयोजक आर्य द्वारा स्वयं बनाये गये हैं जिनको स्टरलाइज करके पुनः प्रयोग किया जा सकता है और प्रदूषण से भी बचाव हो सकता है।
                     
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पीआरसीआई देहरादून चैप्टर ने अपना पहला स्थापना दिवस मनाया

पीआरसीआई देहरादून चैप्टर ने अपना पहला स्थापना दिवस मनाया
लॉकडाउन को ध्यान में रखते हुए पीआरसीआई द्वारा ऑनलाईन की गयी बैठक

देहरादून। पब्लिक रिलेशन कांउसिल आफ इण्डिया पीआरसीआई देहरादून चैप्टर ने पहला स्थापना दिवस मनाया। लॉकडाउन एवं कोविड-19 को ध्यान में रखते हुए पीआरसीआई देहरादून चैप्टर के पदाधिकारी एवं राष्ट्रीय चैप्टर के पदाधिकारियों ने ऑनलाईन बैठक कर पहले वर्ष हुए कार्यक्रमों पर चर्चा की।
पीआरसीआई देहरादून चैप्टर के अध्यक्ष राजेश कुमार ने पूरे वर्ष में हुए कार्यक्रमों के बारे में विस्तार से बताया कि किस तरह से देहरादून के युवा चैप्टर ने जनहित में कार्य किये। पीआरसीआई ने छात्रों लिए जनसंपर्क के विभिन्न विषयों पर कार्यशाला, राईट टू वॉक कैंपेन, मर्दस डे, ऑनलाईन लेक्चर आदि कार्यक्रम किये। अध्यक्ष ने कहा कि हम भविष्य में भी इसी तरह से कार्य करते रहेंगे। मार्च में बैंगलोर में हुए राष्ट्रीय ग्लोबल कम्यूनिकेशन कॉनक्लेव में वर्ष 2020 के लिए 37 चैप्टरों में से पीआरसीआई देहरादून को बैस्ट चैप्टर ऑफ दी ईयर, बैस्ट चेयरमैन ऑफ दी ईयर व बैस्ट प्रोग्राम ऑफ दी ईयर का अवार्ड दिया गया।
एमबी जयराम पीआरसीआई मुख्य संरक्षक और अध्यक्ष एमेरिटस ने देहरादून चैप्टर को स्थापना दिवस के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि देहरादून चैप्टर राष्ट्रीय स्तर पर उभर रहा है तथा उत्तराखण्ड में जनसंपर्क के क्षेत्र में सराहनीय कार्य करने के लिए पूरी टीम को धन्यवाद किया। उन्होंने देहरादून चैप्टर में जनसंपर्क के छात्रों को अधिक से अधिक संख्या में जोड़ने पर जोर दिया। स्थापना दिवस पर देहरादून चैप्टर को प्रमाण पत्र दिया गया।
स्थापना दिवस के अवसर पर ऑनलाईन बैठक में राष्ट्रीय चैप्टर के बीएन कुमार पीआरसीआई गर्वनिंग कांउसिल, राष्ट्रीय अध्यक्ष डा0 टी0 विनय कुमार, सीजे सिंह, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कार्यकारी, रेनुका सलवाल, नार्थ जोन अध्यक्ष, रविन्द्रन केशवान, उपाध्यक्ष पीआरसीआई नार्थ ईस्ट, गीता शंकर, चुनाव कार्यकारी अध्यक्ष पीआरसीआई व हैड वाईसीसी नेशनल कांउसिल, देहरादून चैप्टर की ओर से सचिव विकास कुमार, कोषाध्यक्ष हेम प्रकाश, नेशनल प्रतिनिधि पंकज तिवारी व करूणाकर झा आदि मौजूद रहे।    


पहले विधायकों के भत्ते व निधि फ्रीज करे सरकारंः मोर्चा

पहले विधायकों के भत्ते व निधि फ्रीज करे सरकार: मोर्चा 



- गरीब करोड़पति विधायकों को मिलता है 1.5 लाख रुपया प्रतिमाह निर्वाचन क्षेत्र भत्ता 
- विधायकगण समाज सेवक हैं न कि सरकारी सेवक 
3.75 करोड प्रतिवर्ष है विधायक निधि, धरातल पर लगता है सिर्फ 30-40 फ़ीसदी पैसा 
- कर्मचारियों के भत्ते में कटौती करना उनके अधिकारों का हनन 
संवाददाता
विकासनगर। जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने कहा कि सरकार द्वारा कोरोना महामारी की आड़ में प्रदेश के लगभग तीन लाख से अधिक कर्मचारियों के डी0ए0 आदि में कटौती/फ्रिज करने का फरमान जारी किया गया है, जोकि सीधे-सीधे कर्मचारियों के अधिकारों का हनन है।
नेगी ने कहा कि सरकार को चाहिए था कि सबसे पहले आगामी 2 वर्षों तक विधायकों का निर्वाचन क्षेत्र भत्ता, जोकि 1.5 लाख रुपए प्रति विधायक/प्रतिमाह है,उसको फ्रिज करना चाहिए था, क्योंकि विधायक समाज सेवक होता है न की सरकारी सेवक।  पूर्व में सरकार द्वारा बड़ी चालाकी से गरीब करोड़पति विधायकों के वेतन में 30 फ़ीसदी कटौती करने का फरमान जारी किया गया था, जोकि 9,000 रूपये प्रतिमाह होता है। 
उन्होंने कहा कि विधायक का वेतन 30,000 रूपये प्रतिमाह है। इसके साथ-साथ विधायक निधि, जोकि 3.75 करोड़ प्रतिवर्ष है, उसको भी आगामी 2 वर्षों तक समाप्त/फ्रीज किया जाना चाहिए क्योंकि इस निधि का मात्र 30-40  फ़ीसदी पैसा (निर्माण कार्यों के मामले में) ही धरातल पर खर्च होता है बाकी सब कमीशन बाजी आदि के खेल में समाप्त हो जाता है।                        
नेगी ने कहा कि सरकार  के दावे आखिर क्यों हवा-हवाई हो गए! एक-सवा महीने में ही सरकार के हाथ में कटोरा आ गया, जबकि दानदाताओं ने सरकार को भारी भरकम रकम भी दान की है। मोर्चा सरकार से मांग करता है कि कर्मचारियों का डीए फ्रिज/कटौती करने से पहले विधायकों का निर्वाचन क्षेत्र भत्ता व विधायक निधि फ्रिज करे।


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सीमा सड़क संगठन ने तीन सप्ताह पहले ही खोला रोहतांग दर्रा

सीमा सड़क संगठन ने तीन सप्ताह पहले ही खोला रोहतांग दर्रा



कोविड-19 लाकडाउन के बावजूद बीआरओ ने खोला लाहौन और स्फीति मार्ग  
एजेंसी
मनाली। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने कोविड-19 लाकडाउन के बीच बर्फ की सफाई के बाद तीन सप्ताह से ज्यादा समय पहले ही रोहतांग दर्रा खोल दिया। यह हिमाचल प्रदेश के लाहौल और स्पीति जिले को भारत के बाकी हिस्से से जोड़ने वाला मुख्य मार्ग है। पिछले साल इस दर्रे को 18 मई को खोला गया था।
हिमाचल प्रदेश सरकार ने बर्फ की सफाई में तेजी लाने के लिए बीआरओ से संपर्क किया था, जिससे फसलों की कटाई शुरू करने के लिए किसानों की वापसी को आसान बनाया जा सके और कोविड-19 को ध्यान में रखते हुए लाहौल घाटी में राहत सामग्री पहुंचाई जा सके तथा आवश्यक वस्तुओं की आवाजाही तेज की जा सके।
बीआरओ ने इस कार्य के लिए मनाली और खोकसार दोनों तरफ से उच्च तकनीक वाली मशीनरी लगाई थीं। रहाला झरना, बीस नाला और रानी नाला में बर्फीले तूफान, जमा देने वाला तापमान और नियमित अंतराल पर होने वाले हिमस्खलन के चलते परिचालन में देरी हुई, लेकिन लाहौल घाटी के नागरिकों तक राहत पहुंचाने के लिए बर्फ की सफाई करने वाले दल दिन और रात काम में लगी रहीं। 
लाहौल स्पीति के लिए आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और लगभग 150 किसानों से भरे वाहनों की पहली खेप रवाना की गई, जिसका मार्गदर्शन इस साल रोहतांग पास खोलने वाला बीआरओ अधिकारियों का दल कर रहा था। रोहतांग दर्रा पिछले साल की तुलना में तीन सप्ताह पहले ही यातायात के लिए खोले जाने की खबर से स्थानीय लोगों को खासी राहत मिली है। 
दर्रे को खोलने के लिए बर्फ की सफाई का काम हर साल किया जाता है, क्योंकि हर साल नवंबर से मई के मध्य तक लगभग 6 महीने तक रोहतांग दर्रा बर्फ से पटा रहता है। यह 12 दिसंबर 2019 तक खुला रहा था। पूरी घाटी सर्दियों के दौरान किसी भी तरह की ढुलाई/आपूर्तियों के लिए हवाई माध्यम पर निर्भर रहती है।



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सरकारी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति की उम्र घटाने कोई प्रस्ताव नहीः डा0 जितेंद्र सिंह

सरकारी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति की उम्र घटाने कोई प्रस्ताव नहीः डा0 जितेंद्र सिंह



एजेंसी
नई दिल्ली। सरकार ने मीडिया में चल रही उन खबरों को सिरे से खारिज किया है, जिनमें सरकारी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति की उम्र घटाकर 50 वर्ष करने का प्रस्ताव रखे जाने की बात कही गई है। केन्द्रीय पूर्वाेत्तर क्षेत्र विकास (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डा0 जितेंद्र सिंह ने स्पष्ट रूप से कहा कि न तो सेवानिवृत्ति की उम्र घटाने की कोई पहल की गई है और न ही सरकार के स्तर पर ऐसे किसी प्रस्ताव पर चर्चा की गई है।
डा0 जितेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से कुछ तत्व बार-बार सोशल मीडिया पर गलत जानकारियां फैला रहे हैं और इनके पीछे सरकारी स्रोतों या डीओपीएंडटी का हवाला दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हर बार हितधारकों के बीच भ्रम की स्थिति को दूर करने के लिए त्वरित खंडन जारी किया जाता है। उन्होंने इसे दुखद बताते हुए कहा कि ऐसे समय में जब देश कोरोना संकट से जूझ रहा है और पूरी दुनिया महामारी से निपटने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सक्रिय रणनीति की प्रशंसा कर रहा है, कुछ तत्व क्षुद्र स्वार्थवश सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों को कमतर करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से मीडिया में ऐसी खबरें चलवा रहे हैं।
इसके विपरीत कोरोना की चुनौती सामने आने के बाद से सरकार और डीओपीएंडटी द्वारा समय-समय पर कर्मचारियों के हितों की रक्षा में त्वरित फैसले लिए जा रहे हैं। उदाहरण सामने रखते हुए उन्होंने कहा कि लॉकडाउन से पहले ही डीओपीटी ने आधिकारिक रूप से कार्यालयों में बेहद आवश्यक या न्यूनतम कर्मचारियों के साथ काम करने का परामर्श जारी किया था। हालांकि आवश्यक सेवाओं को इन दिशानिर्देशों से छूट देते हए डीओपीटी ने दिव्यांग कर्मचारियों को आवश्यक सेवाओं से भी छूट देने का आदेश जारी किया था।
लॉकडाउन की बाधाओं पर विचार करते हुए उन्होंने याद दिलाया कि डीओपीटी ने सरकारी अधिकारियों द्वारा वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट (एपीएआर) को भरने की अंतिम तारीख टाल दी थी। इसके अलावा उन्होंने यूपीएससी के आईएएस/सिविल सेवाओं के साक्षात्कार/व्यक्तित्व परीक्षण की तारीखों में बदलाव करने के फैसले का उल्लेख किया। साथ ही यह भी घोषणा की जा चुकी है कि सिविल सेवा की प्रारंभिक परीक्षा 3 मई के बाद की जाएगी। इसी प्रकार एसएससी ने भी अपनी भर्ती प्रक्रिया को टाल दिया है।
कार्मिक मंत्रालय के कार्मिक विभाग के संबंध में डा0 जितेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले सप्ताह ही ऐसा फर्जी समाचार था कि सरकार ने पेंशन में 30 प्रतिशत कटौती और 80 वर्ष से ज्यादा उम्र वालों की पेंशन बंद करने का फैसला किया है। हालांकि इसके विपरीत हकीकत यह थी कि 31 मार्च को ऐसा कोई पेंशनर नहीं था जिसकी पेंशन उनके खाते में जमा नहीं की गई हो। इसके साथ ही डाक विभाग की सेवाओं के माध्यम से जरूरत पड़ने पर पेंशनरों के घर पर पेंशन की धनराशि पहुंचाई गई।
इसके अलावा कार्मिक मंत्रालय के कार्मिक विभाग ने पिछले चार सप्ताह के दौरान 20 शहरों में पेंशनरों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंस परामर्श का आयोजन किया था, जहां डा0 रणदीप गुलेरिया, निदेशक (एम्स) जैसे विशेषज्ञों द्वारा स्वास्थ्य संबंधी सलाह दी गई। इसी प्रकार वेबिनार पर योग सत्रों के आयोजन भी कराए जा रहे हैं।


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रिलायंस जियोमार्टः अब व्हाट्सऐप से कर सकेंगे ग्रासरी की खरीददारी

रिलायंस जियोमार्टः अब व्हाट्सऐप से कर सकेंगे ग्रासरी की खरीददारी



एजेंसी
नई दिल्ली। रिलायंस इंडस्ट्रीज के नए जियोमार्ट से ग्रोसरी आर्डर करने के लिए कंपनी ने कंपनी ने पफेसबुक इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप व्हाट्सऐप से हाथ मिलाया है। ग्रोसरी आर्डर करने के लिए व्हाट्सऐप नंबर पर भी जारी कर दिया गया है।
बता दें कि जियो मार्ट से आर्डर करने के लिए अलग से कोई ऐप्लिकेशन या वेबसाइट नहीं है। अगर आप भी जियो मार्ट से ग्रोसरी आर्डर करना चाहते हैं तो नीचे बताए गए स्टेप्स को पफालो करें।
सबसे पहले अपने पफोन में $91 88500 08000 नंबर को सेव करें। व्हाट्सऐप खोलें और इस कान्टैक्ट नंबर को ओपन करें। इसके बाद भ्प लिखकर मैसेज भेज दें। जैसे ही आप मैसेज सेंड करते हैं, सामने से आपको एक मैसेज प्राप्त होगा जिसमें आपको ग्रोसरी आर्डर करने के लिए एक लिंक दिया जाएगा। ग्रोसरी आर्डर करने के लिए लिंक पर क्लिक करें।
जैसे ही आप लिंक पर क्लिक करेंगे, आपके सामने अलग से एक पेज खुलेगा, इस पेज पर आप सेे नाम, पता, मोबाइल नंबर आदि डिटेल्स मांगी जाएंगी। जानकारी दर्ज करने के बाद नीचे दिख रहे च्तवबममक बटन पर क्लिक करें। आप जो भी समान खरीदना चाहते हैं उन्हें सिलेक्ट करें और अपना आर्डर प्लेस करें।
जानकारी के लिए बता दें कि जियो मार्ट से ग्रोसरी आर्डर करने की यह सर्विस अभी केवल ठाणे, नवी मुंबई और कल्याण क्षेत्रा के लिए ही उपलब्ध है। पिफलहाल ज्यादा समान तो उपलब्ध नहीं है लेकिन आटा, सूजी, बेसन आदि सामान पिफलहाल मिल जाएगा। आर्डर प्लेस करने के बाद आपको एक बार पिफर मैसेज मिलेगा जिसमें लिखा होगा, थैंक यू पफार प्लेसिंग योर आर्डर।
ग्रोसरी आर्डर करते समय इन बातों का ध्यान रखें। जैसा कि हमने बताया पिफलहाल आर्डर करने के लिए ऐप या अलग से वेबसाइट उपलब्ध नहीं। व्हाट्सऐप पर आए लिंक से आर्डर करें। बता दें कि यह लिंक पफोन और कंप्यूटर दोनों पर काम करता है। जियोमार्ट अभी केवल ठाणे, नवी मुंबई और कल्याण क्षेत्रा के आर्डर ही कर रहा है बुक।
हर दिन 5 बजे तक आए आर्डर आपके पास के जियोमार्ट किराना स्टोर पर अगले 48 घंटे में पिक अप के लिए उपलब्ध होंगे। ग्राहक का आर्डर जैसे ही तैयार होगा वैसे ही आपको एसएमएस मिलेगा। इसके बाद आपको आर्डर पिक करने के लिए दुकान या कह लीजिए जियोमार्ट स्टोर की डिटेल्स मिल जाएगी। पिफलहाल अभी होम डिलीवरी का कोई भी जिक्र नहीं किया गया है। व्हाट्सऐप पर जीओमार्ट की तरपफ से आया लिंक केवल 30 मिनट तक ही काम करेगा।


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हाईकोर्ट के 50 और सुप्रीम कोर्ट के 33 फीसदी जज चंद घरानों के बेटे-भतीजे!

हाईकोर्ट के 50 और सुप्रीम कोर्ट के 33 फीसदी जज चंद घरानों के बेटे-भतीजे!



एक सर्वे में देश की ज्यूडिशरी के हाल उजागर होने का दावा
एजेंसी
नई दिल्ली। देश की सर्वाेच्च न्यायालय में 33 फीसदी जज और हाईकोर्ट के 50 फीसदी जज ऐसे हैं, जिनके परिवार के सदस्य पहले ही न्यायपालिका में उच्च पदों पर रह चुके हैं। यह बात सामने आई है मुंबई के एक वकील मैथ्यूज जे नेदुमपारा की रिसर्च में। दरअसल, नेदुमपारा वही वकील हैं, जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट में नेशनल ज्यूडिशियल अपॉइंटमेंट कमीशन (छश्र।ब्) एक्ट को चुनौती देते हुए याचिका लगाई है। उन्होंने अपनी यह रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की संवैधानिक पीठ को सौंपी है। नेदुमपारा के मुताबिक यह व्यवस्था कोलेजियम सिस्टम की वजह से पैदा हुई है, जिसमें जज ही दूसरे जजों को नियुक्त करते थे।
नेदुमपारा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के 1990 के कुछ फैसलों से कॉलेजियम सिस्टम बना, जिससे उच्च न्याय संस्थानों में नियुक्तियां मनमर्जी से होने लगीं, जहां सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट के पूर्व और सिटिंग जज, गवर्नर, मुख्यमंत्रियों, कानून मंत्री, बड़े वकील और रसूखदार लोगों का फेवर किया जाता है।
रिपोर्ट के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट में मौजूदा समय में 31 जज हैं। इनमें से 6 जज पूर्व जजों के बेटे हैं। रिपोर्ट में 13 हाईकोर्ट के 88 जजों की नियुक्तियों की जानकारी है, जो या तो किसी वकील, जज या न्यायपालिका से ही जुड़े किसी व्यक्ति के परिवारवाले हैं।
नेदुमपारा का दावा है कि उनकी जानकारी का स्रोत सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट और 13 हाईकोर्ट के सितंबर-अक्टूबर 2014 तक के डेटा पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि बाकी हाईकोर्ट्स का तुलनात्मक डेटा मौजूद ही नहीं था।
उन्होंने कहा कि कॉलेजियम सिस्टम गुप्त तरीके से काम करता है, जहां उच्च न्यायापालिकाओं में खाली पदों का नोटिफिकेशन ही नहीं निकलता, न ही इनका एडवर्टाइजमेंट होता है। गौरतलब है सुप्रीम कोर्ट में बार एसोसिएशन की तरफ से पेश हुए वकील दुष्यंत दवे ने कॉलेजियम सिस्टम पर हमला करते हुए कहा था कि इसमें मेरिट को नजरअंदाज किया जाता है और ऐसे जज नियुक्त होते हैं, जो ऊंचे और बड़े लोगों को राहत देते हैं और आम आदमियों के मामलों में नाकाम होते हैं।


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रविवार, 26 अप्रैल 2020

दक्षिणी अलगाववादियों ने अदन पर कब्जे का दावा किया

दक्षिणी अलगाववादियों ने अदन पर कब्जे का दावा किया



एजेंसी
सना। यमन के दक्षिणी अलगाववादियों ने देश की अंतरराष्ट्रीय रूप से मान्यता प्राप्त सरकार के साथ शांति समझौता तोड़ दिया और क्षेत्रीय राजधानी अदन पर कब्जा करने का दावा किया जिससे दोनों पक्षों के बीच लड़ाई शुरू होने का खतरा पैदा हो गया है।
एक बयान में अलगाववादी ‘सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल’ ने आपातकाल की घोषणा की और कहा कि वह अहम दक्षिणी बंदरगाह शहर तथा अन्य दक्षिणी प्रांतों का ‘शासन स्वयं’ करेगी। संयुक्त अरब अमीरात के समर्थन वाले अलगाववादियों ने सऊदी अरब द्वारा समर्थित यमन सरकार पर भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन के आरोप लगाए हैं।
यमन सरकार ने अलगाववादियों के कदम को खारिज कर दिया। विदेश मंत्री मोहम्मद अब्दुल्ला अल-हदरामी ने सऊदी अरब से रुख स्पष्ट करने और तथाकथित ट्रांजिशनल काउंसिल के जारी विद्रोह के खिलाफ निर्णायक कदम उठाने का आह्वान किया।
दोनों पक्षों के बीच यह तनातनी देश के गृह युद्ध का एक और जटिल पहलू है। एक ओर अलगाववादी हैं और दूसरी ओर पूर्व राष्ट्रपति आबिद रब्बो मंसूर हादी की वफादार सेनाएं। दोनों ने यमन के शिया हूती विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी अरब के नेतृत्व में एक साथ मिलकर लड़ाई लड़ी थी।


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अखबारों को बचाने के लिए आर्थिक पैकेज

आल इंडिया स्माल एंड मीडियम न्यूजपेपर्स फेडरेशन की मांग
अखबारों को बचाने के लिए आर्थिक पैकेज



संवाददाता
देहरादून। आल इंडिया स्माल एंड मीडियम न्यूजपेपर्स फेडरेशन ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर अखबारों को बचाने के लिए आर्थिक पैकेज दिये जाने की मांग की है। फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरिन्दर सिंह ने लघु और मझोले अखबारों की स्थिति पर चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री को देश की बड़ी समाचार एजेन्सी यूएनआई व पीटीआई की स्थिति से अवगत कराया है जिनमें यूएनआई में कार्यरत पत्रकारों को पिछले 4 वर्षों से वेतन नहीं मिल पा रहा है और पीटीआई की वित्तीय स्थिति भी गंभीर है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लिखे अपने पत्र में फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरिन्दर सिंह ने अवगत कराया कि प्रिंट मीडिया वर्ष 2016 के बाद से ही विज्ञापनों की भारी कमी के कारण आर्थिक दबाव में है। पिछलेे वर्षों में लगातार आर्थिक मंदी के कारण प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया संस्थानों में कर्मचारियों की छटनी से हजारों लोगों को अपनी नौकरी गंवानी पड़ी। वर्ष 2018-19 में प्रेस ट्रस्ट आफ इंडिया पीटीआई से भी काफी लोगों को नौकरी से हटाया गया, जबकि यूनाइटेड न्यूज आफ इंडिया यूएनआई की हालत काफी खराब है, यहां तक कि यूएनआई में पत्रकारों का वेतन करीब चार वर्ष का लम्बित है। पिछलेे पांच वर्षों में कोई नया समाचार पत्र समूह भारत में नहीं उभर सका है और दिन-प्रतिदिन लघु और मझोले समाचार पत्र वित्तीय संकट के कारण बंद होते जा रहे हैं। 
राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरिन्दर सिंह ने अपने पत्र में प्रधानमंत्री से मांग की कि कोरोना संक्रमण के कारण देश में लगाये गये लाकडाउन की अवधि में अखबारों को विज्ञापन के मद में हुए नुकसान की प्रतिपूर्ति के लिए आर्थिक पैकेज दिया जाए व सरकार द्वारा प्रचार-प्रसार के लिए निर्धारित बजट को बढ़ाया जाए। समाचार पत्रों, इलैक्ट्रिोनिक मीडिया संस्थान एवं समाचार एजेंसियों में कार्य करने वाले संपादक, संवाददाताओं व छायाकारों का न्यूनतम 50 लाख रुपए का जीवन बीमा कराया जाए। उन्हांेने मांग की कि देश की प्रतिष्ठित समाचार एजेंसियों को बचाने के लिए विशेष कदम उठाये जाएं व सरकार द्वारा ब्यूरो आपफ आउटरीच कम्युनिकेशन डीएवीपी द्वारा जारी होने वाले विज्ञापनों में लघु और मझोले समाचार पत्र को वरीयता दी जाये।
गुरिन्दर सिंह ने बताया कि विश्वव्यापी कोरोना कोविड-19 के संक्रमणकाल में हमारा पूरा देश जहां इस वायरस के संक्रमण के खिलाफ जंग लड़ रहा है वहीं मीडिया क्षेत्र में काम करने वाले कर्मवीर भी पूरी जी जान से इस लड़ाई में जुटे हैं। अपने निजी संसाधनों के द्वारा मीडिया संस्थान कोरोना से लड़ने में सरकार के दिशानिर्देशों को जन-जन तक पहुंचाने व आम जनमानस को जागरूक करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे समय में सरकारों द्वारा लघु व मझोले समाचार पत्रों को आर्थिक पैकेज व इनमें कार्यरत मीडियाकर्मियों को जीवन बीमा सुरक्षा आदि दी जानी चाहिए।
गौरतलब है कि फेडरेशन देशभर के लघु एवं मझोले समाचार पत्रों के प्रकाशकों-स्वामियों की अग्रणी संस्था है। विभिन्न प्रदेशों में कार्यरत अशोक कुमार नवरत्न, एलसी भारतीय, बीएम शर्मा, दीपक सिंह, बीआर रामामूर्ति, अमित पात्रो, अनवर अली खान, दिनेश शक्ति त्रिखा, सुधीर पांडा, एचयू खान, शिवशरण सिंह गहरवार, महेश अग्रवाल, मलय बनर्जी, पवन सहयोगी, संजय कुमार शर्मा व श्याम सुंदर बंसल आदि अपने प्रदेशों में मीडियाकर्मिर्यों व प्रकाशकों की समस्याओं को बेहतर तरीके से उठा रहे हैं और उनके निवारण के लिए प्रयत्नशील हैं।


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मीडिया और राजनीति के संबंधों पर बहस

 


अर्नब को परेशान करने के लिए देश के कोने-कोने में केस दर्ज कराना लोकतांत्रिक व्यवहार नहीं 
मीडिया और राजनीति के संबंधों पर बहस



प0नि0ब्यूरो
देहरादून। टीवी पत्रकार अर्नब गोस्वामी पर हमले के बाद मीडिया और राजनीति के संबंधों पर बहस छिड़ गई है। इस बहस में अर्नब के आलोचकों और उनके समर्थकों की अपनी अपनी दलीलें है। वैसे तो आजकल सवाल उठाने वाले पत्रकार खुद भी सवालों के घेरे में हैं। 
टीवी पत्रकार अर्नब गोस्वामी पर हमले के बाद मीडिया और राजनीति के संबंधों पर बहस तेज हो गई है। एक जाने माने न्यूज चैनल के मालिक और सेलिब्रिटी एंकर पर हमले की खबर के बाद सोशल मीडिया पर बहस और चर्चा दोनों चल निकली है। अर्नब गोस्वामी रिपब्लिक टीवी के मालिक हैं और अपने चैनल के चर्चित एंकर भी है। 22 अप्रैल की रात उन्होंने एक वीडियो संदेश में बताया कि रात के करीब 12.15 बजे उनके घर से थोड़ी ही दूर मोटरसाइकिल सवार दो अंजान लोगों ने उनकी गाड़ी पर हमला किया, गाड़ी के शीशे तोड़ने की कोशिश की और गाड़ी पर कोई लिक्विड फेंका।
वीडियो में अर्नब गोस्वामी ने बताया है कि गाड़ी में बैठे वह और उनकी पत्नी किसी तरह से खुद को बचा कर अपनी बिल्डिंग में घुस गए। उनके अनुसार उनकी बिल्डिंग के चौकीदारों ने उन्हें बताया कि हमलावर युवा कांग्रेस के सदस्य थे और उन्हें कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने अर्नब को सबक सिखाने के लिए भेजा था। 
अर्नब ने हमले की शिकायत पुलिस में की। पुलिस ने मामला दर्ज किया और खबर है कि दो लोगों को हिरासत में ले भी लिया गया। हालांकि पुलिस ने इनकी पहचान के बारे में कुछ नहीं बताया है। हमले के कुछ घंटे पहले अर्नब ने अपने एक कार्यक्रम में महाराष्ट्र के पालघर में हुई दो साधुओं और उनके ड्राइवर की लिंचिंग का मामला उठाया था और इस घटना पर कांग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी की चुप्पी पर सवाल उठाया था लेकिन सवाल उठाते उठाते उन्होंने सोनिया गांधी पर कई आरोप भी लगा दिए।
उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी जहां उनकी पार्टी की सरकार है उस राज्य में साधुओं को पीट पीट कर मारे जाने पर मन ही मन में खुश हैं और इस बारे में वो इटली में रिपोर्ट भेजेंगी कि जहां मैंने सरकार बनवा ली वहां मैं हिन्दू संतों को मरवा रही हूं।
अर्नब और उनके टीवी चैनल पर आरोप हैं कि वह सरकार की तरफदारी वाली पत्रकारिता करते हैं। आरोप यह भी लगते हैं कि यह चैनल शुरू ही हुआ था ऐसे लोगों की वित्तीय मदद से जो या तो भाजपा के सदस्य हैं या भाजपा से किसी ना किसी तरह से जुड़े हुए हैं।
मई 2017 में जब ये चैनल शुरू हुआ था तब इसकी अभिभावक कंपनी एआरजी आउटलायर एशियानेट न्यूज प्राइवेट लिमिटेड में उद्योगपति और राजनेता राजीव चंद्रशेखर का निवेश था। राजीव चंद्रशेखर उस समय राज्यसभा के निर्दलीय सदस्य थे लेकिन सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन का हिस्सा भी थे। अप्रैल 2018 में राजीव ने आधिकारिक रूप से भाजपा की सदस्यता ले ली और एआरजी आउटलायर के बोर्ड से इस्तीफा दे दिया।
अर्नब और उनके चैनल के किसी भी दल के साथ कैसे भी संबंध हों, लेकिन अर्नब पर हमले की घटना ने उन्हीं सवालों को खड़ा कर दिया जो पत्रकारों पर होने वाले हर हमले के बाद पूछे जाते हैं। पत्रकारों पर हमला निंदनीय है। उनकी पत्रकारिता पर सवाल है तो उस पर बहस की जा सकती है या उन्हें देखना पढ़ना बंद किया जा सकता है। अगर कोई रिपोर्ट मनगढ़ंत हो तो उसके खिलाफ पुलिस या अदालतों में शिकायत कर सकते है।
किसी को परेशान करने के लिए देश के कोने-कोने में केस दर्ज कराना लोकतांत्रिक व्यवहार नहीं कहलायेगा। जबकि कांग्रेस यही कर रही है। भाजपा के कार्यकर्ता भी कई मामलों में ऐसा करते नजर आते हैं। सवाल ये भी है कि यदि कांग्रेस अर्णब गोस्वामी के खिलाफ केस दायर करने के बारे में गंभीर होती तो एक ही जगह केस करती और सारे साक्ष्य और प्रमाण के साथ प्रयास करती कि केस अपनी परिणति तक पहुंचे। हर पत्रकार और मीडिया संस्थान को संविधान के अनुच्छेद 19 (ए) के तहत संरक्षण प्राप्त है और उन पर हमला वास्तव में लोकतंत्र पर हमला है।
यहां पर इस बात पर गौर जरूर करें कि अर्नब सही है या गलत, इतना अहम नही रह जाता। बल्कि लोकतंत्र पर हमला और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की पैरवी करने वालों की पोल खुलती है। जो सदैव दोहरे मानदंड़ के साथ अपना एजेंड़ा देशभर में चलाते रहते है। ऐसे लोगों के हिसाब से बातों हो तो सब ठीक वरना आलोचन के लिए किसी भी हद को पार कर जाना, इनका घृणित चेहरा ही उजागर करता है।  


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शनिवार, 25 अप्रैल 2020

महंगाई भत्ता रोके जाने के खिलाफ याचिका

महंगाई भत्ता रोके जाने के खिलाफ याचिका



सरकार के फैसले के खिलाफ सेना के रिटायर्ड अफसर पहुंचे सुप्रीम कोर्ट, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी निशाना साधा
एजेंसी
नई दिल्ली। याचिकाकर्ता का कहना है कि जब पूरी दुनिया में कोरोना वायरस लोगों के लिए घातक साबित हो रहा है, खासकर बुजुर्गों के लिए तो ऐसे समय में पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ते में कटौती का फैसला उचित नहीं है
केंद्र सरकार के कर्मचारियों का महंगाई भत्ता रोकने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सेना के एक रिटायर्ड अफसर ने इस मुद्दे पर शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया है। दायर याचिका में महंगाई भत्ता कटौती के फैसले को वापस लेने के लिए कोर्ट की ओर से केंद्र सरकार को निर्देश दिए जाने की मांग की गई है।
सेवानिवृत्त मेजर ओंकार सिंह गुलेरिया ने यह याचिका दायर की है। कैंसर पीड़ित ओंकार सिंह गुलेरिया ने शीर्ष कोर्ट के समक्ष कहा है कि बीमार पत्नी के साथ किराये के घर में रहता हूं और मेरी आय का एक मात्र स्रोत मासिक सैन्य पेंशन है। ऐसे लाखों सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं जो पेंशन पर निर्भर हैं, लेकिन महंगाई भत्ता रोके जाने के केंद्र सरकार के फैसले से परेशान हैं।
याचिकाकर्ता का कहना है कि जब पूरी दुनिया में कोरोना वायरस लोगों के लिए घातक साबित हो रहा है, खासकर बुजुर्गों के लिए तो ऐसे समय में महंगाई भत्ते में कटौती का फैसला उचित नहीं है। हम जैसे पेंशनभोगियों के लिए पेंशन ही एक मात्र सहारा है। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि वह केंद्र सरकार को प्रधानमंत्री के उस बात का पालन करने का निर्देश दे, जिसमें उन्होंने कहा था कि वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल करें और वेतन में कटौती न करें, दूसरों की तुलना में वरिष्ठ नागरिकों के लिए कोविड-19 अधिक खतरनाक है।
वहीं पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सरकारी कर्मचारियों और सैनिकों के भत्ते काटने को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में वृद्धि नहीं करने के सरकार के कदम की आलोचना करते हुए कहा है कि इस वक्त केंद्रीय कर्मियों एवं सैनिकों के लिए मुश्किल पैदा करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस महामारी से जूझ कर जनता की सेवा कर रहे केंद्रीय कर्मचारियों, पेंशन भोगियों और देश के जवानों का महंगाई भत्ता काटना सरकार का संवेदनहीन तथा अमानवीय निर्णय है।


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डीए फ्रीज होने से सरकारी कर्मचारी का कितना नुकसान!

डीए फ्रीज होने से सरकारी कर्मचारी का कितना नुकसान!



एक जनवरी 2020 से जो डीए की किस्त ड्यू हुई है, उस अवधि के लिए तो सरकार ने 4 फीसदी के डीए बढ़ोतरी की घोषणा भी कर दी थी लेकिन इस हाइक को प्रफीज कर दिया गया है। एक जुलाई 2020 और एक जनवरी 2021 से लगने वाली किस्त भी बंद। 
प0नि0डेस्क
नई दिल्ली। कोरोना वायरस के दंश से देश की अर्थव्यवस्था में इस समय आर्थिक गतिविधियां ठप पड़ी हैं। सरकार का राजस्व घटा है लेकिन इस समय सरकार का काम बढ़ गया है और खर्च भी बढ़ा है। इनमें संतुलन बिठाने के लिए सरकार ने सरकारी कर्मचारियों का डीए या महंगाई भत्ता एक जुलाई 2021 तक फ्रीज करने का फैसला लिया है। ऐसे में सवाल यह कि इससे कर्मचारियों और अधिकारियों को कितना घाटा होगा।
बता दें कि सरकार के इस फैसले से सरकारी कर्मचारियों के डीए की कम से कम तीन किस्त तो गई। एक जनवरी 2020 से जो डीए की किस्त ड्यू हुई है, उस अवधि के लिए तो सरकार ने 4 फीसदी के डीए बढ़ोतरी की घोषणा भी कर दी थी। इसके लिए बीते मार्च के दूसरे पखवाड़े में बकायदा मंत्रिमंडल ने इससे जुड़ा एक प्रस्ताव भी पारित किया लेकिन इस पर अमल होता, इससे पहले ही लाकडाउन हो गया। 
इस फैसले से किस स्तर के कर्मचारी और अधिकारी को कितना घाटा होगा, इसके लिए इन दिनों एक टेबल इनके बीच तेजी से घूम रहा है। वेतन-भत्तों के विशेषज्ञ अधिकारियों द्वारा बनाए गए इस टेबल में बताया गया है कि सरकारी नौकरी के पायदान में सबसे नीचे आने वाले चपरासी और खलासी की बात करें तो इस समय उनका बेसिक पे 18,000 रुपये है। इस अवधि मे उन्हें कुल मिला कर 38,880 रुपये का नुकसान हो रहा है। जिनका बेसिक पे बढ़ता गया, उनका नुकसान बढ़ता गया। सेक्शन अफसर पद पर कई साल कम कर चुके अधिकारी या अंडर सेक्रटरी का बेसिक पे जनवरी 2020 में यदि 83,300 रुपये होगा, तो इनको जून 2021 तक 158,628 रुपये का नुकसान हो चुका होगा। इसी तरह सरकारी ओहदे में सबसे उपर माने जाने वाले कैबिनेट सेक्रटरी का अधिकतम (एपेक्स लेवल) बेसिक पे 157,900 रुपये होगा और उक्त अवधि में उनका नुकसान 341,064 रुपये का होगा।
केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों के इन भत्तों को प्रफीज करने से वित्तीय वर्ष 2020-21 और 2021-2022 में सरकार को कुल 37,530 करोड़ रुपए की बचत होगी। सरकार के इस फैसले से केंद्र सरकार के करीब 48 लाख कर्मचारी और 65 लाख पेंशनर प्रभावित होंगे। कुल मिलाकर एक करोड़ 1.13 करोड़ परिवार इस फैसले की जद में होंगे।
आमतौर पर केंद्र सरकार के डीए को ही राज्य सरकारें भी लागू करती हैं। इसलिए माना जा रहा है कि जब केंद्र सरकार ने इन भत्तों को फ्रीज कर दिया है, तो राज्य सरकार भी अपने कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए ऐसा ही करेंगे। यदि ऐसा हुआ तो राज्यों का इस मद में 82,566 करोड रुपये की बचत होगी। यदि राज्यों एवं केंद्र सरकार की कुल बचत को जोड़ दिया जाए तो 1.20 लाख करोड़ रुपए की बचत होगी।


 


लाकडाउन के दौरान सास-बहु के झगड़े टालने के उपाय

लाकडाउन के दौरान सास-बहु के झगड़े टालने के उपाय



प0नि0डेस्क
देहरादून। देशभर में कोरोना वायरस पर नियंत्रण पाने के लिए लाकडाउन लगाया गया है। इसकी वजह से सभी लोगों को घर पर ही रहने के निर्देश दिए गए हैं। कई लोगों को परिवार के साथ वक्त बिताने का मौका मिल रहा है तो कई लोग ऐसे भी हैं जो घर में खुद को कैद समझ रहे हैं। लाकडाउन के बीच ऐसी खबरें सामने आयी हैं जिनके मुताबिक घर पर समय बिताने से रिश्तों में नयी जान आ गयी। एक दूसरे के लिए वही प्यार और अपनापन जाग उठा है।
मगर हर सिक्के के दो पहलु होते हैं। इस लाकडाउन के कारण ज्यादा समय साथ रहने से कुछ रिश्तों में तनाव भी आ रहा है। लाकडाउन के दौरान सास-बहु के बीच नोकझोंक बढ़ गयी है। साथ रहकर भी अपनी सास-बहु के साथ रिश्तों में दूरी आ रही है तो इसे कम करने के लिए कुछ उपाय काम आ सकते हैं।
सास और बहु के बीच झगड़ा होता रहता है। ऐसे में बहु को मां दुर्गा या गौरी माता को सुनहरे लाल रंग की साड़ी चढ़ानी चाहिए। इसके बाद इसे अपनी सास को भेंट कर दें। अगर सास की इच्छा हो तो वो भी ये काम कर सकती हैं।
यदि विवाद होता रहता है तो दोनों को ही चांदी का चौकोर टुकड़ा या फिर ठोस गोली अपने पास रखनी चाहिए। अगर लड़ाई अधिक हो रही है तो दोनों को चांदी की चेन गले में पहन लेनी चाहिए। साथ ही दोनों एक दूसरे से सफेद वस्तु देने और लेने से बचें।
मान्यता है कि बहु को रोज प्रातः उठकर स्नान आदि के बाद गुड़ मिला हुआ जल भगवान सूर्य को चढ़ाना चाहिए। इससे सास प्रसन्न होती है।
यदि आप अपनी सास से संबंध मधुर बनाए रखना चाहती हैं तो प्रतिदिन पूजा के बाद माथे पर हल्दी या केसर की बिंदी लगाएं।
अगर आप अपने रिश्ते को बेहतर बनाने का प्रयास कर रहे हैं तो ये उपाय काम आ सकता है। इसके मुताबिक सूर्याेदय से पहले ही घर में झाड़ू लगा लें और कूड़ा घर से बाहर कर दें।
यदि बहु बिना किसी कपट और साफ मन से अपनी सास को 12 लाल और 12 हरी कांच की चूड़ियां भेंट करती हैं तो दोनों के बीच के रिश्ते में सुधार आता है।


कोरोना वायरस चीनी वैज्ञानिकों के पागलपन भरे प्रयोग का परिणाम! 

कोरोना वायरस चीनी वैज्ञानिकों के पागलपन भरे प्रयोग का परिणाम! 



एक चर्चित रूसी वैज्ञानिक ने दावा किया कि चीनी वैज्ञानिकों के पागलपन भरे प्रयोग के कारण यह वायरस इंसान को संक्रमित करने में सफल हो गया।
एजेंसी
मास्को। रूस के एक बहुचर्चित माइक्रोबायोलाजिस्ट का दावा है कि वुहान के वैज्ञानिक प्रयोगशाला के अंदर पागलपन भरे प्रयोग कर रहे थे। इन्हीं प्रयोगों का परिणाम कोरोना वायरस है। दुनियाभर में चर्चित प्रोफेसर पीटर चुमाकोव ने दावा किया कि वुहान में चीनी वैज्ञानिक वायरस की रोग पैदा करने की क्षमता को परख रहे थे और उनका कोई गलत इरादा नहीं था। हालांकि उन्होंने जानबूझकर इस जानलेवा वायरस को जन्म दिया।
मास्को में एक संस्थान के मुख्य शोधकर्ता प्रोफेसर चुमकोव ने कहा कि चीन के वुहान स्थित प्रयोगशाला में वैज्ञानिक पिछले 10 साल से विभिन्न तरीके के कोरोना वायरस को विकसित करने में सक्रिय रूप से लगे हुए थे। संभवतः चीनी वैज्ञानिकों ने ऐसा रोग पैदा करने वाली नस्ल पैदा करने के लिए नहीं बल्कि उनकी रोग पैदा करने की क्षमता को परखने के लिए ऐसा किया।
प्रफेसर चुमकोव ने कहा कि मेरा मानना है कि चीनी वैज्ञानिकों ने पागलपन भरे प्रयोग किए। उदाहरण के लिए उन्होंने जीनोम को अंदर डाला जिससे वायरस को इंसान की कोशिकाओं को संक्रमित करने की क्षमता हासिल हो गई। अब इन सब का विश्लेषण किया जा रहा है। वर्तमान कोरोना वायरस के पैदा होने की तस्वीर अब धीरे-धीरे साफ हो रही है।
प्रोफेसर चुमकोव ने कहा कि कई चीजों को वायरस के अंदर डाला गया है जिसने जीनोम के स्वाभाविक सीक्वेंस का स्थान ले लिया है। इसी वजह से कोरोना वायरस के अंदर बेहद खास चीजें आ गई हैं। मुझे आश्चर्य हो रहा है कि इस वायरस के पीछे की कहानी लोगों के पास बहुत धीरे-धीरे आ रही है।
उन्होंने कहा कि मैं समझता हूं कि इस पूरे मामले की एक जांच होगी और इसके बाद इस तरह के खतरनाक वायरस के जीनोम को रेगुलेट करने के लिए नए नियम बनाए जाएंगे। अभी इस वायरस के लिए किसी जिम्मेदार ठहराना ठीक नहीं होगा। प्रोफेसर चुमकोव ने कहा कि उन्हें लगता है कि चीनी वैज्ञानिक एचआईवी की वैक्सीन बनाने के लिए इस वायरस की अलग-अलग नस्ल बना रहे थे और उनका कोई गलत इरादा नहीं था।


शुक्रवार, 24 अप्रैल 2020

मदद के नाम पर चंदे का धंधा चल पड़ा

सहायता कीजिये पर यकीन के साथ की वह जरूरतमंदों को मिले
मदद के नाम पर चंदे का धंधा चल पड़ा



प0नि0ब्यूरो
देहरादून। कोरोना वायरस के चलते लागू लाकडाउन ने बड़ी संख्या में लोगों को मदद का दरकारी बना दिया है। ऐसे लोगों में ज्यादातर रोज कमाने खाने वाला मजदूर वर्ग शामिल है। हालांकि जैसे जैसे लाकडाउन की अवध् िमें बढ़ोतरी हो रही है, इसके दायरे में अन्य लोग भी आते जा रहें है। इस बीच मदद के नाम पर कुछ ठगी करने वाले गिरोह तो बहुत से साइबर ठगी करने वाले भी सक्रिय हो गए है। इस लिहाज से मदद देने वालों का भी दायित्व बन जाता है कि वे इमदाद देते समय सुनिश्चित कर लें कि उनके द्वारा दी जा रही इमदाद सही लोगों तक पहुंच रही है।
देशभर में कोरोना संकट के चलते लाकडाउन लागू है। तमाम काम धंधे बंद हो गए है और बड़ी संख्या में लोगों को खाने पीने के लाले पड़ गए है। इनमें बहुत से लोग ऐसे है जो लाकडाउन के कारण रास्तों में फंसे हुए है। हालांकि सरकारें अपने अपने सिस्टम से उनको राहत पहुंचाने का प्रयास कर रहीं है। वहीं बहुत से समाज सेवी भी इस काम में अपने अपने स्तर से योगदान दे रहें है। लेकिन इस बीच बहुत से अवांछित लोग चंदे का धंधा करने में लगे हुए है। 
ऐसे माहौल में जरूरी हो जाता है कि जो लोग जरूरतमंदों को सहायता पहुंचाना चाहते है, वे सर्तक रहें और यकीन करें कि उनकी मदद वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंच रही है। इस काम के लिए सबसे सही तरीका पीएम केयर्स फंड़ एवं मुख्यमंत्री राहत कोष जैसे कोष ही है। हालांकि कई अन्य संस्थाएं भी ऐसी मदद में भागीदारी कर रहीं है। लेकिन ज्यादातर मामलों में देखने को आया है कि उनमें पारदर्शिता का नितांत अभाव है। वहीं ज्यादातर संस्थाएं ऐसे चंदों के लिए अधिकृत भी नही है। वहीं बहुत से लोग तो या तो पैसा बनाने के लिए या अपना नाम चमकाने की खातिर ही मदद का दिखावा कर रहीं है। 
चूंकि कोरोना संकट के समय जरूरतमंदों को मदद का मानवीय पहलू अहम है लेकिन इसके साथ ही यह भी जरूर है कि जिसकी मदद हो, उसके स्वाभिमान को भी आहत न किया जाये। लेकिन अति उत्साह में मददगार कई बार राई का पहाड़ दर्शाकर तिया पांचा एक किए दे रहें है। यह मदद के असूलों के विपरीत है। इससे तो बेहतर है कि मदद करने के इच्छुक लोग सरकारी तंत्र पर भरोसा रखें और सरकारी फंड्स में ही अपना योगदान दें, तो बेहतर होगा।


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हरियाणा और प0बंगाल में पत्रकारों को 10 लाख रुपये का जीवन बीमा

हरियाणा और प0बंगाल में पत्रकारों को 10 लाख रुपये का जीवन बीमा



ऑल इंडिया स्मॉल एंड मीडियम न्यूजपेपर्स फेडरेशन द्वारा सभी प्रदेशों की सरकारों को लिखे गये थे पत्र
संवाददाता
देहरादून। ऑल इंडिया स्मॉल एंड मीडियम न्यूजपेपर्स फेडरेशन ने हरियाणा व प0 बंगाल सरकार द्वारा पत्रकारों को 10 लाख रुपये का जीवन बीमा दिए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इन प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों मनोहर लाल खट्टर व ममता बनर्जी को धन्यवाद ज्ञापित किया।
फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरिन्दर सिंह ने बताया कि लंबे समय से पत्रकारों को जीवन बीमा दिए जाने की जरूरत महसूस हो रही थी। इसके लिए फेडरेशन द्वारा सभी प्रदेशों की सरकारों को पत्र लिखकर शीघ्र जीवन बीमा व आवश्यक सुरक्षा दिए जाने की मांग की गई थी। 
उन्होंने कहा कि देश में कोरोना वायरस के संक्रमण काल में पत्रकार अपने जीवन व परिवार के भविष्य को दांव पर लगाकर पत्रकारिता का कार्य कर रहे हैं। ऐसे में उनके जीवन एवं भविष्य की चिंता किया जाना जरूरी है। हरियाणा व प0 बंगाल सरकार द्वारा पत्रकारों को 10 लाख रुपये का जीवन बीमा दिया जाना प्रशंसनीय है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अन्य राज्य सरकारें भी उनके राज्य में कार्य कर रहे पत्रकारों को जीवन बीमा व अन्य सुरक्षा उपलब्ध कराएगी।
गौरतलब है कि फेडरेशन लघु एवं मझोले समाचार पत्रों के प्रकाशकों-स्वामियों की अग्रणी संस्था है जिसमें हजारों प्रकाशकों के साथ-साथ इनमें कार्यरत पत्रकार भी संगठन से जुडे हुए हैं। संस्था पिछले कई दशक से पत्रकारों व प्रकाशकों के हितों के कार्य कर रही है।
फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरिन्दर सिंह ने बताया कि कोरोना संक्रमण के कारण देश भर में लागू किये गये लॉकडाउन के दौरान समाचार पत्र भी विषम स्थिति में गुजर रहे हैं। लघु एवं मझोले समाचार पत्रों के प्रकाशकों-स्वामियों के समक्ष और गम्भीर स्थिति है। लॉकडाउन के समाचार पत्रों की प्रसार संख्या घट रही है तथा निजी क्षेत्रों से मिलने वाले विज्ञापन समाप्त हो गये हैं। इस दौरान समाचार पत्रों के वितरण व सेनिटाइजेशन आदि खर्च बढा है। समाचार पत्रों के स्वामियों को लगातार समाचार पत्र भी छापना है और संस्थान में कार्यरत पत्रकार और गैर-पत्रकार कर्मचारियों का भी समय से वेतन देना है। ऐसे में सरकार द्वारा लघु एवं मझोले समाचार पत्रों के लिए एक आर्थिक पैकेज दिये जाने की जरूरत है।
फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने विभिन्न प्रदेशों में कार्यरत बी0एम0 शर्मा, अशोक कुमार नवरत्न, दीपक सिंह, मनोरंजन मोहंती, एल0सी0 भारतीय, विजय सूद, दिनेश शक्ति त्रिखा, सुधीर पांडा, महेश अग्रवाल, मलय बनर्जी, एच0यू0 खान, पवन सहयोगी व संजय कुमार शर्मा आदि की प्रशंसा की कि वह अपने प्रदेशों में मीडियाकर्मिर्यों व पब्लिसरों की समस्याओं को बेहतर तरीके से उठा रहे हैं और उनके निवारण के लिए सतत् प्रयासरत हैं।


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अरुणाचल में नया पुल बनाया गया

अरुणाचल में नया पुल बनाया गया



सेना तक रसद पहुंचाने में मददगार होगा
एजेंसी
नई दिल्ली। भारत ने अरुणाचल प्रदेश के दापोरिजो में एक नया ब्रिज बनाया है। इसका इस्तेमाल सेना भी कर सकती है। ब्रिज की भार क्षमता यानी लोड कैपेसिटी 40 टन है। यह क्षेत्र चीन सीमा से लगा हुआ है। 
गौर हो कि यहां कनेक्टिविटी की बहुत जरूरत थी। नई सड़कें और यह ब्रिज सेना को रसद पहुंचाने में भी बहुत मददगार साबित होंगे। मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत ने सीमा से लगे क्षेत्रों में इन्फ्रास्ट्रक्चर पर तेजी से काम किया है। सरकार का कहना है कि बुनियादी सेवाओं में विस्तार की वजह कोई देश नहीं बल्कि यहां के लोगों का जीवन आसान बनाना है।  
पूर्वी सीमा पर भारत ने 74 सड़कें तैयार कर ली हैं। 20 पर काम चल रहा है जो अगले साल तक पूरा हो जाएगा। सड़कों का यह जाल तैयार होने से इस क्षेत्र के 431 गांवों को कोरोना के इस दौर में मदद भी आसानी से पहुंचाई जा सकेगी।  



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गुरुवार, 23 अप्रैल 2020

गैस सब्सिडी अकाउंट में आई या नहीं! 

गैस सब्सिडी अकाउंट में आई या नहीं! 



घर बैठे मोबाइल के जरिए मिनटों में पता लगाएं
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना में बांटे गए कनेक्शन पर अब तक जो सब्सिडी 174.86 रुपए प्रति सिलेंडर थी, उसे बढ़ाकर 312.48 रुपए प्रति सिलेंडर कर दिया गया है।
प0नि0डेस्क
देहरादून। रसोई गैस सिलेंडर की कीमतें हर महीने तय होती हैं। पिछले कुछ समय से लगातार सिलेंडर के दाम में इजाफा देखने को मिला है। यही वजह है कि केन्द्र सरकार ने घरेलू गैस उपभोक्ताओं को राहत दी है। सरकार ने एलपीजी सिलेंडर पर मिल रही सब्सिडी को दोगुना कर दिया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के मुताबिक दिल्ली में अब तक 14.2 किलो के सिलेंडर पर 153.86 रुपए की सब्सिडी मिलती थी, जिसे बढ़ाकर 291.48 रुपए कर दिया गया 
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना में बांटे गए कनेक्शन पर अब तक जो सब्सिडी 174.86 रुपए प्रति सिलेंडर थी, उसे बढ़ाकर 312.48 रुपए प्रति सिलेंडर कर दिया गया है। इंडियन आयल की वेबसाइट के मुताबिक दिल्ली में 14.2 किलो के गैस सिलेंडर की कीमत 144.50 रुपए बढ़कर 858.50 रुपए हो गई है। एलपीजी सिलेंडर पर ज्यादातर लोगों को सब्सिडी मिलती है। डायरेक्ट कैश ट्रांसफर स्कीम के जरिए लोगों के खातों में सब्सिडी का पैसा ट्रांसफर किया जाता है।
कई शिकायतें सामने आई हैं कि गैस सब्सिडी को किसी और खाते में ट्रांसफर कर दिया गया। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि आपके खाते में नियमित सब्सिडी आ रही है या नहीं। बैंक अकाउंट में सब्सिडी क्रेडिट हुई है यह जानने के लिए बैंक जाने की जरूरत नहीं है। घर बैठे भी यह पता लगाया जा सकता है कि रकम ट्रांसफर की गई है या नहीं। इसके लिए कुछ स्टेप्स फोलो करने होंगे। अपने मोबाइल के जरिए इसका पता लगाया जा सकता है। 
ये स्टेप्स करें फोलो- सबसे पहले Mylpg.in वेबसाइट पर जाएं। वेबसाइट के होम पेज पर तीन एलपीजी सिलेंडर कंपनियों का टैब तस्वीर के साथ होगा। अपनी कंपनी जिसका सिलेंडर लेते हैं का सेलेक्शन करना होगा। इंडेन गैस का सिलेंडर लेते हैं तो इसके टैब पर क्लिक करें। सब्सिडी आई या नहीं इसे चेक करने के लिए एक नया इंटरफेस खुलेगा। बार मैन्यू में जाकर ^Give your feedback online* पर क्लिक करें।
अपना मोबाइल नंबर, एलपीजी कंज्यूमर आईडी, राज्य का नाम, डिस्ट्रीब्यूटर की जानकारी भर दें। इसके बाद ^Feedback Type* पर क्लिक करें। ^Complaint* विकल्प को चुनकर ^Next* का बटन क्लिक करें। नए इंटरफेस में आपकी बैंक डिटेल्स सामने होंगी। डीटेल्स से पता लगेगा कि सब्सिडी की रकम खाते में आई या नहीं।


पोखरियाल ने  #MyBookMyFriend से जुड़ने की अपील की

‘निशंक’ ने विश्व पुस्तक दिवस पर सोशल मीडिया पर #MyBookMyFriend अभियान की शुरुआत की
पोखरियाल ने  #MyBookMyFriend से जुड़ने की अपील की



एजेंसी
नई दिल्ली। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने विश्व पुस्तक दिवस के मौक़े पर सभी को हार्दिक शुभकामनाएं दीं और इस अवसर पर सोशल मीडिया पर #MyBookMyFriend अभियान की शुरुआत की। पोखरियाल ने इस अवसर पर एक विडियो संदेश जारी कर कहा कि जब आप एक पुस्तक खोलते हैं तो आप एक नई दुनिया खोलते हैं। उन्होंने कहा कि किताबें व्यक्ति की सबसे अच्छी दोस्त होती हैं। पुस्तकें सभी को प्रेरित करती हैं और सोचने का नया नज़रिया प्रदान करती हैं। पुस्तकें ज़िंदगी के मुश्किल वक़्त में मार्गदर्शन करने का काम करती हैं।  
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस बार विश्व पुस्तक दिवस लॉक डाउन के साथ मनाया जा रहा है उन्होंने सभी विद्यार्थियों से अपील की कि लॉक डाउन के समय में वो कोर्स की किताबों के अलावा अपनी रुचि की कोई ना कोई किताब ज़रूर पढ़ें, इससे उनको काफ़ी कुछ नया सीखने और जानने का मौक़ा मिलेगा। उन्होंने सभी विद्यार्थियों से आग्रह किया कि आप सभी एक पुस्तक पढ़कर सोशल मीडिया के माध्यम से #MyBookMyFriend के जरिये मुझे उसके बारे में बताएं कि इस समय वो कौन सी पुस्तक पढ़ रहें हैं।
निशंक ने #MyBookMyFriend मुहिम से विद्यार्थियों के साथ ही सभी लोगों से जुड़ने की अपील की है। इसके साथ ही पोखरियल ने सोशल मीडिया पर विभिन्न केंद्रीय मंत्रियों को टैग करके उनसे #MyBookMyFriend अभियान से जुड़ने की अपील की है।
इसके साथ ही केंद्रीय मंत्री ने भारत के विविध क्षेत्रों की प्रमुख हस्तियों को भी इस मुहिम से जुड़ने की अपील की है ताकि इससे सभी देशवासियों को प्रेरणा मिल सके। निशंक ने बताया कि #MyBookMyFriend अभियान अगले 7 दिनों तक चलेगा। उन्होंने इस दौरान इस अभियान में सभी लोगों से अधिक से अधिक जुड़ने की अपील की।


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केंद्र सरकार के कर्मचारियों, पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ते की नई किस्तों पर रोक

केंद्र सरकार के कर्मचारियों, पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ते की नई किस्तों पर रोक



एजेंसी
नयी दिल्ली। कोरोना वायरस महामारी पर काबू पाने में लगी केंद्र सरकार ने बढ़ते आर्थिक बोझ को देखते हुये अपने खर्चों में कटौती करनी शुरू कर दी है। इस दिशा में आगे बढ़ाते हुये सरकार ने अपने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को मिलने वाले महंगाई भत्ते की नई किस्तों पर एक जुलाई 2021 तक के लिये रोक लगा दी है।
सूत्रों से यह जानकारी मिली है। इसमें कहा गया है कि कोविड-19 महामारी के कारण सरकार के खजाने पर बढ़ते दबाव के चलते केंद्र ने एक जनवरी 2020 से लेकर एक जुलाई 2021 के बीच दिए जाने वाले महंगाई भत्ते और महंगाई राहत की किस्तों के भुगतान पर रोक लगाने का फैसला किया है।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक इस कदम से सरकार को चालू वित्त वर्ष 2020-21 और अगले वित्त वर्ष 2021-22 में कुल मिलाकर 37,530 करोड़ रुपये की बचत होगी। हालांकि कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को महंगाई भत्ते के मौजूदा स्तर पर भुगतान होता रहेगा। इस फैसले से 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 61 लाख पेंशनभोगियों पर असर पड़ेगा।
सूत्रों का कहना है कि आमतौर पर इस मामले में राज्य सरकारें भी केंद्र सरकार का अनुसरण करतीं हैं। यदि राज्य सरकारें भी इस अवधि के दौरान कर्मचारियों को मिलने वाले महंगाई भत्ते और पेंशनभागियों की महंगाई राहत की तीन किस्तों का भुगतान नहीं करती हैं तो उन्हें भी 82,566 करोड़ रुपये तक की बचत होगी।
कुल मिलाकर केंद्र और राज्यों के स्तर पर इससे 1.20 लाख करोड़ रुपये की बचत होगी, जिससे कोविड-19 के खिलाफ जारी लड़ाई में मदद मिलेगी।


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सभी डाक कर्मचारियों को 10 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति

सभी डाक कर्मचारियों को 10 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति



एजेंसी
नई दिल्ली। डाक विभाग अनिवार्य सेवाओं के तहत आता है और दिनांक 15.04.2020 के गृह मंत्रालय का.ज्ञा. सं. 40-3/2020-डीएम-1 (ए) के पैरा -11 (पपप) में दुहराया भी गया है। ग्रामीण डाक सेवक सहित डाक कर्मचारी ग्राहकों को मेल डिलीवरी, डाक घर बचत बैंक, डाक जीवन बीमा देने, एईपीएस सुविधा के तहत किसी भी बैंक और किसी भी शाखा से ग्राहकों के दरवाजे तक धन की निकासी को सरल बनाने के विभिन्न दायित्वों का निर्वाह कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त डाक घर स्थानीय राज्य प्रशासन एवं पुलिस अधिकारियों के साथ संपर्क कर देश भर में कोविड-19 किट, फूड पैकेट, राशन एवं अनिवार्य दवाओं आदि की प्रदायगी भी कर रहे हें। इस प्रकार डाक घर विभागीय कर्तव्यों के साथ-साथ कोविड-19 के संकट के समय सामाजिक प्रयोजन की भी सेवा कर रहे हैं।
कोविड-19 की स्थिति के परिप्रेक्ष्य में फैसला किया गया है कि ग्रामीण डाक सेवक (जीडीएस) सहित सभी डाक कर्मचारियों को कर्तव्य निवर्हन के दौरान बीमारी से मृत्यु हो जाने पर 10 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति का भुगतान किया जाएगा। ये दिशानिर्देश जल्द प्रभावी हो जाएंगे और कोविड-19 के संकट की समाप्ति तक पूरी अवधि तक के लिए लागू रहेंगे। 


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प्रशासन के कार्याे में हाथ बंटाने सामने आये पूर्व सैनिक

प्रशासन के कार्याे में हाथ बंटाने सामने आये पूर्व सैनिक



जिलाधिकारी की अपील पर पूर्व सैनिकों द्वारा स्वेच्छा से दी जा रही सेवाएं
संवाददाता
हल्द्वानी। जिलाधिकारी सविन बंसल की अपील पर जिले के अवकाश प्राप्त पूर्व सैनिकों ने कोरोना संक्रमण काल मे प्रशासन के साथ काम करना शुरू कर दिया है। जानकारी देते हुये जिला सैनिक कल्याण अधिकारी आरएस धपोला ने इस बात केी जानकारी दी। 
उन्होंने बताया कि अवकाश प्राप्त ब्रिगेडियर हरिमोहन पंत भीमताल, डा0 पीस भण्डारी, ले0कर्नल डा0 जीसी मिश्रा, कैप्टन डा0 सुशील शर्मा, मेजर बीएस रौतेला, कैप्टन कृपाल सिह कोरंगा, लाल सिह नेगी, सुबेदार मेजर नवीन चन्द्र पोखरियाल रामनगर, नायब सुबेदार बीडी पाण्डे हल्दूचौड, पूरन सिह मेहरा, लां0नायक भुवन सिह डंगवाल एवं पैटी आफिसर आनन्द सिह ठठोला द्वारा जनसामान्य के लिए स्वेच्छा से कार्य कर सेवायें दी जा रही है। 
उन्होने बताया कि जनपद के सेवानिवृत्त सैनिकों एवं पूर्व नौसैनिकों द्वारा प्रधानमंत्री केयर फण्ड में 3,77,011 रूपये तथा मुख्यमंत्री राहत कोष में 50,000 रूपये कोरोना वायरस संक्रमण रोकथाम हेतु योगदान दिया है।
धपोला ने बताया कि यह सभी अवकाश प्राप्त सेना के अधिकारियों एवं पूर्व सैनिकों ने संक्रमण के दौर मे राशन वितरण, स्वास्थ्य सलाह के अलावा मास्क एवं सेनेटाइजर के बारे मे जागरूक कर रहे है।


 


आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने बांटे मॉस्क 

आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने बांटे मॉस्क 



संवाददाता
देहरादून। आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा कोरोना संक्रमण के प्रति सुरक्षा उपायों के तहत शहर के मोथरोवाला क्षेत्र में 200 होम मेड मॉस्कों का वितरण किया गया। 
आम आदमी पार्टी का लक्ष्य कोरोना संक्रमण की इन चुनौतीपूर्ण स्थितियों में ज्यादा से ज्यादा सुरक्षा के उपाय आम लोगों तक पहुंचाना है, इसी के तहत आगे भी मॉस्क के साथ-साथ सेनेटाईजर व साबुन वितरण का कार्य भी जारी रहेगा। 
आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता लॉकडाउन के समय से ही जरूरतमंदों की मदद करने का काम कर रहे हैं। आम आदमी पार्टी उत्तराखण्ड अपने ‘आम आदमी की रसोई’ कार्यक्रम के तहत लगातार जरूरतमंद लोगों के लिये भोजन और राशन भी उपलब्ध करा रही है। 
आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता प्रदेश भर में आपसी सहयोग से यह कार्यक्रम चला रहे हैं, ताकि कोई भी असहाय भूखा ना सो पाये। अब तक हजारों जरूरतमंदों को भोजन व राशन वितरित किया जा चुका है। 
इस अवसर पर आम आदमी पार्टी के उमा सिसौदिया, वीरेन्द्र पोखरियाल, विनोद राणा, शैलेन्द्र भट्ट, वीरेन्द्र रावत, आदि का विशेष योगदान रहा। 


अनाधिकृत तरीके अपनाकर सजा न देने, स्वागत-सम्मान से दूरी बनाने के निर्देशों का माकाक्स द्वारा स्वागत

अनाधिकृत तरीके अपनाकर सजा न देने, स्वागत-सम्मान से दूरी बनाने के निर्देशों का माकाक्स द्वारा स्वागत



पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था अशोक कुमार ने दिये हैं कि मुर्गा बनाने या उठक-बैठक कराने जैसे अनाधिकृत तरीके न अपनाने व फूल माला पहनाकर स्वागत या सम्मान करने से दूरी बनाने के पुलिसकर्मियों को निर्देश
संवाददाता
काशीपुर। 23 वर्षों से कार्यरत प्रतिष्ठित समाज सेवी संस्था मौलाना अबुल कलाम आजाद अल्पसंख्यक कल्याण समिति (माकाक्स) ने उत्तराखण्ड के पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था अशोक कुमार के लॉकडाउन उल्लंघन करने वालों पर सजा के तौर पर मुर्गा बनाने या उठक-बैठक कराने जैसे अनाधिकृत तरीके न अपनाने तथा स्वागत व सम्मान से दूरी बनाने के निर्देशों का स्वागत किया है। माकाक्स अध्यक्ष नदीम उद्दीन के अनुसार यह न केवल सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन व मानवाधिकार हनन है बल्कि कुछ मामलों में अपराध की श्रेणी में भी आता है।
माकाक्स के केन्द्रीय अध्यक्ष नदीम उद्दीन एडवोकेट के अनुसार पुलिस को किसी को भी सजा देने, अवैध बल प्रयोग करने तथा सार्वजनिक अपमान करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने बताया अवैध तरीके अपनाना व सजायें देना या अवैध हिंसा करना जहां उत्तराखण्ड सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली 2002 के नियम 3 के अन्तर्गत सेवा कदाचार है, वहीं उत्तराखण्ड पुलिस अधिनियम 2007 की धारा 85 के अन्तर्गत अपराध भी है। इसी प्रकार सम्मान व पुरस्कार या कोई वस्तु प्राप्त करना उत्तराखण्ड सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली 2002 के नियम 11 व 12 का उल्लंघन है और कुछ मामलों में यह भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अन्तर्गत अपराध की श्रेणी में भी आता है। 
नदीम के अनुसार भारत में गैरकानूनी काम किसी के द्वारा भी करने की किसी को छूट नहीं है।  भले ही कितने भी अच्छे उद्देश्य से किया जाये। इसकी शिकायत पुलिस के उच्च अधिकारियों, मानवाधिकार आयोग, पुलिस शिकायत प्राधिकरण को तो की ही जा सकती है बल्कि सम्बंधित न्यायालय व मानवाधिकार न्यायालय के माध्यम से सीधे मुकदमा भी दर्ज कराया जा सकता है।
गत 20 अप्रैल को उत्तराखण्ड के पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था अशोक कुमार का उत्तराखण्ड पुलिस के अधिकारिक फेसबुक पेज पर वीडियो डाला गया है जिसमें  उन्होंने पुलिस के जवानों को निर्देशित किया है कि लॉकडाउन का उल्लंघन कर अनावश्यक रूप से सड़कों पर घूमने वालों पर कानून के अन्तर्गत कार्यवाही की जाए, उन्हें मुर्गा बनाने या उठक-बैठक करने जैसी सजा देने से दूरी बनाई जाए। अगर छोटी गलती हो तो सारी कहने या लिखित में गलती मानने पर माफ कर सकते है। हमें लोगों के प्रति हैल्पिंग और मानवीय दृष्टिकोण अपनाना है। हमें संयम और सतर्कता को नहीं खोना है। हमारी छवि सकारात्मक होनी चाहिए क्योंकि ये सब हम जनता के लिए ही कर रहे हैं। जनता को लॉकडाउन का पालन करने के लिए प्रोत्साहित करें।
डीजी ने यह भी कहा है कि फूल माला पहनाकर स्वागत या सम्मान करने से भी दूरी बनाए जाए क्योंकि इसमें सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं होता है और फूलों आदि के सेनेटाइज न होने व इससे भी संक्रमण होने की सम्भावना बनी रहती है। पुलिस कर्मियों की सुरक्षा के लिए भी जरूरी है कि वह इन सब से बचे रहें।
माकाक्स पिछले 23 वर्षों से मानवाधिकार संरक्षण सहित समाजसेवा के क्षेत्र में कार्यरत है। उसके द्वारा उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर करने के बाद ही उत्तराखण्ड मानवाधिकार आयोग का गठन हुआ है तथा 2016 में उसके द्वारा उत्तराखण्ड मानवाधिकार आयोग को की गयी शिकायत पर पुलिस मुख्यालय ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की गिरफ्रतारी संबंधी गाइडलाइन का पूर्ण पालन सुनिश्चित कराने का सर्कुलर जारी किया है।


 


बुधवार, 22 अप्रैल 2020

आम आदमी की रसोई जरूरतमंदों को करा रही भोजन

आम आदमी की रसोई जरूरतमंदों को करा रही भोजन



संवाददाता
देहरादून। आम आदमी पार्टी उत्तराखण्ड अपनी ‘आम आदमी की रसोई’ कार्यक्रम के तहत लाकडाउन में फंसे जरूरतमंद लोगों के लिये भोजन और राशन उपलब्ध करा रही है। आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता प्रदेश भर में आपसी सहयोग से यह कार्यक्रम चला रहे हैं, ताकि कोई भी असहाय भूखा ना सोये। 
आम आदमी पार्टी देहरादून अपनी ‘आम आदमी की रसोई’ अभियान के तहत राजधानी में जगह-जगह प्रभावित जरूरतमंदों को लगातार भोजन के साथ साथ राशन भी वितरित कर रही है। इसी क्रम में पार्टी द्वारा कारगी ग्रांट क्षेत्रा में भोजन सामग्री का वितरण किया गया, जिसमें 200 जरूरतमंद को भोजन वितरित किया गया। 
इस अवसर पर आम आदमी पार्टी के उमा सिसौदिया, वीरेन्द्र पोखरियाल, मुलकराज, शैलेन्द्र भट्ट, वीरेन्द्र रावत, कमलेश शर्मा, सलमान खान आदि का विशेष योगदान रहा। 


स्वास्थ्य कर्मियों पर हमला करने पर सात साल तक जेल, लगेगा भारी जुर्माना

स्वास्थ्य कर्मियों पर हमला करने पर सात साल तक जेल, लगेगा भारी जुर्माना



एजेंसी
नयी दिल्ली। देश में कोरोना वायरस के संकट के दौरान कई जगहों से स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ हिंसा की खबरें आ रही हैं। इस मामले पर केंद्र सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। अब मेडिकल टीम पर हमला करने वालों को इसके लिए कड़ी सजा दी जाएगी।
केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने प्रेस कान्प्रफेंस कर जानकारी दी कि आरोग्यकर्मियों के खिलाफ होने वाले हमलों और उत्पीड़न को बिलकुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उनकी सुरक्षा के लिए सरकार पूरा संरक्षण देने वाला अध्यादेश जारी करेगी। प्रधानमंत्री के हस्ताक्षर के बाद ये तुरंत प्रभाव से जारी होगा। जावड़ेकर ने बताया कि स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ हमला करने वालों को 3 महीने से 5 साल तक सजा होगी।
जावड़ेकर ने बताया अगर स्वास्थ्यकर्मियों पर गंभीर हमला है तो हमलाकर्मी को 6 महीने से 7 साल तक की सजा हो सकती है। इसके अलावा हमलावर को जुर्माना के रूप में 1 लाख से 5 लाख तक देना होगा। केंद्रीय मंत्री ने बताया अगर स्वास्थ्यकर्मियों की गाड़ी को या क्लिनिक को कोई नुकसान पहुंचाता है तो उस स्थिति में हमला करने वालों से जो बाजार वेल्यू होगा उसका दोगुनी रकम उससे वसूला जाएगा।
जावड़ेकर ने बताया कि राष्ट्रीय महामारी कानून के तहत बदलाव करके अध्यादेश लागू किया जाएगा, जिसके तहत डाक्टरों पर हमला गैरजमानती अपराध होगा। 30 दिन में जांच पूरी होगी. एक साल में फैसला आ जाएगा और कड़ी सजा यानी 3 महीने से 5 साल कैद की सजा हो सकती है। 50 हजार से 2 लाख तक जुर्माना देना पड़ सकता है।
प्रकाश जावड़ेकर ने बताया कि मोदी सरकार ने पहले ही स्वास्थ्य कर्मियों के 50 लाख के इंश्योरेंस का फैसला किया था। देश में कोई भी कोविड अस्पताल नहीं था और अब 723 नये कोविड अस्पताल हैं।
कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में शामिल स्वास्थ्यकर्मियों पर हमलों की पृष्ठभूमि में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एक अध्यादेश को मंजूरी दी जिसमें उनके खिलाफ हिंसा को संज्ञेय और गैर जमानती अपराध बनाया गया है।
केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर ने इस आशय की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित अध्यादेश में स्वास्थ्य कर्मियों के घायल होने, सम्पत्ति को नुकसान होने पर मुआवजे का भी प्रावधान किया गया है। जावडेकर ने कहा कि प्रस्तावित अध्यादेश के माध्यम से महामारी अधिनियम 1897 में संशोधन किया जायेगा।
इससे स्वास्थ्य सेवा से जुड़े कर्मियों की सुरक्षा तथा उनके रहने एवं काम करने की जगह को हिंसा से बचाने में मदद मिलेगी। यह पूछे जाने पर क्या कोविड-19 के बाद भी नये बदलाव लागू रहेंगे, जावडेकर ने संवाददाताओं से कहा कि अध्यादेश को महामारी अधिनियम 1897 में संशोधन के लिये मंजूरी दी गई है। उन्होंने कहा कि यह अच्छी शुरुआत है।


 


मंगलवार, 21 अप्रैल 2020

मैड ने दैनिक श्रमिकों के परिवारों तक पहुंचायी राहत सामग्री

मैड ने दैनिक श्रमिकों के परिवारों तक पहुंचायी राहत सामग्री



पुराने कपड़ों के थैले बनाकर उसमें राहत सामग्री वितरित की जा रही
संवाददाता
देहरादून। मेकिंग अ डिफरेंस बाय बीइंग द डिफरेंस (मैड) संस्था की ओर से कोरोना वायरस महामारी की वजह से लागू लाकडाउन में फंसे 6 हजार दैनिक श्रमिकों के परिवारों तक आटा, दाल, चावल, मसाले, आलू, नमक तेल इत्यादि जैसी बुनियादी जरूरतों की सामग्री को पहुंचाया जा चुका है। मैड ने कहा कि संस्था का अभियान ऐसे ही आगे जारी रहेगा। 
गौर हो कि पूर्व में भी जब कोई त्रासदी हुई है, उदाहरण के तौर पर उत्तराखंड में आयी 2013 की भीषण आपदा, नेपाल में आया भूकंप, जम्मू कश्मीर, केरल, चेन्नई में आई बाढ़ इन सभी हालातों पर  मैड द्वारा अपने पॉकेट मनी संसाधनों को एकत्र कर राहत का अभियान  चलाया गया है। वर्तमान में लॉकडाउन की स्थिति भिन्न हो जाती है क्योंकि यहां राहत का कोई भी प्रयास सामाजिक दूरी और साफ-सफाई का खास ख्याल रखते हुए किया जाना जरूरी है।
अपने इस अभियान में मैड के सदस्यों ने स्वयं द्वारा या अपने माता-पिता द्वारा बनाए गए कपड़ों के बैग में राहत सामग्री पहुंचाने का काम किया है। मैड के सदस्यों द्वारा आकलन लगाया गया कि वर्तमान में जो राशन या बना हुआ खाना दैनिक श्रमिकों तक पहुंचाया जा रहा है, क्योंकि दैनिक श्रमिक अधिकांश संख्या में रिस्पना और बिंदाल तल पर ही अपना निवास कर रहे हैं, इसलिए लगभग एक लाख पॉलीबैग रिस्पना में और इतने ही बिंदाल में रोजाना अर्पित हो रहे हैं। 
ऐसे में पर्यावरण का ख्याल रखते हुए संस्था ने पुराने कपड़ों को एकत्र कर अपने कुछ उन सदस्यों में बांटा जो खुद और जिनके माता-पिता लाकडाउन के अनुपालन में घर बैठे है। उन्होंने इनके ऐसे थैले बनाये जिनमें राशन सामग्री डालकर वितरित की जा सके। इस प्रयास में मैड के सदस्यों जैसे श्रेया रोहिल्ला, सुभवी व खुशाली गुप्ता, शरद माहेश्वरी, आर्ची बिष्ट एवं करन कपूर के परिवार सदस्यों ने अहम् भूमिका निभाई।



2011 में जब संस्था की शुरुआत हुई थी तब सभी सदस्य छात्र थे और अपने जेब खर्च के संसाधन से संस्था का संचालन करते थे। 2020 तक आते आते संस्था के कई सदस्य जो उस समय टीन एजर्स थे वह अब ऐसी भूमिका में पहुंच गए जब वह अपना खुद की कमाई कर रहे हैं। उनके द्वारा जो सामूहिक कॉन्ट्रिब्यूशन हुआ। उससे मैड की ओर से भारी मात्रा में राशन को खरीदा जा सका। 
कुछ हफ़्तों बाद जब वह भी खत्म होने लगा तो मैड द्वारा एक अलग तरीके को अपनाया गया। अपने शुरुआती सिद्धांत को बनाए रखते हुए कि अपने सामाजिक कार्य के लिए और किसी से कोई एक रुपये का भी डोनेशन नहीं लंेगे, मैड की ओर से सीधे किसी भी शुभचिंतक को जो दान करने को इच्छुक था उसे उस विक्रेता से जोड़ दिया गया जिससे मैड आलू, चावल, आटा, इत्यादि ले रहा था। इससे जो दानकर्ता था वह सीधे विक्रेता को पैसे भेज देता और मैड को जो राशन की जरूरत थी वह पूरी हो जाती। इसी माध्यम से कार्य करते हुए मैड के लिए संभव हुआ कि वह अब तक लगभग 14 लाख रुपए तक का राहत सामग्री वितरित कर चुका है। 
इस अभियान में हृदयेश, रूपांजलि, गौरव, पंकज बिष्ट, आर्ची बिष्ट, नवीन, प्रियांशी, अभिषेक, जाह्नवी, रितिका, शार्दुल असवाल, देवेश, स्वाति सिंह, सिड, दक्ष, गौरव, हिमालय रमोला, सार्थक, प्रतीक, आंचल, प्रेरणा, अभिषेक जौनसारी, कपिल शर्मा, स्वाति माहेश्वरी, सुरेश कुमार, अस्मिता, रिया, रजत पंवार, सौरभ नौटियाल, सारंग गोडबोले, उषा नेगी, रुशील, रजत, अनिरुद्ध, शालिनी ममगाईं, रितिका, स्वर्णिम, शिव्या, अलंकृत, सुभावी, अवनीश, सम्मानिका रावत, सृष्टि, पल्लवी भाटिया, भावना, सुभम बसक, राजन्या नंदी, अनन्या, संगीता, श्रीमती जुल्का, नवीन, रितिका खैरोला, कपिल , मुकुल, मुदित, शिवम, संदीप, वाणी, नीलिमा, नीलम, सिधांशु, प्रत्युष, अलका कुकरेती, शभनम, आदर्श, अंकित उनियाल, रजनीश, आस्था, सौरव जोशी, विवेक, गगन धवन, रोहिणी मनोचा पुरी, अभिषेक और स्नेहा ने योगदान दिया।
इसके अलावा संस्था ने सैनिटरी नैपकिन उन क्षेत्रों तक पहुंचाना, जहां इनकी जरूरत है, की पहल की। सैनिटरी नैपकिन वितरण के दौरान एक बालिका ने मेड की स्वयंसेवी को बताया कि सेनेटरी नैपकिन उपलब्ध न होने की वजह से उसे इस्तेमाल किए हुए कपड़े का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। इस वजह से सैनिटरी नैपकिन को इस पहल में शामिल कर दिया गया है।
मैड का अभियान उत्तराखंड पुलिस के सहयोग से चल रहा है। सेलाकुई तक मैड के बनाए हुए राशन सामग्री पहुंची है और साथ ही साथ विशेष तौर पर रिस्पना पर ध्यान केंद्रित करतें हुये मैड नेहरू कॉलोनी पुलिस थाने के साथ काम कर रहा है। मैड के कुछ स्वयंसेवक नेहरू कॉलोनी पुलिस थाने में महिला बन्दीगृह के बाहर बैठकर उनके पैकेट बनाने में मदद कर रहे है क्योंकि जो अन्य संस्थाओं द्वारा राहत सामग्री पुलिस को प्रदान की गई है उनके पैकेट बनाने की जिम्मेदारी मैड के युवाओं ने उठाई है।
इसी तरह पुराने कपड़े इकट्ठा कर उनसे संस्था थैले बनाकर उनमें राशन वितरण कर रहा है। मैड इस बात से भलीभांति अवगत है कि दैनिक श्रमिक अपनी मेहनत की कमाई खाते हैं इसलिए इस संकट की घड़ी में संस्था की ओर से उनके साथ खड़े होने का एक छोटा सा प्रयास किया जा रहा है।
अभियान का नेतृत्व मैड संस्थापक अभियाज नेगी और अध्यक्ष करन कपूर कर रहे हैं। साथ ही संस्था के पुराने सदस्य जैसे हिमालय, अरनव रमोला, सम्मानिका रावत और सौरभ नौटियाल भी अभियान से जुड़े हुए हैं। जबकि सौरव जोशी, राहुल गुरु, आयुष जोशी, रजत सिंघल, प्रदीप, गायत्री, अंकित, वसु, विजय प्रताप सिंह, सात्विक, दारिश मालिक, शरद माहेश्वरी, हिमालय रमोला, अक्षिता धवन, अभिजय नेगी, शार्दुल सिंह राणा, गगन धवन, यश सिंघल व उनकी मां और करन कपूर व् उसके माता-पिता इस अभियान में सामान की पैकिंग और वितरण के काम में लगे हुए हैं।


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सोमवार, 20 अप्रैल 2020

निजी मकानों के निर्माण पर रोक जारी रहेगी

निजी मकानों के निर्माण पर रोक जारी रहेगी



एजेंसी
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने 20 अप्रैल के बाद बड़े निर्माण कार्यों की छूट तो दी लेकिन निजी मकानों के निर्माण पर अभी रोक रहेगी। इस दौरान निर्माणाधीन मकान पर भी काम शुरू नहीं हो पाएगा। रेड जोन के साथ ही ग्रीन जोन वाले जिलों में भी यह रोक लागू रहेगी। गौर हो कि लॉकडाउन से ऐसे लोग भी परेशान हैं, जिनके निजी मकान निर्माणाधीन हैं। काम अचानक रुकने से उनकी सारी योजना अटक गई है। कई तो फिनिशिंग न होने के कारण गृह प्रवेश तक नहीं कर पा रहे हैं।
आमतौर पर अप्रैल से जून के बीच लोग शुभ मूहूर्त में बड़ी संख्या में गृह प्रवेश करते हैं। ऐसे लोग 20 अप्रैल से निर्माण में छूट मिलने की उम्मीद लगा रखी थी। लेकिन अब सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल बड़े प्रोजेक्ट को भी शर्तों के साथ ही निर्माण कार्य की छूट दी गई है, इसलिए निजी आवास या दूसरे छोटे व्यावसायिक भवनों का निर्माण इसमें शामिल नहीं होगा।
दूसरी तरफ जिन बड़े निर्माणों को छूट दी है, उन्हें भी अपने पास पहले से मौजूद सीमेंट, सरिया या दूसरी निर्माण सामग्री के स्टॉक से ही काम चलाना होगा। सीमेंट, सरिया की दुकानें नहीं खुलेंगी, न ही अभी खनन की अनुमति मिल पाई है। सूत्रों के अनुसार राज्य सरकारों ने इसकी अनुमति केंद्र से मांगी थी, लेकिन केंद्र ने हरी झंडी नहीं दी है। इस कारण तीन मई तक राज्यों में यथा स्थिति बनी रहेगी। 
केंद्र सरकार की स्पष्ट गाइडलाइन हैं कि बड़े प्रोजेक्ट मौजूदा स्टॉक के साथ ही काम शुरू कर सकते हैं। मनरेगा जैसी योजनाओं में भी चाल-खाल खोदने जैसे ही काम होंगे, इसमें भी चिनाई की अनुमति नहीं है। इसी तरह निर्माणाधीन या नए निजी भवनों के काम पर भी फिलहाल रोक है।


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