शनिवार, 14 सितंबर 2019

क्या हरीश रावत सी0बी0आई0 के लॉकअप में जायेंगे या तिहाड़ जेल!

समाचारः विश्लेषण
ना काहू से दोस्ती ना काहू से बैर, सच को कहने की हिम्मत
क्या हरीश रावत सी0बी0आई0 के लॉकअप में जायेंगे या तिहाड़ जेल, 20 सितम्बर को होगा फैसला



जगमोहन सेठी
देहरादून। उत्तराखण्ड के पूर्व कांग्रेसी मुख्यमंत्री हरीश रावत के बुरे दिन आने के संकेत मिल रहे है। अपनों ने भी पैसे हजम करके उनका साथ छोड़ दिया है। हरीश रावत अपने ऊपर मंडरा रहे बुरे दिनों को लेकर दिल्ली के कांग्रेसी नेताओं की शरण में पहुंच गये है और मीडिया का सहारा पाने की कोशिश कर रहे है। 
सी0बी0आई0 ने उनपर अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। सी0बी0आई0 और देश के ईमानदार, कड़क प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पल पल कोसने के साथ ही संघ परिवार के मुखिया मोहन भागवत को बुरा कहने वाले हरीश रावत पर सी0बी0आई0 की घेराबन्दी शुरू हो गयी है। कभी भी पूछताछ के बाद दूसरी बार 14 दिनों के रिमान्ड पर तिहाड़ जेल की कुख्यात अपराधियों की चर्चित तिहाड़ जेल के बैरिक नम्बर 7 में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत अन्य अपराधियों के साथ रखने की भी रणनीति तय कर ली गई है। 
सी0बी0आई0 उस वक्त को भूल नहीं पायी है जब हरीश रावत को दिल्ली सी0बी0आई0 ऑफिस में पूछताछ के लिए बुलाया गया था। गौरतलब है सी0बी0आई0 के कार्यालय में पेश होने के वक्त हरीश रावत अपने साथ मुट्ठी भर समर्थकों को दिल्ली ले गये थे। सी0बी0आई0 और मोदी के खिलाफ नारेबाजी के माहौल को देखते हुए सी0बी0आई0 ने अपने तौर तरीके से प्रारम्भिक पूछताछ के बाद दुबारा बुलाने के लिए हरीश रावत को निर्देश दिये थे। इससे पूर्व हरीश रावत ने सी0बी0आई0 की गिरफ्तारी से बचने के लिए नैनीताल हाईकोर्ट से स्टे ले लिया था।
लेकिन बदलते माहौल में सी0बी0आई0 ने स्टे आदेश को हाईकोर्ट से रद्द कराने के लिए प्रार्थना पत्र दिया है। नैनीताल हाईकोर्ट ने सी0बी0आई की प्रारम्भिक रिपोर्ट पर बहस सुनवाई के लिए 20 सितंबर तय की है यानी ये कहे कि सी0बी0आई0 20 सितंबर की सुनवाई के बाद यदि फैसला हरीश रावत के खिलाफ दिया जाता है तो सी0बी0आई0 किसी भी वक्त हरीश रावत को गिरफ्तार कर अपने साथ पूछताछ के लिए दिल्ली ले जा सकती है। वहीं दूसरी तरफ सी0बी0आई0 ने हरीश रावत के खिलाफ एफ0आई0आर0 दर्ज करने का मन बना लिया है। 
एफ0आई0आर0 दर्ज होते ही हरीश रावत की मुश्किलें बढ़ जाएगी। अपने खिलाफ सम्भावित कार्यवाही को देखते हुए हरीश रावत ने सुप्रीम कोर्ट के वकीलों से विचार विमर्श करना शुरू कर दिया है। लेकिन पूर्व कांग्रेसी वित्त मंत्री पी0 चिदंबरम की गिरफ्तारी को देखते हुए कुछ डरे और सहमे हुए है। सी0बी0आई0 पूर्व कांग्रेसी वित्त मंत्री पी0 निदमबरम की तरह हरीश रावत को नाटकबाजी करने का मौका नहीं देना चाहती है। सी0बी0आई0 ने अपनी सहयोगी एजेन्सियों से सम्पर्क कर कहा है कि वह हरीश रावत के समर्थकों की गतिविधियों पर कड़ी निगाह रखें। 
हरीश रावत के करीबी और उनका पैसा संभालने वाले राजीव जैन, रंजीत सिंह पर कड़ी नजर रखी हुई है। जानकारियों पर यकीन किया जाये तो कहा जा सकता है कि हरीश रावत की अपराधिक मानसिकता को देखते हुए उनके साथियों ने भी सी0बी0आई0 के डर से उनका साथ छोड़ दिया है। यही हालत उसके चहेते पुलिस अधिकारियों में चल रही है। हालांकि पुलिस मुख्यालय में तैनात अधिकारी भी जो हरीश रावत के खासम खास हुआ करते थे अपनी नजरें घुमा ली है। हरीश रावत के मुंहबोले दामाद और बेटी भी उसका साथ छोड़कर भाजपा में शामिल हो गये। 
हरीश रावत की कमर भी टूट चुकी है। भाजपा में शामिल होने से पहले उन्होंने अपने तबादलों के बारे में जो डॉ0 हरक सिंह रावत ने शर्ते रखी थी, वह भाजपा ने पूरी कर दी है। हरीश रावत ने सुप्रीम कोर्ट के बड़े वकीलों से सम्पर्क शुरू कर दिया है। हालात को देखते हुए अपने रूख को बदलकर मोदी जी की कार्यप्रणाली की तारीफ करनी शुरू कर दी है। गौरतलब है कि मार्च 2016 में विधान सभा में वित्त विधेयक पर वोटिंग के बाद नौ कांग्रेसी विधायकों ने बगावत कद दी थी। तब एक समाचार चैनल की ओर से विधायकों की कथित खरीद फरोख्त का स्टिंग ऑपरेशन पत्रकार उमेश शर्मा ने किया गया था। इस आधार पर तत्कालीन राज्यपाल के0के0 पॉल ने केन्द्र सरकार को कानूनी कार्यवाही करने के लिए अपनी सिफारिश भेज दी थी। 


केंद्र ने रावत सरकार को बर्खास्त कर दिया। हालांकि बाद में नैनीताल हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कांग्रेस सरकार बहाल हो गई। इसके बाद रावत सरकार ने स्टिंग प्रकरण की जांच सी0बी0आई0 से हटाकर एस0आई0टी0 से कराने का फैसला किया। हरीश रावत के इस नये फैसले पर हरक सिंह रावत का कहना था कि केन्द्र सरकार द्वारा राज्यपाल की सिफारिश पर कार्यवाही की संस्तुति की गयी तो उसको बदले पर कार्यवाही की संस्तुति की गयी, उसको बदला नहीं जा सकता। 
गौरतलब है कि केन्द्र सरकार ने स्टिंग ऑपरेशन की सीडी को उमेश शर्मा से लेकर उसकी प्रमाणिता की फॉरेंसिक जांच करने के लिए सरकारी लैबोटरी चंडीगढ़ भेज दिया। जांच में सीडी की प्रमाणिकता पर कोई उंगली नहीं उठी और रिपोर्ट में कहा गया सीडी के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की गयी है। गौरतलब है कि विधायकों की खरीद फरोख्त के मामले में हरीश रावत ने कहा था कि उनका कोई स्टिंग ऑपरेशन नहीं हुआ है। इस पर तत्कालीन बागी विधायक व वर्तमान में वन मंत्री डॉ0 हरक सिंह रावत ने सरकार के इस निर्णय को हाईकार्ट में चुनौती दी। 
उन्होंने दलील दी कि राज्यपाल मामले की सी0बी0आई0 जांच की संस्तुति केन्द्र को भेज चुके हैं, इसलिए आदेश को वापस नहीं लिया जा सकता। नैनीताल हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई 20 सितंबर को न्यायमूर्ति रमेश चन्द खुल्बे की एकलपीठ में होगी। बरहाल कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि हरीश रावत पर सी0बी0आई0 की गिरफ्तारी के बादल मंडरा रहे हैं।


सम्पर्क सूत्रः jagmohan_journalist@yahoo.com, jagmohanblitz@gmail.com


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