मंगलवार, 15 अक्तूबर 2019

मोर्चा का सवाल: सैनिकों की शहादत का कौन देगा हिसाब!

मोर्चा का सवाल: सैनिकों की शहादत का कौन देगा हिसाब!



- आखिर कब रूकेगी सैनिकों की शहादत !
- मोदी राज में अपेक्षाकृत ज्यादा शहादत हुई।
- मोदी राज में अपेक्षाकृत आतंकवादियों का भी कम हुआ खात्मा।
- मनमोहन सरकार ज्यादा कारगर साबित हुई इस मामले में।
संवाददाता
विकासनगर। मोर्चा कार्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने कहा कि देश में जिस प्रकार रोजाना हमारे सैनिकों की शहादत हो रही है, वो मोदी सरकार के मुँह पर तमाचा है।
नेगी ने कहा कि सरकार की नीतियों का खामियाजा सैनिक परिवारों व देशवासियों को भुगतना पड़ रहा है, जिसके आंकड़े रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं।
नेगी ने कहा कि पूर्ववर्ती मनमोहन सरकार (काँग्रेस) के कार्यकाल 2009-2014 तक 194 सैनिकों की शहादत हुई तथा वहीं दूसरी ओर मोदी राज 2015 से 31.05.2019 तक 232 सैनिकों की शहादत हुई। इसी प्रकार मनमोहन राज में 820 आतंकवादियों का खात्मा हुआ तथा मोदी राज में 798 आतंकवादियों का खात्मा हुआ, यानि मोदी राज में आतंकवादी कम मरे तथा सैनिकों की ज्यादा शहादतें हुई।
नेगी ने कहा कि संघ प्रमुख श्री मोहन भागवत भी अपने बयान में कह चुके हैं कि जब युद्व नहीं हो रहा है तो सैनिकों की शहादतें क्यों हो रही हैं। देश की जनता एवं खासतौर पर सैनिक परिवारों का इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा कि मोदी सरकार ने बड़े-बड़े दावे किये थे कि आतंकवादियों का खात्मा कर देंगे, लेकिन यहाँ सब उल्टा हो रहा है, यानि मोदी सरकार एक फ्लाॅप शो साबित हो रही है।
नेगी ने कहा कि इसी प्रकार नक्सली व अन्य घटनाओं में भी अपेक्षाकृत बहुत ज्यादा इजाफा हुआ है यानि हमने ज्यादा अर्द्धसैनिक बलों के जवान खोये हैं।
पत्रकार वार्ता में मोर्चा महासचिव आकाश पंवार, दिलबाग सिंह, डाॅ0 ओ0पी0 पंवार, अमित जैन आदि थे।


 

 

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