बुधवार, 1 जनवरी 2020

मुसाफिर

मुसाफिर



चेतन सिंह खड़का 


चल बे चल,
आगे निकल।
मुड़ के देख,
फिर संभल।
चल बे चल- 2


छोड़ दे, 
पुराना पीछे।
जुड़ जा, 
नये के नीचे।
यह तो सीधा,
फलसफा।
टेछ़े-मेड़े,
उपर-नीचे।
राह में गर,
खड्ड मिले।
तन जा,
थोड़ा उछल।
चल बे चल- 2


मजबूर क्यों?
होता है राजा।
दायरों से,
बाहर आ जा।
तू जान ले,
अपनी हदें।
पूरा आसमां,
तेरी छतें।
बेमानी है,
शिकवे गिले।
गटक भी जा,
थोड़ा गरल।
चल बे चल- 2


तेरा किया,
हरदम नया।
तेरा हौसला,
सदा जवां।
इम्तेहान में,
निकले खरा।
बने बड़ा,
दिल तेरा।
तुझे रास्ते, 
मंजिल मिले।
जग न बदले,
तू बदल।
चल बे चल- 2


नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं


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