रविवार, 7 जून 2020

कानून के समक्ष किसी व्यक्ति की समानता से इनकार नहींः न्यायमूर्ति बनर्जी 

नोएडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी द्वारा राइट टू इक्वेलिटी- पैराडाइम शिफ्रट विषय पर वेबिनार आयोजित 
कानून के समक्ष किसी व्यक्ति की समानता से इनकार नहींः न्यायमूर्ति बनर्जी 



संवाददाता
नोएडा। नोएडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के आफ लॉ एंड लीगल अफेयर्स ने राइट टू इक्वेलिटी- पैराडाइम शिफ्रट के एक बहुत ही रोचक और प्रासंगिक विषय पर एक वेबिनार आयोजित किया। इस वेबिनार सत्र के मुख्य अतिथि वक्ता कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति प्रतीक प्रकाश बनर्जी थे।
सत्रा की शुरुआत बैद्यनाथ मुखर्जी, सहायक प्रोफेसर स्कूल आफ लॉ एंड लीगल अफेयर्स द्वारा की गई तथा स्वागत भाषण कुलपति प्रो0 (डा0) जयानंद द्वारा दिया गया। इस सत्र में 250 से भी ज्यादा छात्रों ने भाग लिया।
मुख्य अतिथि वक्ता न्यायमूर्ति प्रतीक प्रकाश बनर्जी ने अपने भाषण में भारतीय संविधान में समानता के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि इतिहास ने धर्म, जाति, लिंग, भाषा और कई अन्य आधारो पर अपूरणीय अन्याय और विभाजन देखा है। इसलिए भारत असमान लोगों के कुछ वर्गों को विशेषाधिकार देने और दूसरों को अधीन करने, तत्कालीन समाज में प्रचलित लोगों के कारण विशेषाधिकार प्राप्त करने का समाज था।
उन्होंने कहा कि ऐसी सामाजिक स्थिति को सुधारने के लिए, असमानता की अवधारणा को अनुच्छेद 14 के तहत संविधान में आयात किया गया था। भारत के संविधान की प्रस्तावना में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि नागरिकों की स्थिति और अवसर की समानता को सुरक्षित किया जाएगा। अतः समानता भारतीय राज्य का मूलभूत लक्ष्य बन गया। 
न्यायमूर्ति बनर्जी ने कहा कि कानून के समक्ष समानता का मतलब है कानून के सामने समानता और सबके लिए कानून की समान सुरक्षा। अवधारणा यह है कि सभी मनुष्य जन्म से समान होते हैं, इसलिए कानून के सामने समान हैसियत के पात्रा हैं। राज्य कानून के समक्ष किसी व्यक्ति की समानता या कानून के क्षेत्र में समान संरक्षण से इनकार नहीं करेगा। समानता एक अधिकार है, जिसे अवैधता में दावा नहीं किया जा सकता है और इसलिए एक नागरिक या अदालत द्वारा नकारात्मक तरीके से लागू नहीं किया जा सकता है।
इस प्रकार अनुच्छेद 14 दो अभिव्यक्तियों कानून के समक्ष समानता और कानून का समान संरक्षण का उपयोग करता है। साथ ही उन्होंने यह भी चर्चा की कि दोनों अभिव्यक्तियां समानता की अवधारणा के अभिन्न अंग हैं। इसके बाद बैद्यनाथ मुखर्जी द्वारा आयोजित प्रश्न और उत्तर दौर का आयोजन किया गया। जहां विभिन्न प्रतिभागियों ने वक्ता के सामने अपनी शंकाओं और विचारों को रखा।
कार्यक्रम के अंत में वेबिनार के संयोजक डा0 परंतपदास एचओडी स्कूल आफ लॉ एंड लीगल अफेयर्स, नोएडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी एवं मिस प्राची श्रीवास्तव असिस्टेंट प्रोफेसर स्कूल आफ लॉ एंड लीगल अफेयर्स एनआईयू द्वारा अतिथि वक्ता को वोट आफ थैंक्स दिया गया। यह वेबिनार एक बहुत ही सफल कार्यक्रम सिद्व हुआ और अपने उदेशय में परिपूर्ण रहा।


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