बुधवार, 21 अक्तूबर 2020

अचार के रख-रखाव का तरीका

अचार के रख-रखाव का तरीका



कुछ सावधानी बरत अचार को लम्बे समय तक खराब होने से बचायें
प0नि0डेस्क
देहरादून। अचार डालते समय और उसे डब्बे में भरते हुए अचार खराब होने और फफूंद लगने से बचाने के लिए कुछ बातों का ख्याल रखा जाना चाहिये। अचार बनाने के बाद उसका सही तरीके से रख रखाव बेहद जरूरी है। कुछ सावधानी बरत कर अचार को लम्बे समय तक खराब होने से बचाया जा सकता है।
बता दें कि अचार खराब होने का मुख्य कारण फफूंद लगना होता है। अचार में डाली जाने वाली सामग्री में नमी की वजह से ऐसा हो जाता है। अचार के ऊपर की तेल की सतह अचार को खराब होने से बचाती है। अचार के ऊपर तेल पर्याप्त मात्रा में न होने के कारण अचार खराब हो सकता है। 
इसके अलावा अचार बनाने में काम में लिए जाने वाले बर्तन तथा चम्मच आदि पूरी तरह साफ न हो तो यह अचार खराब होने का कारण बन जाता है। अचार बनाने की सामग्री जैसे केरी, नींबू, आंवला आदि पर दाग धब्बे होने पर अचार खराब होने और फफूंद लगने की संभावना होती है। शुरू-शुरू में अचार को हिलाना होता है, इसमें कमी होने पर अचार खराब हो सकता है।
याद रहे कि अचार जिस कंटेनर में भर कर रखना हो वह कांच या चीनी मिटटी का हो। धातु के बर्तन अचार स्टोरेज के लिए इस्तेमाल नहीं करना चाहिये, इससे अचार बिगड़ सकता है।
अचार बनाते समय कुछ बातों का ध्यान रखने जरूरी है। मसलन साफ सफाई के मामले में कोताही नही होनी चाहिये। अचार बनाने वाली सब्जी व मसाले आदि में नमी न रहें। सब्जियां ताजी व बिना दाग धब्बे वाली हो। आचार में मसाले जैसे लालमिर्च व हल्दी आदि तेज गर्म तेल में डालने से जल सकते है और अचार काला पड़ सकता है। इसलिए तेल के गुनगुने या ठंडे होने पर ही मसाले डालें। 
यदि मीठा अचार बना रहे है तो चाशनी का पर्याप्त गाढ़ा होना बहुत जरूरी है। अचार में नमक की सही मात्रा होने पर भी अचार जल्दी खराब नहीं होता है। अचार में तेल, नमक, शक्कर, हींग व सिरका आदि संरक्षण प्रिजर्वेशन का काम करते है। प्लास्टिक के जार में भी अचार खराब नहीं होता हैं लेकिन स्वास्थ्य की दृष्टि से अच्छा नहीं रहता अतः संभव हो तो अचार कांच के जार में ही भरें। अचार भरने से पहले कंटेनर को डिटर्जेंट व गर्म पानी से अच्छी तरह धोकर साफ करें व पूरी तरह सूखने के बाद ही उसमें अचार भरें।
अचार बनाने के बाद दो तीन दिन अचार को मलमल के कपड़े से ढक कर धूप में रखे ताकि अचार की नमी निकल जाये और अचार लम्बे समय तक खराब नहीं हो। अचार के मसाले में नमी होने पर भी अचार जल्दी खराब हो सकते है इसीलिए मसालों को अचार बनाने से पहले थोड़ा भून लें या धूप में रखकर नमी निकाल दें। 
अचार कई तरह से बनाए जाते है जैसे तेल वाले अचार, बिना तेल वाले अचार, मीठे अचार। कुछ अचार एक महीने के लिए बनते हैं तो कुछ अचार पूरे साल काम में लिए जाते है। 
अचार में नमक प्रिजर्वेटिव का काम करता है। नमक की मात्रा कम होने पर भी अचार खराब हो सकते हैं। तेल वाले अचार में अचार का तेल में डूबा रहना जरूरी होता है। इससे फंगस से बचाव होता है। मीठा अचार बनाते समय अचार में पानी नही रहना चाहिए। यदि चाशनी वाला अचार बना रहे है तो चाशनी का एक तार जितना पकाना जरूरी होता है। रोजाना काम में लेने के लिए अचार को बड़े कंटेनर से कांच के किसी छोटे कंटेनर में निकाल ले इससे अचार जल्दी खराब नहीं होते और काम में लेने में भी सुविधा रहती है। अचार हमेशा तेल में डूबा रहना चाहिए। एक बार अचार निकलने के बाद बचे हुए अचार को वापस अच्छे से डुबो दें ताकि अचार के ऊपर तक तेल रहे और अचार तेल में डूबा रहे। 
अचार का सामान इस तरह तैयार करें। अचार बनाने के लिए मौसम में आने वाली सामग्री जैसे कैरी या सब्जिया आदि लेनी चाहिए। अचार बनाने वाली सब्जियों को थोड़ी देर पानी में भिगोकर रखें उसके बाद अच्छी तरह धोकर सापफ कपड़े से पोंछ कर सुखा लें। कच्चे आम के अचार के लिए आम में जाली विकसित होने के बाद इसका अचार बनाना चाहिए। आम के अचार के लिए आम गूदेदार, सख्त और कम रेशे वाला होना चाहिए। 
आंवले का अचार बनाने के लिए आंवले सख्त व ताजे होने चाहिए। अचार छोटे आंवलांे से भी बनाया जा सकता है लेकिन आंवला मुरब्बा बनाने के लिए आंवले बड़े सख्त, ताजे व बिना दाग वाले होने चाहिए। नींबू का अचार बनाने के लिए पतले छिलके के नींबू का उपयोग करना चाहिए। जिन्हंे कागजी नींबू के नाम से जाना जाता है। 
अचार बनाने के लिए अलग अलग प्रान्त में अलग अलग तेल काम मंे लिए जाते है। जैसे उत्तर भारत में सरसांे के तेल और दक्षिण भारत में नारियल का तेल प्रयोग में लाया जाता है। कुछ जगह मूंगपफली का या तिल का तेल भी काम में लिया जाता है। सरसों के तेल और तिल के तेल में बने अचार शानदार स्वाद देते है। यदि अचार में तेल कम लगे तो एक्सट्रा तेल डालने से पहले तेल को पूरी तरह गर्म कर ले, फिर जब ठंडा हो जाए तब अचार में डालें। 


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