रविवार, 10 जनवरी 2021

सूर्य के मकर राशि में आने से 14 जनवरी को मकर सक्रांति पर्व

सूर्य के मकर राशि में आने से 14 जनवरी को मकर सक्रांति पर्व 

संक्रांति का पुण्यकाल करीब 9 घंटे से ज्यादा का रहेगा



पं0 चैतराम भट्ट

देहरादून। सूर्य के मकर राशि में आने से 14 जनवरी को मकर सक्रांति पर्व मनाया जायेगा। सूर्य सुबह करीब 8ः20 पर मकर राशि में प्रवेश कर जाएगा। इस दिन मकर संक्रांति का पुण्यकाल सूर्यास्त तक रहेगा। इस दिन सुबह करीब 7ः15 पर सूर्याेदय होगा और शाम लगभग 5ः50 पर अस्त होगा। इस तरह संक्रांति का पुण्यकाल करीब 9 घंटे से ज्यादा का रहेगा। इस दौरान श्रद्वा अनुसार जरूरतमंद लोगों को दान दिया जा सकता है। इस साल मकर संक्रांति पर 5 ग्रहों का विशेष योग भी बनेगा।

गुरुवार बृहस्पति देव का दिन है। ज्योतिष ग्रंथों में इसे शुभ दिन माना जाता है। इसलिए इस दिन उत्तरायण होना यानी सूर्य का राशि बदलना बहुत ही शुभ होता है। ज्योतिष ग्रंथों में बताया गया है कि जब सूर्य के राशि बदलता है उस समय संक्रांति वाली कुंडली बनाई जाती है। जिससे अगले 30 दिनों का राजनैतिक, सामाजिक और आर्थिक भविष्यफल निकाला जा सकता है। इस बार सूर्य के राशि बदलते ही मकर राशि में सूर्य के साथ चंद्रमा, बुध, गुरु और शनि होने से पंचग्रही योग बनेगा। ग्रहों की यह युति बड़े राजनीतिक और सामाजिक बदलाव लाने का ज्योतिषीय संकेत दे रही है।

इस बार संक्रांति का नाम मंद है। जो कि शेर पर सवार होकर वैश्य के घर प्रवेश कर रही है। इसका उपवाहन हाथी है। ये देव जाति की है। शरीर पर कस्तूरी का लेप, सपफेद रंग के कपड़े पहने हुए, पुन्नागपुष्प की माला और हाथ में भुशुंडि शस्त्र लिए, सोने के बर्तन में भोजन करती हुई है।

कुछ सरकारी अधिकारियों के लिए हालात खराब हो सकते हैं। इन सबके प्रभाव से 15 फरवरी तक देश में असामाजिकता बढ़ सकती है। आपराधिक गतिविधियां बढ़ और वारदातें बढ़ सकती हैं। लेकिन लोगों की सेहत में सुधार होगा। महंगाई कम होने की संभावना है। अन्य देशों से भारत के संबंध मजबूत होंगे। देश में अनाज भण्डारण भी बढ़ेगा।

मकर संक्रांति पर्व पर सूर्याेदय से पहले उठकर नहाना चाहिए। इसके बाद उगते हुए सूरज को 3 बार जल चढ़ाकर प्रणाम करना चाहिए। सूर्य नमस्कार करें तो और भी अच्छा है। इसके बाद श्रद्वा अनुसार दान देने का संकल्प लें। फिर जरूरतमंद लोगों को कपड़े और खाने की चीजें दान करें। इस पर्व पर खासतौर से तिल और गुड़ दान करने की परंपरा है।


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