मंगलवार, 2 फ़रवरी 2021

करदाता को करना होगा पहले की तरह आयकर नियमों का पालन

 छूट मिलने की उम्मीदें लगाये बैठी मिडिल क्लास को सरकार का करारा झटका



करदाता को करना होगा पहले की तरह आयकर नियमों का पालन

प0नि0ब्यूरो

देहरादून। इस बजट में इनकम टैक्स में छूट मिलने की उम्मीदें लगाये बैठी मिडिल क्लास को केंन्द्र सरकार ने करारा झटका दिया है। वहीं इस बजट से वेतनभोगी वर्ग भी बेहद निराश है। गौर हो कि वित्त वर्ष 2021-22 के लिए बजट में न तो कोई इनकम टैक्स में अतिरिक्त टैक्स छूट की घोषणा की गई और न ही टैक्स स्लैब में कोई बदलाव किया गया। 

टैक्सपेयर्स को पहले की तरह ही टैक्स नियमों का पालन करना होगा। केवल 75 साल से अधिक उम्र के लोगों को रिटर्न फाइल करने से राहत मिली है। हालांकि उनका भी टैक्स माफ नहीं किया गया है। 75 साल से अधिक की आयु वाले बुजुर्गों को अब इनकम टैक्स रिटर्न नहीं भरना होगा, जो सिर्फ पेंशन पर आश्रित हैं। हालांकि एनआरआई टैक्सपेयर्स को डबल टैक्सेशन में थोड़ी राहत दी गई है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश करते समय कहा कि टैक्स असेसमेंट की अवधि को घटा कर 6 साल से 3 साल किया गया है। इसका मतलब है कि अब 3 साल से पुराने केस नहीं खोले जाएंगे। टैक्स सुधार की दिशा में यह बड़ा कदम है। यानी 50 लाख से कम आय के कर चोरी मामलों में पुराने रिटर्न खोलने की समय सीमा को 6 साल से घटाकर 3 साल किया गया है। इसके साथ ही 50 लाख से अधिक टैक्स चोरी के सबूत सामने आने पर ही 10 साल पुराने रिटर्न खोले जा सकेंगे। इसके लिए भी प्रमुख आयकर आयुक्त की अनुमति जरूरी होगी।

लोगों को पिछले साल की ही तरह इस साल भी इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के दो आप्शन मिलेंगे। साथ ही डिविडेंड से मिलने वाली आय पर एडवांस टैक्स नहीं जमा करना होगा। इसके अलावा 45 लाख रुपए तक का घर खरीदने पर 1.5 लाख रुपए तक के ब्याज पर अतिरिक्त छूट जारी रखी है और 31 मार्च 2022 तक इस टैक्स से छूट मिलती रहेगी।

टैक्स से जुड़े विवादों के निपटारे के लिए केंद्र सरकार की तैयारी फेसलेस असेसमेंट और अपील के बाद अब अपीलेट ट्रिब्यूनल को भी फेसलेस बनाने की तैयारी की है। सरकार ने फेसलेस इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल सेंटर बनाने की घोषणा की है। इसके तहत सभी कम्युनिकेशन अब इलेक्ट्रानिक माध्यम से होंगे। वहीं अगर इन -पर्सन सुनवाई की जरूरत पड़ी तो यह वीडियो कान्प्रफेंसिंग के माध्यम से किया जाएगा।

हालांकि कोविड-19 महामारी के कारण सरकार खुद भी संकट का सामना कर रही है। ऐसे में उसे अपना खर्च भी निकलना जरूरी था इसलिए उसने बेहद संतुलन के साथ इसके उपाय मौजूदा बजट में किए है। लेकिन आम जनमानस के लिए भले ही राहत नहीं दी गई परन्तु पुराने कर स्वरूप को बरकरार रख उन्हें साधने का प्रयास जरूर किया है। इतना जरूर है कि सरकार ने बाजार में रूपये का फ्रलो कायम रखने का प्रयास किया है ताकि अर्थव्यवस्था को पर्याप्त गति मिलती रहे।


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