बुधवार, 26 मई 2021

बाबा रामदेव से इतनी नफरत क्यों है!

बाबा रामदेव से इतनी नफरत क्यों है!



प0नि0ब्यूरो

देहरादून। जब से बाबा रामदेव ने योग को प्रमोट करना शुरू किया और बीमारी से बचने के उपाय लोगों के सामने रखे, उनकी ख्याति बढ़ती गई। उन्होंने आचार्य बालकृष्ण के साथ मिलकर आयुर्वेद को प्रसारित- प्रचारित किया। पतंजलि के जरिए लोगों को व्याधियों से छुटकारे का गुरूमंत्र क्या देना शुरू किया, चिकित्सकों का एक वर्ग उनकी आलोचना करने लगा। खासकर बिना दवा-दारू लोगों को बीमारियों से दूर रहने के उपाय उपलब्ध होने से कुछ डाक्टरों को लगा कि यह बन्दा तो पेट में लात मारने आ गया। ऐसे में जाहिर तौर पर उन्होंने बाबा रामदेव और उनकी विधा को अपना प्रतिस्पधर््ी मान लिया। जबकि ऐसा बिलकुल नहीं है। यह साफ है कि वर्तमान में इलाज के लिए सबको एलोपैथी पद्वति अपनाना पड़ता है।  

फिर किसी के कहने भर से इतना भड़कने की क्या जरूरत है? ऐसा लगता है कि यह विरोध किसी पूर्वाग्रह और दुर्भावना की वजह से हो रहा है। जैसे लोग इंतजार में बैठे है कि गलती हो और तब बाल की खाल  निकाली जाये। जबकि बाबा रामदेव की संस्था पतंजलि ने इस पर सफाई दी और खुद बाबा रामदेव ने भी माफी मांग ली। जबकि इसकी कोई जरूरत नहीं थी। उनकी तरफ से कहा जा चुका है कि उन्होंने ऐसा नहीं कहा बल्कि वे तो सोशल मीडिया में प्रसारित मैसेज को पढ़कर बता रहे थे। लेकिन जिस तरह से डाक्टरों की संस्था आईएमए ने इसपर प्रतिक्रिया जतायी है? वो हैरान करता है। बिना तथ्य को जाने और समझे, डाक्टरों की र्शीष संस्था का बर्ताव उनकी मर्यादा के अनुरूप नही कही जा सकती है। 

वास्तव में आज के दौर में हम चाहते है कि सामने वाला सर्व गुण सम्पन्न हो। परन्तु यह संभव नहीं है। इंसान काम करता है तो उससे गलतियां भी होती है। बाबा रामदेव बढ़बोले हो सकते है उससे लेकिन उनके योगदान को कमतर करके नहीं आंका जा सकता। योग और पतंजलि की स्वास्थ भारत के प्रति भूमिका को भुलाया नहीं जा सकता। जिस तत्परता से आईएमए ने बाबा रामदेव के खिलाफ कड़वाहट उगली, इसी तरह यदि वह अपने सिस्टम और निजी अस्पतालों की संवेदनहीनता को दुरूस्त करने पर ध्यान दे तो बेहतर होगा। जब कभी ऐसे चिकित्सक या अस्पतालों के लूट की खबरें आती है तो यही संस्था तब गधे की सिंग की तरह गायब हो जाती है। दो बोल नहीं फूटते।


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