रविवार, 25 जुलाई 2021

 कितना खास है आने वाला एलआईसी का आईपीओ

हर वो अहम बात जो निवेश से पहले पता होनी चाहिए



प0नि0डेस्क

देहरादून। भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) का आईपीओ लाने की तैयारी पूरे जोरों पर है। हालांकि इतनी विशाल कंपनी का आईपीओ लाना इतना आसान नहीं है इसीलिए इसके लिए लक्ष्य इस वित्त वर्ष के अंत मार्च 2022 तक रखा गया है। मार्च से पहले इसे लाने का मतलब है कि यह जनवरी से मार्च के बीच कभी आ सकता है। कैबिनेट ने हाल में ही एलआईसी में विनिवेश को मंजूरी दी है। इसके लिए मर्चेंट बैंकर्स की नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है।

सरकार ने कहा है कि इस आईपीओ के तहत जारी शेयरों का करीब 10 फीसदी हिस्सा एलआईसी पालिसीधारकों के लिए रिजर्व रहेगा। उन्हें बाकी लोगों से सस्ता शेयर मिल सकता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक पालिसीधारकों ने एलआईसी की करीब 28.9 करोड़ पालिसी खरीद रखी है। नियम कहता है कि एलआईसी को यह रिजर्वेशन सेबी के रेगुलेशन के मुताबिक और एक्सचेंजों से परामर्श के आधार पर ही देना होगा।

आईपीओ के नियमों के मुताबिक कोई कंपनी अपने कर्मचारियों को अधिकतम 10 फीसदी छूट पर शेयर दे सकती है लेकिन यहां गौर करने की बात यह है कि पालिसीधारक एलआईसी के कर्मचारी नहीं हैं इसलिए एलआईसी उन्हें कितना छूट दे सकता है, यह देखने वाली बात होगी। सरकार ने इसके लिए एलआईसी एक्ट 1956 में बदलाव किया है। कितना हिस्सा आईपीओ के माध्यम से बेचना है यह वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अगुवाई वाली एक समिति तय करेगी।

लिस्टेड होने के बाद अन्य कंपनियों की तरह एलआईसी का संचालन भी कंपनीज एक्ट और सेबी एक्ट के द्वारा होगा। इसे अपने मुनाफे या घाटे के तिमाही नतीजे सार्वजनिक करने होंगे और प्रमुख घटनाक्रमों की भी समय-समय पर एक्सचेंजों के माध्यम से जनता को जानकारी देनी होगी।

सरकार यदि पालिसीधारकों को 10 फीसदी की छूट पर शेयर देती है तो भी शेयर बाजार में लिस्ट होने के बाद एलआईसी का वैल्युएशन 10 से 15 लाख करोड़ रुपये हो सकता है। सेबी के नियमों के मुताबिक 10 लाख करोड़ रुपये के आसपास के मार्केट कैप के अंदाजे से एलआईसी को कम से कम 55,000 करोड़ रुपये का आईपीओ लाना होगा और यदि मार्केट कैप का अंदाजा 15 लाख करोड़ का होता है तो उसे 80,000 करोड़ रुपये का आईपीओ लाना होगा।

एलआईसी के आईपीओ में शेयरों की कीमत क्या होगी यह बात भी काफी अहम होगी क्योंकि इसके पहले आए सरकारी बीमा कंपनियों के आईपीओ का अनुभव अच्छा नहीं रहा है। साल 2017 में न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी का शेयर 770-800 रुपये में आफर किया गया था। यह बीएसई पर 748.90 रुपये में लिस्ट हुआ था और आज इसका शेयर काफी नीचे है। इसी साल जनरल इंश्योरेंस कारपोरेशन आफ इंडिया को एनएसई पर 857.50 रुपये पर लिस्ट किया गया था, लेकिन आज इसकी कीमत काफी नीचे पहुंच गई है।

सरकार के लिए एलआईसी का विनिवेश काफी अहम है। इसकी वजह यह है कि अगर उसे इस वित्त वर्ष में विनिवेश का लक्ष्य 1.75 लाख करोड़ रुपये पूरा करना है तो यह एलआईसी के द्वारा ही हो सकता है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में ऐलान किया था कि 2021-22 में सरकार विनिवेश के जरिए 1.75 लाख करोड़ रुपये जुटाना चाहती है। दो सरकारी बैंकों के निजीकरण की योजना अभी परवान नहीं चढ़ पाई है। 

भारतीय बीमा कारोबार में एलआईसी का एकाधिकार जैसा है। एलआईसी के आकार और पहुंच को देखते हुए आगे भी इसकी कारोबारी संभावनाएं मजबूत रहने की उम्मीद है। एलआईसी की बाजार हिस्सेदारी करीब 66 फीसदी है। 31 मार्च 2020 तक एलआईसी का कुल एसेट 37.75 लाख करोड़ रुपये का था। इसके पास 22.78 लाख एजेंट और 2.9 लाख कर्मचारियों का विशाल नेटवर्क है।

यही नहीं एलआईसी शेयर बाजार के सबसे बड़े संस्थागत निवेशकों में से है और यह कितनी सरकारी कंपनियों के लिए तारणहार की तरह सामने आता रहा है। इसने शेयर बाजार में मोटा निवेश कर रखा है। इसके भारी भरकम निवेश पोर्टफोलियो से भी अच्छा रिटर्न मिलने की उम्मीद रहती है।


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