शुक्रवार, 27 सितंबर 2019

घोंचू पुलिस का पालनहारः पुलिस व्यवस्था चरमराई

समाचारः समीक्षा
ना काहू से दोस्ती ना काहू से बैर, सच को सच कहने की हिम्मत
घोंचू पुलिस का पालनहारः पुलिस व्यवस्था चरमराई



जगमोहन सेठी


देहरादून। इस समाचार को लिखे जाने तक कुल मिलाकर जहरीली शराब पीने से 7 व्यक्तियों की मौत हो गयी है। इन मौतों के लिए कौन जिम्मेदार है, शहर में आम सवाल लोग एक दूसरे से पूछ रहे है। कुछ लोग तो वरिष्ठ पुलिस कप्तान अरूण मोहन जोशी की भ्रष्ट, बेईमान, पुलिस कोतवाली को दोषी ठहरा रहे है वहीं कुछ लोग जहरीली शराब सप्लाई करने वाले भाजपायी पार्षद अजय कुमार सोनकर उर्फ घोंचू सहित उसके अन्य दो भाईयों को दोषी ठहरा रहे है। जबकि घोंचू का छोटा भाई चकराता रोड़ पर जूस बेचता है, इसके बारे में घोंचू के आस पड़ोस के लोग कहते हैं वह एक शरीफ आदमी है। जबकि उसके भाई का घोंचू के धन्धे से कोई लेना देना नहीं है। 


जहरीली शराब से 7 पीयक्कड़ लोगों की मौत का जिम्मेदार कौन है? दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज क्यों नहीं है?



इस बात को घोंचू के आस पड़ोस में रहने वाले लोग भी मानते है। बाहर से आये मेहमान घोंचू के चाचा का इस काण्ड से कोई लेना देना नहीं है। लेकिन पुलिस उसे भी उठा कर ले गई है। कई ऐसे सनसनीखेज तत्थ उजागर हुए है जिनमें घोंचू को बचाने के लिए कमजोर सबूतों पर आधारित कहानी गढ़ी गयी है। जहरीली शराब सप्लाई करने के कारण पुलिसिया भ्रष्टाचार को लेकर पुलिस कप्तान अरूण मोहन जोशी की कथनी और करनी में अन्तर लग रहा है। 
दारू पीने वाले मीडिया का एक गुट शहर कोतवाल के समर्थन में उसे साफ सुथरी छवि वाला बता रहे है तो दूसरा गुट अपने तौर तरीकों से भ्रष्ट, बेईमान साबित करने में लगे है। कुल मिलाकर यह कहना गलत नहीं होगा कि मीडिया अपने तौर तरीके से शराब के प्रलोभन में अपना खेल खेल रहा है और मुर्गीबाजी की तलाश में लगा रहता है। इस प्रकरण को लेकर एक चैनल के वरिष्ठ पत्रकार होने का दावा करने वाले ब्यूरो प्रभारी का कहना है कि जो अकसर किसी न किसी बहाने से पुलिस अधिकारियों के घरों में जाकर शराब पीने व लम्बी लम्बी सिगरेटों का शौकीन है। अकसर ये पत्रकार सचिवालय के मीडिया सेन्टर और प्रेस क्लब में कुन्ठाओं से ग्रस्त डींगे हांकता रहता है कि वह पुलिस विभाग के आई0पी0एस0 अधिकारी के साथ दारू पीता है, उनका दोस्त है। 
यह भी हकीकत है कि वह अपने दो जूनियर दलाल पत्रकारों की मदद् से दिनभर अधिकारियों उनके कार्यकलापों के बारे में जानकारियों हासिल करता रहता है और अपने तौर तरीकों से इस्तेमाल करता है। गहरी छानबीन के बाद कहा जा सकता है कि अजय सोनकर उर्फ घोंचू ने नदी की जमीन पर अवैध कब्जे करके कच्चे-पक्के मकानों का निर्माण कराया है। लेकिन न जाने क्यों पार्षद के दबदबे के कारण निगम के कर्मचारी और दूसरे पार्षद आंखें बन्द किये हुए है। कहने वाले तो यहां तक कहते है कि निगम के अन्दर एक ऐसा काकस बन चुका है जो घोंचू के इशारे पर नाचता है। नही तो किसकी हिम्मत है कि नदी के किनारे शराब सप्लाई का शानदार दफ्तर बनाये हुए है। 
एक ईमानदार, युवा वरिष्ठ पुलिस अधिक्षक के ये पुलिस कर्मी पिछले कई सालों से अवैध शराब की सप्लाई का कार्य कर रहे हैं। मजे की बात यह कि कि पुलिस की नाक के नीचे ही घोंचू के पार्टी ने नाम पर ही कार्यकर्ता घर-घर शराब बेचते और सप्लाई का काम करते है। चौंकाने वाला तथ्य यह है कि घर घर सप्लाई मंहगी होनी चाहिये थी परन्तु घोंचू की शराब दुकान से भी ज्यादा सस्ती घर पर ही मुहैया हो रही है तथा रात लगभग 9 बजे से सुबह 2-2ः30 बजे तक शराब, मुर्गा मुसल्लम की दावतों का दौर चलता रहता है। नतीजतन गश्त लगाने वाले पुलिस कर्मचारी और अधिकारी घोंचू के दफ्तर और आवास पर छापेमारी न कर उसके दरबार में खाते पीते रंगरलियां में अपनी थकान को उतारते हैं। अपुष्ट खबरों पर यकीन करें तो अपनी गश्त की थकान को उतारने के घोंच और उसके कारिंदे पुलिस के साथ रंगरंगीलीयों का खेल भी खेलते हैं। घोंच ने पार्षद होने के प्रभाव का नाजायज फायदा उठाकर कब्जाई जमीनों पर झुग्गी झोपड़ी, कच्चे पक्के मकानों में कूड़ा बिनने वाली औरतों को अच्छे खासे मोटे किराये पर रहने के लिए दिया हुआ है और अपने सप्लाई के धंधे में लगा रखा है।
नगर निगम के मेयर एक ईमानदार, मेहनतकश, स्वस्थ सोच वाले सरल स्वभावी भाजापायी नेता हैं। सत्तारूढ़ दल के कुछ भाजापायी नेताओं ने जिस तौर तरीके से मुख्यमंत्री को इस काण्ड से बेवजह दूर-दूर तक का कोई सम्बन्ध नहीं होने के बावजूद बदनाम करने के लिए अपना ब्राहमण बनाम ठाकुर का राजनीतिक खेल खेल रहे हैं और विपक्ष इसको हवा दे रहा है। इसमें कोई शक नहीं कि पुलिस, मीडिया और अपराधियों का गठजोड़ जो सामने आया है उसने इस काण्ड को और अधिक चिन्ता का विषय बना दिया है। जो एक जांच का विषय है। 
यही वजह लगती है कि जहरीली शराब पीने के बाद कई लोगों की मौंत ने मामले को हल्का फुल्का बनाकर अपने लाडले-दुलारे पालनहार घोंचू को पुलिसियां कहानियों की चर्चाओं के बीच नाटकीय ढ़ग से गिरफ्तारी दिखाकर जेल भेज दिया है। अजय सोनकर के मकान के बगल वाली गली में डर और भय का माहौल बना हआ है। शायद इसीलिए मौहल्ले के रहने वाले लोग जबान नहीं खोलना चाहते और हकीकत को बयान करने से डरते हैं। 
जोरों से हवा फैली हुई है कि पुलिस ने अजय सोनकर के खिलाफ हल्की फुल्की धाराओं में चालान किया है जो कुछ ही समय में जमानत में बाहर आकर प्रतिशोध की भावना से लोगों को तंग करेगा। यह एक कड़वा सच है कि पुलिस अजय सोनकर उर्फ घोंचू के इशारे पर नाचती है। घोंचू का इतना जबरदस्त दबदबा है कि उसका धन्धा अभी भी बदस्तर जारी है। एक पड़ोसी को यह विश्वास दिलाते हुए कि उसका नाम नहीं आयेगा जो कहानियां बतायी है उससे पुलिस का घिनौना और शर्मनाक चेहरा उजागर होता है। उल्टा इस व्यक्ति ने सवाल करते हुए संवाद लेखक से पूछा क्या आप समझते है कि घोंचू की अवैध कमाई का हिस्सा बटवारे के ऊपर तक नहीं जाता और फिर बड़े अधिकारियों का नाम व्यगांत्मक तरीके से उछालने लगता है जिनका इस काण्ड से दूर-दूर तक कोई रिश्ता नहीं है। 
यह कड़वा सच है कि हर चौकी, थाने में अभिसूचना ईकाई के छोटे बड़े अधिकारी पुलिस पर निगरानी रखने के लिए तैनात रहते हैं जिनकी सीधा जवाबदेही पुलिस कप्तान के पास रहती है। लेकिन लगता है कि अभिसूचना ईकाई के अधिकारी व कर्मचारी भी इस मामले में अपनी जिम्मेदारी से कतराये हुए हैं। कुल मिलाकर हमारी पुलिस व्यवस्था ही चरमरा गयी है जिसमें सुधार लाने की जरूरत है। 
-सम्पर्क सूत्रः jagmohan-journalist/yahoo.com, jagmohanblitz@gmail.com


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