बुधवार, 11 दिसंबर 2019

औद्योगिक इकाइयों को रियायतों के बावजूद ठेकेदारी प्रथा का क्या औचित्य: मोर्चा

औद्योगिक इकाइयों को रियायतों के बावजूद ठेकेदारी प्रथा का क्या औचित्य: मोर्चा           


 - अधिकांश औद्योगिक इकाइयों/ फैक्ट्रियों में युवाओं से लिया जा रहा ठेके पर काम          


- हर प्रकार की रियायतें दी जा रही औद्योगिक इकाइयों को          


- निर्धारित समय से अधिक लिया जाता है काम               -

- ठेकेदारों /बिचौलियों द्वारा किया जा रहा श्रमिकों का आर्थिक शोषण              

- सरकार श्रमिकों के  हितों पर दे ध्यान      

संवाददाता

देहरादून। जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने बयान जारी कर कहा कि प्रदेश कि अधिकांश औद्योगिक इकाइयों में युवाओं से ठेका प्रथा के माध्यम से कार्य कराया जा रहा है, जिसके चलते श्रमिकों का कई प्रकार से शोषण हो रहा है, लेकिन सरकार इस ओर ध्यान देने को तैयार नहीं है | महत्वपूर्ण तथ्य है कि इन इकाइयों को हर प्रकार की रियायतें प्रदान करने के बावजूद आखिर प्रदेश के युवाओं को मिल क्या रहा है ! 

नेगी ने कहा कि इससे बड़े दुर्भाग्य की बात क्या होगी की एक मुख्यमंत्री, जिनके पास स्वयं औद्योगिक विकास विभाग का जिम्मा भी है, ने गरीब श्रमिकों से मुंह मोड़ लिया रखा है, जिसके फलस्वरूप ठेकेदारों/ बिचौलियों के दिन फिर गए हैं तथा इसी का फायदा उठाकर  श्रमिकों से निर्धारित समय से अधिक कार्य लिया जाता है | इसके अतिरिक्त अजीज वेतन भी 20- 30 फ़ीसदी बिचौलियों की जेब में चला जाता है, जिस कारण गरीब मजदूर को 5-7 हजार में संतोष करना पड़ता है |       

नेगी ने कहा कि हर मोर्चे पर विफल सरकार कुछ भी करने को तैयार नहीं है | 

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