मंगलवार, 24 दिसंबर 2019

कहानीः पत्नी का भूत

कहानीः पत्नी का भूत



प्रिंस पांडे
देहरादून। एक आदमी की पत्नी अचानक से बहुत बीमार पड़ गयी। मरने से पहले उसने अपने पति से कहा-'मैं तुम्हे बहुत प्यार करती हूं। तुम्हे छोड़ कर नहीं जाना चाहती। मैं नहीं चाहती की मेरे जाने के बाद तुम मुझे भुला दो और किसी दूसरी औरत से शादी करो। वादा करो कि मेरे मरने के बाद तुम किसी और से प्रेम नहीं करोगे। वर्ना मेरी आत्मा तुम्हे चैन से जीने नहीं देगी।'
और इतना कह कर वो चल बसी।
उसके जाने के कुछ महीनो तक उस आदमी ने किसी दूसरी औरत की तरपफ देखा तक नहीं पर एक दिन उसकी मुलाकात एक ऐसी लड़की से हुई जिसे वह चाहने लगा। बात बढ़ते-बढ़ते शादी तक आ गयी और उनकी शादी हो गयी। 
शादी के ठीक बाद आदमी को लगा कि कोई उससे कुछ कह रहा है, मुड़ कर देखा तो वो उसकी पहली पत्नी की आत्मा थी।
आत्मा बोली-'तुमने अपना वादा तोड़ा है, अब मैं हर रोज तुम्हे परेशान करने आउंगी।'
और इतना कह कर वो गायब हो गयी। आदमी घबरा गया, उसे रात भर नींद नहीं आई। अगले दिन भी रात को उसे वही आवाज सुनाई दी।
'मैं तुम्हे चैन से नहीं जीने दूंगी।. मैं जानती हूं कि आज तुमने अपनी नयी पत्नी से क्या-क्या बातें की।' और उसने आदमी को अक्षरशः एक-एक बात बता दी।
आदमी डर कर कांपने लगा। अगले दिन वह शहर से बहुत दूर एक जेन मास्टर के पास गया और सारी बात बता दी।
मास्टर बोले-'ये प्रेत बहुत चालाक है!'
'बिलकुल है, तभी तो मेरी एक-एक बात उसे पता होती है।' आदमी घबराते हुए बोला।
मास्टर बोले-'कोई बात नहीं मेरे पास इसका भी इलाज है। इस बार जब तुम्हारी पत्नी का भूत आये तो मैं जैसा कहता हूं तुम ठीक वैसा ही करना।'
उस रात जब आत्मा वापस आई तो आदमी बोला-'तुम इतनी चालाक हो। मैं तुमसे कुछ भी नहीं छिपा सकता। और जैसा कि तुम चाहती हो मैं अपनी पत्नी को छोड़ने के लिए भी तैयार हूं पर उसके लिए तुम्हंे एक प्रश्न का उत्तर देना होगा और अगर तुम उत्तर न दे पायी तो तुम्हे हमेशा-हमेशा के लिए मेरा पीछा छोड़ना होगा।'
पत्नी का भूत बोला-'मंजूर है। पूछो अपना प्रश्न।'
आदमी ने पफौरन जमीन पर पड़े बहुत सारे छोटे-छोटे कंकड़ अपनी मुट्ठी में भर लिए और बोला-'बताओ मेरी मुट्ठी में कितने कंकड़ हैं?'
और ठीक उसी समय भूत गायब हो गया।
कुछ हफ्रतों बाद वो एक बार फिर से जेन मास्टर के पास उनका शुक्रिया अदा करने पहुंचा।
'मास्टर, उस भूत से मेरा पीछा छुड़ाने के लिए मैं जीवन भर आपका आभारी रहूंगा।', आदमी बोला-'पर मैं ये नहीं समझ पाया की आखिर उस प्रश्न में ऐसा क्या था कि एक झटके में ही भूत गायब हो गया?'
मास्टर बोले-'बेटा, दरअसल कोई भूत था ही नहीं!
'मतलब!, आदमी आश्चर्य से बोला।
'हां, कोई भूत था ही नही, दरअसल दूसरी शादी करने की वजह से तुम्हें एक अपराधबोध महसूस हो रहा था और उसी वजह से तुम्हारा दिमाग एक भ्रम की स्थिति पैदा कर तुम्हे भूत का अनुभव करा रहा था।', मास्टर ने समझाया।
'पर ऐसा था तो वो मेरी हर एक बात कैसे जान जाता था?, आदमी ने पूछा।
मास्टर मुस्कुराये-'क्योंकि वो तुम्हारा बनाया हुआ ही भूत था, इसलिए जो कुछ तुम जानते थे वही वो भी जानता था और यही कारण था कि मैंने तुम्हे वो कंकड़ वाला प्रश्न पूछने को कहा, क्योंकि मैं जानता था कि इसका उत्तर तुम्हे भी नहीं पता होगा और इसलिए भूत भी इसका उत्तर नहीं दे पायेगा और तुम्हंे तुम्हारे दिमाग की ही उपज से छुटकारा मिल जायेगा।
आदमी अब पूरी बात समझ चुका था। उसने एक बार फिर मास्टर को धन्यवाद किया और अपने घर लौट गया।


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