गुरुवार, 11 मार्च 2021

हेयर डाई से महिलाओं में स्तन कैंसर का खतरा

हेयर डाई से महिलाओं में स्तन कैंसर का खतरा


 

एजेंसी

नई दिल्ली। बालों को डाई करना या उन्हें रंगने में कोई बुराई नहीं लेकिन इंटरनेशनल जर्नल आफ कैंसर में बीते दिनों प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक परमानेंट डाई करने वाली अप्रफीकी मूल की अमरीकी महिलाओं में स्तन कैंसर के कुछ मामले सामने आए हैं। हालांकि इस रिपोर्ट की सबसे बड़ी खामी यह है कि शोधकर्ता डाई के कारण कैंसर के प्रभाव को स्पष्ट नहीं कर पाए हैं। रिपोर्ट में शोधकर्ताओं ने कहा है कि शोध में शामिल सभी महिलाओं के परिवार के किसी न किसी महिला सदस्य में स्तन कैंसर की चिकित्सकीय इतिहास रहा है। शोध में 5 से 8 सप्ताह के अंतर से की जाने वाली डाई को स्थायी डाई कहा है। शोध में सामने आया की अमरीकी अप्रफीकी मूल की वे महिलाएं जो 5 से 8 सप्ताह में बालों को परमानेंट डाई करती हैं उनमंे ब्रेस्ट कैंसर खतरा 60 फीसदी अधिक पाया गया।

हाल ही में हुए कुछ शोध में शोधकर्ताओं ने सवाल उठाया है कि बालों को रंगने या डाई करने से इनमें मौजूद रसायन से हमें कितना खतरा है? इंटरनेशनल जर्नल आफ कैंसर में पिछले महीने प्रकाशित एक अध्ययन में बताया गया है कि अप्रफीकी-अमरीकी महिलाएं जो हर पांच से आठ सप्ताह में अपने बालों को स्थाई डाई से रंगती हैं, उन महिलाओं में स्तन कैंसर होने की आशंका 60 प्रतिशत अधिक है। शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि जो लोग प्रत्येक पांच से आठ सप्ताह में अपने बालों को रंगते हैं, उनमें स्तन कैंसर की संभावना 8 प्रतिशत अधिक होती है। दिसंबर में जारी नेशनल इंस्टीट्यूट आफ हेल्थ के शोध अनुसार उन अमरीकी महिलाओं में स्तन कैंसर की आशंका ज्यादा होती है जो नियमित रूप से अपने बालों को रंगने के लिए स्थायी डाई का इस्तेमाल करती हैं। अमरीकी संस्था आर्प के एक सर्वे के अनुसार 38 से 53 साल की 69 फीसदी और 54 से 72 साल की 65 फीसदी महिलाओं का एक बड़ा वर्ग बाल डाई करता है।

शोधकर्ताओं ने 35 से 74 साल की उम्र के बीच की 46,709 महिलाओं को शोध में शामिल किया। इनके परिवार की कम से कम एक महिला का स्तन कैंसर का इलाज हुआ था। इनमें से 55 फीसदी महिलाओं ने स्थायी रूप से बाल डाई करना स्वीकारा। सह-लेखिक एलेक्जेंड्रा व्हाइट का कहना है कि शोध को जागरुकता के रूप में देखें। वहीं वैज्ञानिक भी परिणाम से असंतुष्ट हैं और अधिक शोध की जरुरत बता रहे हैं। हालांकि अमरीकन कैंसर सोसायटी की सलाह है कि गर्भावस्था या शुरू के तीन माह हेयर डाई से बचना चाहिए।

अध्ययन में यह स्पष्ट नहीं है कि शोध में शामिल महिलाओं के कैंसर से जुड़े स्थानीय आंकड़े क्या हैं? वहीं अध्ययन भारतीय आबादी के लोगों पर नहीं हुआ है इसलिए इसे सीधे तौर पर भारतीय संदर्भ में न देखें क्योंकि कैंसर के कई कारण हो सकते हैं। विडंबना यह है कि अमरीका जैसे देशों में युवा महिलाएं अपने बालों के टाइटेनियम, ब्लू स्टील, स्मोकी ग्रे और गनमेटल जैसे रंगों में ब्लीच करने और रंगने में 1000 डालर यानी करीब 70 हजार तक खर्च कर रही हैं।

शोधकर्ताओं ने 35 से 74 साल की उम्र के बीच की 46,709 महिलाओं को शोध में शामिल किया। सभी प्रतिभागियों के परिवार की कम से कम एक महिला का स्तन कैंसर का निदान किया गया था। इनमें से 55 फीसदी महिलाओं ने स्थायी रूप से बाल डाई करना स्वीकारा। अध्ययन के दौरान ही 2794 अप्रफीकी-अमरीकी महिलाओं और श्वेत महिलाओं को स्तन कैंसर का पता चला था। इतना ही नहीं अध्ययन में शामिल हुए बिना भी साल के किसी भी समय अश्वेत महिलाओं में 45 फीसदी और श्वेत महिलाओं में 7 फीसदी महिलाओं में स्तन कैंसर के पता चलने की आशंका थी। सह-लेखक एलेक्जेंड्रा व्हाइट ने अध्ययन के आधार पर अनुमान लगाया है कि प्रत्येक 100 अश्वेत महिलाओं में से 5 को और प्रत्येक 100 श्वेत महिलाओं में से एक को स्तन कैंसर होने की आशंका है। कुछ अन्य शोध नियमित डाई करने वाली महिलाओं में ब्लेडर केंसर की भी पुष्टि करते हैं। अमरीकन कैंसर सोसायटी के अनुसार कुछ चिकित्सक भी अपनी महिला मरीजों को सलाह देते हैं कि वे गर्भवती होने के दौरान डाई न करें खासकर शुरुआती कुछ महीनों में।


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