गुरुवार, 11 मार्च 2021

पति-पत्नी में होने चाहिए यह गुण

 पति-पत्नी में होने चाहिए यह गुण



विवाह की सफलता और असफलता ही किसी भी दंपति के आने वाले जीवन की नींव

प0नि0डेस्क

देहरादून। विवाह वो पड़ाव है जिसके लिए स्त्री हो या पुरूष, दोनों ने ही बहुत सारे सपने देखे होते हैं और बाद में जिन्दगी का यह बदलाव अहम पड़ाव साबित होता है। विवाह की सफलता और असफलता ही किसी भी दंपति के आने वाले जीवन की नींव होती है। हिन्दू धर्म में विवाह को बहुत महत्व दिया गया है। यही वजह है कि इस संबंध को तोड़ना जिसे आम बोलचाल में डायवोर्स कहा जाता है इतना आसान नहीं होता। 

खासकर हिन्दू संस्कृति में विवाह को जीवन भर का साथ कहा गया है और इसी वजह से बड़े-बुजुर्ग भी यह कहते हैं कि हमेशा सोच-समझकर ही किसी रिश्ते को अपनाना चाहिए। विवाह से पहले कुंडली मिलान तो जरुरी है ही लेकिन जिससे आप विवाह करने जा रहे हैं, उसके बारे में अच्छे से जाने के बाद ही विवाह की मंजूरी दी जाती है। 

बड़े-बुजुर्गों के अलावा धर्मशास्त्र भी कुछ ऐसा ही कहते हैं जिनका ध्यान अगर रखा जाए तो अपने लिए जीवनसाथी का चुनाव करने में कभी भूल नहीं होगी। कहते हैं कि एक स्त्री ही घर को स्वर्ग बना सकती है और अगर चाहे तो नर्क भी बना सकती हैं। आजकल भले ही महिलाएं आत्मनिर्भर हो रही हों, खुद बाहर निकलकर पुरुषों की तरह काम कर रही हों लेकिन इसके बावजूद घर को संभालने जैसे गुण उनके सिवाए किसी और के अंदर नहीं हो सकता है। ऐसा ही कुछ पुरुषों के साथ भी है। तो यह जानना महत्वपूर्ण है कि स्त्री और पुरुष में ऐसे क्या गुण है जो दोनों में पाए जाते हैं, खासकर तब जबकि वे विवाह करना चाहते हैं।

शास्त्रों के अनुसार एक स्त्री का शरीर इतना स्वास्थ होना चाहिए जिससे वह आगे चल कर अच्छी और स्वस्थ संतान पैदा कर सके। साथ ही स्त्री का व्यवहार अच्छा होना चाहिए जिससे वह घर, बच्चों और बड़ों को अच्छे से संभाल सके। स्त्री को मानसिक तौर पर मजबूत होना चाहिए। जिससे घर में सकारात्मकता बनी रहे और बच्चों को एक अच्छा मौहोल मिलता है। एक स्त्री को सबकी बात सुनी चाहिए जिससे वह अपने बच्चों या बड़े बुज़ुर्ग को संभाल सके। यही नहीं इसे घर में होने वाली छोटी छोटी परेशानियों को भी कम करने में मदद मिलती है। 

इसके अलावा स्त्री के अंदर आध्यात्मिकता और ईश्वर में विश्वास होना चाहिए जिससे वह आने वाले वक्त में अपने परिवार को मुश्किल हालातों से बाहर निकाल सकती है। उबारने का कार्य करती है। हर एक स्त्री के अंदर अपने परिवार और बच्चों के प्यार होना चाहिए। क्योंकि विवाह भारतीय समाज में जीवनभर का साथ होता है। उसका समर्पण उसके परिवार और पति के लिए हमेशा के लिए होना चाहिए।

ऐसी ही कुछ बातें पुरूषों के लिए भी अपेक्षित होती है। पुरुषों के भीतर सबसे पहला और बड़ा गुण होना चाहिए अपनी पत्नी के प्रति उनका समर्पण। साथ ही उसे अपनी पत्नी की इज्जत करनी चाहिए। जो पति अपनी पत्नी से राज नहीं छुपता है वही आदर्श पति होता है। इससे पत्नी के दिल में उसे खास जगह मिलती है। स्त्री हो या पुरुष, दोनों को धार्मिक अवश्य होना चाहिए। उनका पवित्र आचरण परिवार के लिए लाभदायक होता है। पुरुष के अंदर धैर्य, प्रेम और दूसरों का ख्याल रखने का गुण होना चाहिए क्योंकि उसे भी एक दिन पिता बनना होगा।

शास्त्र कहते है कि जो पुरुष अपनी जिन्दगी को एक अनुशासित तरीके से जीता है वही अपना विवाहित जीवन को अच्छे से निभाता है। पुरुष के लिए भी अपने परिवार के लिए प्रेम और सम्मान अवश्य होना चाहिए। इसके अलावा वह अपने परिवार की रक्षा करने वाला भी होना चाहिए।

यदि विवाह से पूर्व इन गुणों को स्त्री या पुरूष अपने में समाहित करते है तो उनका आने वाला दांपत्य जीवन सफलतापूर्वक कटता है और जीवनभर के लिए उनकी जोड़ी प्रेममय वातावरण में व्यतीत करते है। 


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