शुक्रवार, 12 नवंबर 2021

वेलमेड हास्पिटल ने नई तकनीक से किया सफल न्यूरोइंटरवेंशन

 उत्तराखंड में पहली बार आईएसडी विधि द्वारा न्यूरो सर्जरी



वेलमेड हास्पिटल ने नई तकनीक से किया सफल न्यूरोइंटरवेंशन

आईएसडी विधि द्वारा न्यूरो सर्जरी करने में उत्तर भारत में वेलमेड हास्पिटल बना तीसरा सेंटर

संवाददाता

देहरादून। टर्नर रोड़ स्थित वेलमेड हास्पिटल के न्यूरो विभाग (नाडी एवं मस्तिष्क रोग विभाग) में आधुनिक विधि प्दजतं ेंबबनसंत बवदजवनत कमअपबम (इंट्रा सैक्युलर कंटूर डिवाइस) से सफल इंटरवेंशन सर्जरी की गई। उत्तराखंड में इस तरह की पहली न्यूरोसर्जरी हुई है और पूरे उत्तर भारत में देहरादून का वेलमेड हास्पिटल तीसरा सेंटर है, जहां आईएसडी विधि द्वारा न्यूरो सर्जरी हुई है। इससे पहले कुछ केस दिल्ली एनसीआर में हुए और एक केस चंडीगढ़ में हुआ है। इस तकनीक में उसी तरह काम किया जाता है, जैसे हार्ट में स्टंटिग के दौरान किया जाता है। इसमें बिना कट लगाए कैथटर की मदद से इंट्रा सैक्युलर कंटूर डिवाइस लगाकर डैमेज नस को ठीक किया जाता है।

न्यूरो सर्जन डा0 नरेश पंवार ने बताया कि देहरादून निवासी 55 वर्षीय महिला  सिरदर्द और उल्टियों की लेकर इमरजेंसी में आई थी। बेसिक जांच कराने पर पता चला कि उनके दिमाग की नस फट गई है, जिसे मेडिकल में एनरिज्म कहा जाता है। इसका एकमात्र उपाय सर्जरी ही होती है, यदि समय रहते सर्जरी ना हो तो मरीज की जान को खतरा रहता है या विकलांगता हो सकती है। अभी तक एनरिज्म के इलाज के लिए क्लिपिंग और कोइलिंग की जाती थी, जिसके अपने-अपने रिस्क फैक्टर भी होते हैं। इसलिए हमने पिछले साल लान्च हुई इंट्रा सैक्युलर कंटूर डिवाइस के बारे में मरीज को बताया और उनकी काउंसलिंग की।

उन्होंने  बताया कि इंट्रा सैक्युलर कंटूर डिवाइस (आईएसडी) एक छतरीनुमा डिवाइस है, जिसे कैथटर की मदद  से नस के अंदर ले जाया जाता है। जहां पर नस डैमेज होती है, वहां पर ले जाने के बाद यह डिवाइस खुल जाता है और नस फटने से होने वाले रक्तस्राव को रोकता है, साथ ही मुख्य नस को खुला रखता है ताकि आक्सीजन युक्त खून दिमाग में सही ढं़ग से चलता रहे। यह डिवाइस उम्रभर मरीज के दिमाग में ही रहेगा। अभी तक की स्टड़ी में इसके बहुत अच्छे रिजल्ट मिले है। यूरोप में पिछले कई सालों से इसी विधि से एनरिज्म का इलाज किया जा रहा है लेकिन भारत में यह एक साल पहले ही शुरू हुआ और उत्तरांखड में इस विधि द्वारा पहली बार सर्जरी की गई है।

वेलमेड हास्पिटल के सीएमडी डा0 चेतन शर्मा ने बताया कि वेलमेड हास्पिटल उत्तराखंड के लोगों को विश्वस्तरीय चिकित्सीय सुविधाएं देने के लिए प्रतिबद्व है। हमने पहले भी हार्ट, न्यूरो, गायनी की कई दुर्लभ सर्जरी की है और भविष्य में भी करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि अक्सर लोग सोचते हैं कि बड़ी सर्जरी तो दिल्ली, मुम्बई जैसे महानगरों में ही हो सकती है लेकिन ऐसा नहीं है अगर मरीज भरोसा करें तो देहरादून जैसे शहरों में भी बड़ी से बड़ी सर्जरी हो सकती है। जैसे कि इस केस में मरीज ने वेलमेड हास्पिटल पर और हमारे डाक्टर्स पर भरोसा कर यहीं सर्जरी करने का विकल्प चुना, इनके इस भरोसे के कारण हम इस सर्जरी को सफलतापूर्वक कर पाएं।

वेलमेड हैल्थकेयर सोसायटी के सदस्य महेश पांडेय और राजेश परमार ने भी इस उपलब्धि के लिए डाक्टर्स को सम्मानित किया। इस मौके पर डा0 ईशान शर्मा, डा0 शेखर बाबू, डा0 नूपूर, कैथलैब टीम से नवीन, हरीश, ओटी नर्सिंग स्टाफ ईशान, अन्जुम एवं सम्राट देब, विशाल सेठी, सुनील कुकरेती और पुष्पा रावत आदि मौजूद रहे।

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