शुक्रवार, 7 जनवरी 2022

क्रिप्टो का वातावरण पर पड़ता है गलत असर

 क्रिप्टो का वातावरण पर पड़ता है गलत असर



क्रिप्टो की एक ऐसी कमी के बारे में जिससे हर कोई वाकिफ नहीं  

निखिल कुमार

देहरादून। आपने बिटकाइन का नाम तो सुना ही होगा और जैसे क्रिप्टो करेंसी चलन में आ रही है, हर इंसान इसमें निवेश करने की ओर आकर्षित हो रहा है। हम आज बात करेंगे क्रिप्टो की एक ऐसी कमी के बारे में जिससे हर कोई वाकिफ नहीं है। क्रिप्टो का वातावरण पर गलत असर पड़ता है। 

आप सोच रहे होंगे वातारवण पर कैसे बिटकाइन या कोई भी क्रिप्टो करेंसी असर डाल सकती है। असल में यह माइनिंग से जुड़ा असर है। माइनिंग क्रिप्टो कमाने का एक तरीका है। क्रिप्टो करेंसी के लिए कोई नियामक संस्था नहीं है। इसके लेन देन का जो भी अभिलेख है, वह एक ब्लाक चैन द्वारा होता है। यह ब्लाक चैन कोई भी अपने किसी भी मोबाइल या कंप्यूटर में खोल सकता है और उसमंे एक समस्या आती है। उसको आपका कंप्यूटर अपनी प्रोसेसिंग क्षमता के अनुसार साल्व करता है। इसके बाद आपको एक बिटकाइन प्राप्त होता है।

बिटकाइन के प्रर्वतक सतोशी नाकामोतो ने इस प्रक्रिया को कुछ ऐसा बनाया था कि जैसे-जैसे बिटकाइन चलन में आते जायेंगे, उसकी प्रोसेसिंग प्रक्रिया भी कठिन होती जायेगी। आज के समय में एक आम कंप्यूटर से बिटकाइन माइन करना नामुमकिन हो चुका है। जब यह हुआ तो माइनर्स ने खास सिस्टम रिग बनाये जिसमंे शक्तिशाली ग्राफिक कार्ड जिनकी प्रोसेसिंग क्षमता काफी ज्यादा होती है, उसका प्रयोग करते है। 

यह काफी ज्यादा मात्रा में ऊर्जा का इस्तेमाल करते है। अब बिटकाइन इतना चलन में आ चुका  है कि यह शक्तिशाली कंप्यूटर पर भी माइनिंग में मुनाफा नहीं दे पाते। इस कारण चीन व कई अन्य देशांे में फैक्टरियां स्थापित की गयी है जो इतनी ज्यादा बिजली का प्रयोग करते है, वह कई देशों में इस्तेमाल होने वाली बिजली खपत से भी अधिक है। इससे जो गरमी पैदा होती है, उसके प्रभाव को कम करने के लिए प्रयुक्त होने वाले एअर कंडीशनिंग से ग्लोबल वार्मिंग होती है। 

आपको इसके लिए होने वाली बिजली प्रयोग का अंदाजा इस चीज से लगेगा कि 2009 में एक बिटकाइन मात्र कुछ सेकंड की बिजली से माइन हो सकता था। आज एक बिटकाइन माइन करने के लिए जितनी ऊर्जा का प्रयोग होता है उससे एक आम घर में 9 साल तक बिजली का उपयोग कर सकते है। 


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