सोमवार, 7 मार्च 2022

सरकारी कर्मचारी कर रहे नई पेंशन का विरोध!

 सरकारी कर्मचारी कर रहे नई पेंशन का विरोध!



पेंशन देनदारियों से छुटकारा पाने के लिए शुरू की गई थी एनपीएस

प0नि0डेस्क

देहरादून। इस वक्त पुरानी पेंशन योजना और नई पेंशन योजना को लेकर कर्मचारियों के विरोध की चर्चा है। कई प्रदेशों ने कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना को फिर से बहाल करने का ऐलान किया है। जबकि कई प्रदेशों के कर्मचारी इसको लेकर प्रदर्शन कर रहें है।  

विदित हो कि दिसंबर 2003 में अटल बिहारी बाजपेई सरकार ने पुरानी पेंशन योजना को खत्म कर दिया था। इसके बदले में एक अप्रैल 2004 को नई पेंशन योजना (एनपीएस) लागू की गई थी। एनपीएस को वापस लेने की मांग को देखते हुए कई प्रदेशों ने पुरानी योजना को बहाल करने का ऐलान किया है।

राजस्थान के बाद छत्तीसगढ़ ने भी अगले वित्तीय वर्ष से पुरानी पेंशन योजना को फिर से शुरू करने की घोषणा की है। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि पुरानी पेंशन योजना और नई पेंशन योजना में आखिर क्या अंतर है।

राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) सरकार के लिए पेंशन देनदारियों से छुटकारा पाने के लिए शुरू की गई थी। 2000 के दशक की शुरुआत के एक शोध का हवाला देते हुए एक न्यूज रिपोर्ट के मुताबिक भारत का पेंशन कर्ज बेकाबू स्तर पर पहुंच रहा था।

एनपीएस ग्राहकों (सरकारी कर्मचारियों) को यह तय करने की अनुमति देता है कि वे अपने पूरे करियर में पेंशन खाते में नियमित रूप से योगदान करके अपना पैसा कहां निवेश करना चाहते हैं। रिटायरमेंट के बाद वे पेंशन राशि का एक हिस्सा एकमुश्त निकाल सकते हैं और बाकी का इस्तेमाल वार्षिकी (ंददनपजल चसंद) खरीदने के लिए कर सकते हैं।

पुरानी पेंशन योजना में कर्मचारी की सैलरी से कोई कटौती नहीं होती थी। वहीं नई पेंशन स्कीम में कर्मचारी की सैलरी से 10 फीसदी की कटौती की जाती है। साथ ही इसमें 14 फीसदी हिस्सा सरकार मिलाती है। पुरानी पेंशन योजना में जीपीएफ की सुविधा होती थी, लेकिन नई स्कीम में जीपीएफ की सुविधा नहीं है। 

पुरानी पेंशन स्कीम में रिटायरमेंट के समय की सैलरी की करीब आधी राशि पेंशन के रूप में मिलती थी। जबकि नई पेंशन योजना में निश्चित पेंशन की कोई गारंटी नहीं है। पेंशन योजना में आने वाले कर्मचारियों को सेवानिवृत्त के बाद पूरी रकम मिलने के बाद बेसिक सैलेरी का करीब करीब 50 फीसदी हिस्सा पेंशन के तौर पर मिल जाता है।

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