रविवार, 18 अप्रैल 2021

रेमडेसिविर दवा को लेकर देश में मची मारामारी

 रेमडेसिविर दवा को लेकर मारामारी



कोरोना के गंभीर मरीजों के इलाज में रेमडेसिविर इंजेक्शन का इस्तेमाल 

एजेंसी 

नई दिल्ली। देश में कोरोना महामारी की दूसरी लहर ने कहर बरपा रखा है। कोरोना का संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। इस बीच देश में अचानक रेमडिसिविर दवा की कमी पाई गई है। इस कारण कोरोना मरीजों के इलाज में मुश्किलें आ रही है।  देश में हालात ऐसे बन गए है कि जिसे रेमडेसिविर की जरूरत नहीं है वो भी इस दवा के लिए प्रयास कर रहा है। इस दवा के लिए लोग मेडिकल स्टोर का चक्कर काट रहे हैं लेकिन यह दवा नहीं मिल रही है। 

रेमडेसिविर एक एंटी वायरल दवा है जिसे अमेरिका की दवा कंपनी गिलियड साइंसेज ने बनाया है। इसे करीब एक दशक पहले हेपेटाइटिस सी और सांस संबंधी वायरस का इलाज करने के लिए बनाया गया था, लेकिन इसे कभी बाजार में उतारने की मंजूरी नहीं मिली। कोरोना महामारी के दौर में रेमडेसिविर इंजेक्शन को जीवन रक्षक दवा के रूप में देखा जा रहा है। इस वजह से रेमडीसिविर इंजेक्शन को लोग महंगी कीमत पर भी खरीदने को तैयार हैं। रेमडेसिविर इंजेक्शन का इस्तेमाल कोरोना के गंभीर मरीजों के इलाज में किया जाता है। हालांकि कोरोना के इलाज में इसके प्रभावी ढ़ंग से काम करने को किसी ने मान्यता नहीं दी है। 

कोरोना संकट के बाद इसकी बिक्री में उछाल आया है। भारत में इस दवा का प्रोडक्शन सिप्ला, जाइडस कैडिला, हेटेरो, माइलैन, जुबिलैंट लाइफ साइंसेज, डा0 रेड्ढीज, सन फार्मा जैसी कई कंपनियां करती रही हैं। गिलियड साइंसेज कंपनी ने रेमडेसिविर को इबोला के ड्रग के रूप में विकसित किया था, लेकिन माना जाता है कि इससे और भी तरह के वायरस मर सकते हैं। 

देश में कोरोना महामारी की दूसरी लहर के कारण मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। इस दौरान कोरोना के गंभीर मरीजों के इलाज के लिए रेमडेसिविर की मांग बढ़ गई है। पिछले साल के अंत में रेमडेसिविर दवा का उत्पादन कम कर दिया गया था। पिछले 6 महीनों में भारत ने करीब 10 लाख से ज्यादा रेमडेसिविर इंजेक्शन अन्य देशों को निर्यात कर दिया था। देश में इसकी किल्लत का एक कारण रेमडेसिविर इंजेक्शन की जमाखोरी और कालाबाजारी की समस्या है।

कोरोना के बढ़ेते नए मामलों के बीच केंद्र सरकार ने महामारी के इलाज में प्रयोग होने वाली प्रमुख दवा रेमडेसिविर के दाम में छूट दी है। केंद्र ने रेमडेसिविर की कीमतों में करीब 50 पफीसद दामों की कटौती की है। इसकी कीमत दो हजार रूपए तक कम कर दी गई है। 


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