सोमवार, 4 अप्रैल 2022

गंगोलीहाट में मिली अब तक की सबसे विशाल गुफा!

 गंगोलीहाट में मिली अब तक की सबसे विशाल गुफा! 



गुफा के भीतर शिवलिंग पर टपक रही पानी की बूदें

संवाददाता

पिथौरागढ़। गंगोलीहाट में प्रसिद्व सि(पीठ हाटकालिका मंदिर से करीब एक किमी दूर आठ तल वाली विशाल गुफा मिली जिसमें चट्टानों में विभिन्न पौराणिक चित्र उभरे हैं। शिवलिंग पर चट्टान की तरफ से पानी भी गिर रहा है। स्थानीय युवाओं द्वारा खोजी गई गुफा को उन्होंने महाकालेश्वर नाम दिया है।

गंगोलीहाट के गंगावली वंडर्स ग्रुप के सुरेंद्र सिंह बिष्ट, ऋषभ रावल, भूपेश पंत और पप्पू रावल ने गुफा में प्रवेश किया। गुफा के आकार को देखते हुए दंग रह गए। चारों गुफा में 200 मीटर भीतर तक पहुंचे। प्रवेश करते ही पहले करीब 35 फीट गहराई में उतरे। फिर प्राकृतिक रूप से बनी करीब आठ फीट की सीढ़ियां मिली। आगे इसी तरह आठ तल तक सीढ़ी और समतल भाग से होकर आगे बढ़े। इसमें नौवां तल भी था लेकिन वहां पहुंच नहीं सके। गुफा करीब 200 मीटर लंबी है।

क्षेत्र की अन्य गुफाओं की तरह यहां भी चट्टानों पर पौराणिक आकृतियां उभरी हैं। शिवलिंग की आकृति पर चट्टान से पानी टपक रहा है। शेषनाग व अन्य पौराणिक देवी, देवताओं के चित्र भी उभरे हैं। सुरेंद्र सिंह ने बताया कि उनके पास रोशनी के लिए कम पावर के टार्च थे और रस्सी आदि नहीं होने से वे नौंवे तल तक नहीं पहुंच सके। उन्होंने दावा किया है कि यह अब तक मिली गुफाओं में सबसे बड़ी है। गुफा के अंदर पर्याप्त आक्सीजन है। 150 मीटर गहरी पाताल भुवनेश्वर की तरह यह गुफा इस क्षेत्र के पर्यटन में मील का पत्थर साबित हो सकती है। 

गंगावली क्षेत्र के शैल पर्वत शिखर पर मानस खंड में 21 गुफाओं का जिक्र है। जिसमें 10 का पता चल चुका है। सिद्वपीठ हाट कालिका मंदिर के आसपास मिली गुफा के अलावा 3 अन्य गुफाएं होने के संकेत भी मिल चुके हैं।

गुफा खोजने वाले युवाओं ने इस गुफा को महाकालेश्वर नाम दिया है। गुफा की मौजूदगी के बारे में करीब एक साल पूर्व गंगोलीहाट के युवा दीपक रावल को जानकारी मिली थी। वह इस गुफा के संकरे प्रवेश द्वार से अंदर गए लेकिन संसाधन न होने से प्रयास सफल नहीं हो सका।

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